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हमारा एक ही मकसद है– वह है ‘समृद्ध मधेश’ : डॉ. डिम्पल झा

 
(डॉ. डिम्पल झा, सभासद् व राजपा नेपाल की नेतृ हैं ।)
(डॉ. डिम्पल झा, सभासद् व राजपा नेपाल की नेतृ हैं ।)
डॉ. डिम्पल झा, काठमांडू , २ मई | पहचान, प्रतिनिधित्व व प्राकृतिक स्रोतों पर अधिकार स्थापनार्थ हम लोग अलग–अलग जगहों से संघर्ष करते आ रहे थे । मधेशी जनता व शहीद परिवारों की चाहत थी कि मधेश में एक मजबूत व्यक्ति का निर्माण हो । मूलतः मधेशी जनता व शहीद परिवारों की भावनाओं से बल मिला मधेश को ।
राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल की भावी रणनीति के बारे में मैं कहना चाहूंगी कि हम लोग सिर्फ मधेश की ही कल्पना नहीं की है, बल्कि नेपाल के अंदर समृद्ध मधेश की कल्पना की है । अभी पार्टी के नामकरण के बारे में ढेर सारी बातें सुन रही हूँ कि ‘मधेश’ शब्द को हटा दिया गया । मैं संस्मरण कराना चाहूंगी कि नेपाल सद्भावना पार्टी में ‘मधेश’ शब्द नहीं जोड़ा गया था । क्या नेपाल सद्भावना पार्टी मधेश की वकालत नहीं करती थी ? गजेन्द्र बाबू का नाम लेने से ही हम समझ जाते थे कि वे मधेश के अभिनेता हैं । अर्थात् गजेन्द्र बाबू मधेश के पर्यायवाची हैं । इसलिए पार्टी के नामकरण में ‘मधेश’ शब्द ही जोड़ा जाए, ऐसा मुझे नहीं लगता है । हमारा एक ही मकसद है– वह है ‘समृद्ध मधेश’ । हम लोग मधेश व शहीद परिवारों की भावनाओं को जोड़ना चाहते हैं ।
मैं यह भी कहना चाहूंगी कि संघीय समाजवादी फोरम नेपाल भी एकीकृत होकर आगे बढें तो अच्छा होगा । क्योंकि राजपा नेपाल एक छाता संगठन है । इस संगठन के अंदर हम सभी समा सकते हैं ।
इसी सन्दर्भ में मैं महिलाओं से जुड़े सवालों पर चर्चा करना चाहूंगी । मैं बहुत पहले से ही महिलाओं के उत्थान व विकास हेतु संघर्ष करती आ रही हूं । और सभासद बनने के पश्चात् महिला संबंधित हर कार्यक्रमों में सहभागी होने का प्रयास भी करती हूँ । मौजूदा संविधान में गांवपालिका, नगरपालिका के साथ–साथ अन्य निकायों में महिलाओं को आरक्षित किया गया है । जबकि यह आरक्षण मधेशी महिलाओं के लिए न होकर अन्य समुदाय की महिलाओं के लिए है । इसी विभेदपूर्ण व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति, सभामुख व प्रधानन्यायाधीश गैरमधेशी महिलाएं विराजमान हैं । इसलिए मैं बल देकर कहना चाहूंगी कि जब तक मधेशी महिलाओं के लिए जनसंख्या के आधार पर आरक्षित नहीं किया जाएगा, तब तक वे आगे नहीं बढ़ पाएंगी । इसलिए ऐसी व्यवस्था को स्थापित करने लिए हमें एकजुट होकर लड़ना होगा । वैसे २०६२÷०६३ के पश्चात् राजनीतिक क्षेत्रों में मधेशी महिलाओं की बढ़ोत्तरी हुई हैं । लेकिन अभी भी अधिकांश महिलाएं हाशिये पर ही हैं । इसके लिए यह जरुरी है कि महिला के प्रति नकारात्मक धारणाओं को बदलनी होगी ।
अब जहां तक सवाल है चुनाव का, तो मेरे ख्याल से संविधान संशोधन के बगैर हमारी पार्टी चुनाव में भाग नहीं लेगी । यही हमारी चुनावी रणनीति है ।
(डॉ. डिम्पल झा, सभासद् व राजपा नेपाल की नेतृ हैं ।) ( हिमालिनी समय सन्दर्भ विचार श्रंखला से )
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