शिव सावन का पूरा महीना धरती पर विचरण करते हैं
माला मिश्रा, बिराटनगर । आध्यात्मिक रूप से श्रावण मास का महत्वपूर्ण वर्णन हमे पुराणों के संग संग आम जीवन से भी मिलता है। शिव की स्थिरता उनके ऊर्जा को प्रवाह करती है लिंग के ऊपर से, और लिंग के उपर श्रावण मास में गंगाजल विल्वपत्र समर्पण से पुण्य की प्राप्ति तो होती ही है, मनुष्य अपने जीवन में एक व्यापक अंतर को पाता है और सुख का अनुभव करता है ।
शिव का धरती पर कैलाश से आना तो समय समय पर होता रहता है लेकिन सावन का पूरा महीना वो धरती पर विचरण करते हैं और हर शिवालय में सावन के पूजा से एक अलग ऊर्जा का संचार आप महसूस करते हैं ।
शिव का त्रिनेत्र जो सत् चित्त आनंद का रूपक है, शिव का त्रिपुण्ड जो सत्व रज तम को सूचित करती है, बिल्वा पत्र जो तीन विश्व को प्रदर्शित करती है एवं त्रिशूल जो धरती आकाश और पाताल को दर्शाती है,शिव के इस त्रि गुण का वर्णन एवं उल्लेख हमे कई जगह मिलता है और इस सब का सूत्रधार शिवलिंग की व्यापक चर्चा को संक्षेप में करते हुए उसपे श्रावण में पूजन की विधि हमे बताती है, भोलेनाथ से सिद्धि श्रावण में बिलकुल सहज है । प्रसिद्ध फिल्म कलाकार एवं कखन हरब दुःख मोर में विद्यापति की भूमिका निभाने वाले प्रफुल्ल कुमार सिंह उर्फ़ फूल सिंह जी, जिनका पूरा जीवन बाबा विद्यापति को समर्पित है और उनके विचारों और ज्ञान से पूरे विश्व को वाकिफ करवाना ही उनका मिशन है, दूरभाष पर कुछ इस तरह से श्रावण मास का वर्णन किया है,
बाबा विद्यापति ने शिव को जन जन में और सहजता रूप से अपने गीतों और भक्ति द्वारा उपलब्ध करवाया । उगना जो एक नौकर है उसके रूप में शिव का आना एक अलौकिक नहीं वास्तविक कथा है फिर शिव का उगना के रूप में स्थापति होना, शिव की सिद्धि ही तो पाना है और कलियुग में ऐसा संभव हुआ है तो ये बाबा विद्यापति के पंक्तियों की ऊर्जा, ब्रह्माण्ड की ऊर्जा को प्रेरित की और कैलाश से शिव को आना पड़ा और श्रावण का यह माह जो बारिश का भी महीना होता है इसके वैज्ञानिक कारणों पे भी गौर करें तो आकाशीय किरणे और तत्त्व वर्षा जल के रूप में धरती पर बरसती है और इस बात को सूचित करती है की किस प्रकार सम्पूर्ण तत्व और विश्व शिव की पूजा में लीन होकर जल समर्पण कर रहा है धरती पर, क्यूंकि शिव तो कण कण में हैं । सुबह की ब्रह्म मुहूर्त की बेला में आप बाबा विद्यापति द्वारा रचित भजन कखन हरब दुःख मोर गाते या सुनते हुए शिवलिंग पर जल चढ़ाइये और इस चम्तकार का एक और उदहारण बनिए । पूरा संसार, सभी ज्योतिर्लिंग, बाबा बर्फानी से लेकर चार धाम, हर जगह अभी पूरा महीना शिव शिव, हर हर बम बम गूंजता है, शिव की महिमा ही तो इसे कह सकते हैं, आप हर वर्ग में भोला का दर्शन करते हैं । कांवर सेवा का प्रतीक है और गेरुआ वस्त्र बल का, बल का सेवा के लिए उपयोग और श्रावण में शिव की पूजा, जो सीधे खेती से जुडी है, बारिश से जुडी है, मानवता को एक नयी सीख देती है । आइये श्रावण के इस महीने में भोले की भक्ति को अपने रोम रोम में महसूस करते हैं ।
शिव शक्ति के मिलन स्थल, शिवलिंग का तल भाग जो योनि को दर्शाती है और इस बात से हमे बताती है की पूरा व्योम, ॐ से प्रेरित है और यह ब्रह्माण्ड शिव का शक्ति में होना ही तो है और इस संसार रुपी गर्भ में हम परमपिता परमेश्वर को चिन्हित करते हैं लिंग रूप में, उस विशाल असीम ऊर्जा को अपने भीतर लेने के लिए, अग्नि रूप में स्थिर जीवन रूप तत्वों का प्रवाह स्वयं की ओर करने के लिए, एक उपुक्त समय नियत किया गया है वो है श्रावण माह के सोमवार और जल समर्पण से ऐसा हम कर पाते हैं । ॐ
(उपरोक्त बाते प्रसिद्ध हिन्दी फिल्म कलाकार प्रफ्फुल सिंह उर्फ फूल सिंह ने दूरभाष पर हिमालिनी से बातचीत में शिब भक्ति पर अपना उदगार व्यक्त किया ।)


