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1 thought on “himalini khabar

  1. दिल दहलादेनेवाले इस घिनौने कृत्यका जितना भी भर्त्सना करें कम है . अपराध का कोई जात या धर्म नहीं होता, ऐसे जघन्य अपराधीको कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए . मीडियाके तरफ से भी ऐसे अपराधके बिषयपर जातीय टिप्पणी देना/जातीयतासे जोड़ना या अन्य किसी जाति/ समुदायको दोषी या निर्दोषी बताना पत्रकारिताका नित्तांत मर्म बिपरीत होगा . ऐसे मामलोंमें मीडिया सजग रहे . अपराधीको उन्मुक्ति किसी हालत में नहीं होनी चाहिए .

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