Tue. Oct 20th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

माला के 108 मनके हमारे हृदय में स्थित 108 नाड़ियों के प्रतीक हैं

 

बैसाख ११ गते

mala1

माला में 108 दाने होते हैं, जब भी किसी मंत्र का जाप किया जाता है तो वो 108 बार ही किया जाता है। क्या आप जानते हैं माला में 108 दाने क्यों होते हैं और क्यों किया जाता है किसी मंत्र का 108 बार जाप किया जाता है आइए जानते हैं इसके बारे में….

ज्योतिष के अनुसार ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है। इन 12 भागों के नाम मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन हैं। इन 12 राशियों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु विचरण करते हैं। अतः ग्रहों की संख्या 9 का गुणा किया जाए राशियों की संख्या 12 में तो संख्या 108 प्राप्त हो जाती है। इसके साथ ही कुल 27 नक्षत्र होते हैं। हर नक्षत्र के 4 चरण होते हैं और 27 नक्षत्रों के कुल चरण 108 ही होते हैं। माला का एक-एक दाना नक्षत्र के एक-एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है। इन्हीं कारणों से माला में 108 मोती होते हैं।

यह भी पढें   हनुमानढोका के दशैंघर में फूलपाती प्रवेश, टुँडिखेल में नेपाली सेना ने किया समारोह

माला कार्यानुसार तुलसी, वैजयंती, रुद्राक्ष, कमल गट्टे, स्फटिक, पुत्रजीवा, अकीक, रत्नादि किसी की भी हो सकती है। अलग-अलग कार्य सिद्धियों के अनुसार ही इन मालाओं का चयन होता है।

तारक मंत्र के लिए सर्वश्रेष्ठ माला तुलसी की मानी जाती है।  माला के 108 मनके हमारे हृदय में स्थित 108 नाड़ियों के प्रतीक स्वरूप हैं।  माला का 109वां मनका सुमेरु कहलाता है। जप करने वाले व्यक्ति को एक बार में 108 जाप पूरे करने चाहिए। इसके बाद सुमेरु से माला पलटकर पुनः जाप आरंभ करना चाहिए।

यह भी पढें   महाअष्टमी पर मैतीदेवी मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, सुबह से दर्शन के लिए पहुंचे भक्त

किसी भी स्थिति में माला का सुमेरु लांघना नहीं चाहिए।  माला को अंगूठे और अनामिका से दबाकर रखना चाहिए और मध्यमा उंगली से एक मंत्र जपकर एक दाना हथेली के अंदर खींच लेना चाहिए। तर्जनी उंगली से माला का छूना वर्जित माना गया है।  मानसिक रूप से पवित्र होने के बाद किसी भी सरल मुद्रा में बैठें जिससे कि वक्ष, गर्दन और सिर एक सीधी रेखा में रहे। मंत्र जप पूरे करने के बाद अंत में माला का सुमेरु माथे से छुआकर माला को किसी पवित्र स्थान में रख देना चाहिए। मंत्र जप में कर-माला का प्रयोग भी किया जाता है।

यह भी पढें   राम शब्द के रा व म से नियंत्रित होता है रक्तचाप! डॉ श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट

जिनके पास कोई माला नहीं है वह कर-माला से विधि पूर्वक जप करें। कर-माला से मंत्र जप करने से भी माला के बराबर जप का फल मिलता है।

साभार दैनिक जागरण

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com