नेपाल ज्वालामुखी के गड्ढे पर बैठा है : कुमार ज्ञानेन्द्र
काठमांडू,२६ अप्रैल | वर्तमान में नेपाल का जो राजनीतिक परिवेश है, वह नेपाल के भविष्य के लिए अच्छा नहीं है । जिस प्रकार से नेपाल की सत्ता में बैठे लोग नेपाल के अभिन्न हिस्से के रुप में रहे मधेश को दूसरे नजरिये से देख रहे हैं या देखना चाह रहे हैं, जिस प्रकार से नेपाल के नये संविधान में मधेशियों को बिल्कुल अलग–थलग कर रखा गया, जिसे दूसरे दर्जे की नागरिकता दी गई हो, तो साफ है कि नेपाल के राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक भविष्य के लिए बिल्कुल उचित नहीं है । जबकि मधेश नेपाल का एक अभिन्न हिस्सा है । मधेश में हर जाति व कौम के लोग रहते हैं । वहां के लोग नेपाल को अपनी मातृभूमि मानते हैं, मां मानते हैं, तो ऐसे हालात में एक बेटे को अपनी मां से अलग–थलग करने का जो षड़यन्त्र है, वह नेपाल के भविष्य के लिए उचित नहीं है ।
अपने अधिकार के लिए आजतक मधेशी जनता, मधेश के राजनेता और कार्यकर्ता लोकतांत्रिक तरीके से लड़ते आ रहे हैं । सरकार अगर मधेशियों की मांगों को दरकिनार करती है और उसके विरुद्ध में कोई उग्र आंदोलन हो जाए, तो उसमें सारा कसूर नेपाल सरकार का होगा । नेपाल इस समय ज्वालामुखी के गड्ढे पर बैठा है जो कभी भी विस्फोट हो सकता है । हम मधेश को हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हैं । हम कंधे से कंधा मिलाकर चलने को तैयार हैं । मधेश को सहयोग करने के लिए भारत सरकार से भी आग्रह करेंगे । इसलिए कि मधेश से भारत का रोटी–बेटी का सम्बन्ध है । वैसे हम रिश्ता बनाना और निभाना दोनों जानते हैं । रिश्ता हम बनाएं हैं, तो निभाएंगे भी । इसके लिए हम वादा करते हैं ।
अभी नेपाल सरकार ने मधेशियों, जनजातियों एवं अल्पसंख्यकों की मांगों को दरकिनार कर चुनाव की तारीख घोषणा की है, जो बिल्कुल असंवैधानिक है । लोकतंत्र में जनता सवोंपरी होती है । मुझे लगता है कि नेपाल की आधी आबादी तराई–मधेश में रहती है । अतः नेपाल सरकार आधी आबादी की मांगों को दरकिनार कर जबरन तानाशाही व्यवस्था थोपना चाहती है, तो नेपाल के भविष्य के लिए खतरनाक सिद्ध हो सकता है । बहरहाल यह जरुरी है कि सरकार मधेश के एक–एक बच्चे व एक–एक नौजबानों की हर बातों को गम्भीरतापूर्वक सुनें और उन्हें समान अधिकार दें ।
जहां तक सवाल है, जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व का, तो मैं बल देकर कहना चाहंूगा कि भारत में जनसंख्या के आधार पर चुनाव क्षेत्र का निर्धारण हुआ है, चाहे वह लोकसभा का क्षेत्र हो या विधान सभा का क्षेत्र हो । भूगोल के आधार पर सीटों का निर्धारण य संसदीय क्षेत्रों का बटवारा करना न्यायोचित नहीं है । उचित यही है कि नेपाल में जनसंख्या के आधार पर चुनाव क्षेत्र का निर्धारण हो । इसी में नेपाल का भविष्य उज्जवल बन सकता है । नेपाल सरकार द्वारा किया गया गैर लोकतांत्रिक कदम को हम विरोध करेंगे । हर स्तर पर हमलोग मधेश के साथ थे, हैं और रहेंगे ।
(कुमार ज्ञानेन्द्र, राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस, बिहार के अध्यक्ष हैं ।)


