Wed. Sep 16th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

राष्ट्रीय मानवअधिकार आयोग की १७ वीं नेपालगन्ज में वार्षिकोत्सव सम्पन्न

 

नेपालगञ्ज ÷(बाके)

राष्ट्रीय मानवअधिकार आयोग की १७ वीं वार्षिकोत्सव समारोह शनिवार नेपालगञ्ज में सम्पन्न हुआ है ।
समारोह में उच्च अदालत तुलसीपुर नेपालगञ्ज इजलास के वरिष्ठतम् न्यायाधीश तथा विष्णुदेव पौडेल ने आयोग की १७ वीं स्थापना दिवस की अवसर पर आयोग की क्षेत्रीय कार्यालय नेपालगञ्ज ने तयार किया १७ पाउण्ड की केक काटकर वार्षिकोत्सव समारोह की उद्घाटन किया ।
आयोग की वाार्षिकोत्सव समारोह में बोलते हुये उच्च अदालत तुलसीपुर नेपालगञ्ज इजलास के वरिष्ठतम् न्यायाधीश तथा विष्णुदेव पौडेल ने विधि की शासन होई तो मात्र मानवअधिकार की प्रत्याभूति होगी बताया । उन्हों ने मानवअधिकार की सम्मान, संरक्षण और प्रत्याभूति के लिये सम्पूर्ण सरोकारवाला निकाय एकजुट होकर कानूनी शासन के लिये आवाज उठाने के लिये जोड दिया ।

बा“के जिला के प्रमुख जिला अधिकारी रवीलाल पन्थ ने प्राकृतिक न्याय की सिद्धान्त अनुसार आयोग ने अपनी भूमिका निर्वाह कर नही पाया और आगामी दिनों में आयोग ने पीडित और आरोपित दोनों पक्ष को निष्पक्ष सुनुवाई के मौका दिने के लिये बताया ।
भेरी अञ्चल प्रहरी कार्यालय नेपालगन्ज वरिष्ठ प्रहरी उपरीक्षक महेश विक्रम शाह ने आयोग अभी भी सक्रिय और क्रियाशील होने के लिये बताते हुये मानवअधिकार के लिये निरन्तर सुक्ष्म निगरानीकर्ता के रुप में काम करने के लिये बताया नेपाल बार एशोसिएसन के केन्द्रीय उपाध्यक्ष शालिकराम सापकोटा ने आयोग ने किया सिफारिस क्यों नही कार्यान्वयन नही होती है, संवैधानिक आयोग ने अनुसन्धान के बाद में किया सिफारिस समेत कार्यान्वयन न होना दःुखद् रही है कहते हुये आगामी दिनों में आयोग को अपनी संवैधानिक क्षेत्राधिकार की उच्चतम् प्रयोग करके निरन्तर आगे बढ्ने की आग्रह किया ।
कार्यक्रम में सहभागियों ने मानवअधिकार सचेतना के लिये रेडियो कार्यक्रम की प्रभावकारिता रही है, आयोग की अनुसन्धान, अनुगमन में ढिलाई होना, समय में ही प्रतिवेदन सार्वजनिक न करना तथा अनुसन्धान पक्ष कमजोर रही है, आयोग ने अपनी क्षेत्राधिकार प्रति संवेदनशीलन रही है, समन्वय और सहकार्य प्रभावकारी न होना, पिछले दिनों में आयोग की भूमिका सक्रिय रही है, द्वन्द्व पीडितों की अधिकार प्रति कोई निकाय भी जिम्मेवार नही है, कानूनी तथा विधि की शासन नही हो पाया, मानवअधिकार उल्लंघनकर्ता को माफी मिनाहा होने की कारण से दण्डहीनता बढ्ते गया है कहते हुये नागरिकों की आधारभूत मानव अधिकार की संरक्षण और न्याय के लिये आयोग की सक्रिय भूमिका की अपेक्षा किया ।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय मानवअधिकार आयोग क्षेत्रीय कार्यालय के प्रमुख मुरारी खरेल ने कहा आयोग ने अनुसन्धान करके नेपाल सरकार को किया सिफारिस समेत कार्यान्वयन न होने से दण्डहीनता की संस्कृति कायम रही बताया । उन्हों ने नागरिक तथा राजनीतिक अधिकार की साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य लगायत की आर्थिक सामाजिक तथा सा“स्कृतिक अधिकार की परिपूर्ति में सरोकारवाला निकाय ने ध्यान देने के लिये जोड दिया ।
कार्यक्रम में जिला स्थित सरकारी, गैरसरकारी निकाय, कानून व्यवसायी, सञ्चारकर्मी, नागरिक समाज तथा मानव अधिकारकर्मी की सहभागिता रही थी ।

About Author

यह भी पढें   मुस्ताङ में आज से ‘घरपझोङ जलवायु सम्मेलन २०८३’
आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com