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अलबिदा रंजु झा

ranju_jha_remembarence

ranju_jha_remembarenceमिथिला राज्य संर्घष् समिति के द्वारा बनाई गई उपसमिति में अपना नाम नहीं होने से दुखी रंजु झा ने एक दिन पहले ही अपना नाम भी इस संर्घष् समिति में होने की बात पर सभी से अधिकार स्वरूप कहा था और उनके इस उत्साह को देखते हुए उसी दिन उनका नाम संर्घष्ा समिति में रखा गया था। अपना नाम समिति में आने के बाद से ही और अधिक उत्साही बनी रंजु धरना कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही रामानन्द चौक पहुंच चुकी थी।

ranju jha
हिमालिनी परि वार ऐसे कलासाधक को सलाम कर ती है और उनके हौसले को नमन कर ते हुए उनके प्रति हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित कर ती है

१२ साल से मिथिला नाट्य कला परिषद से आबद्ध होकर रंजु ने दो दर्जन से अधिक नाटक और दर्जनों सडक नाटक में अपने अभिनय के जलवे से सबका दिल जीत लिया था। उनके सभी सहकर्मी उन्हें प्यार से मिस नेपाल कह कर पुकारते थे। ओखली मूंह देखैछी, गाम नयी खेतय, ओरिजनल काम भुतहा घैल, पुष जाड कि माघ जाड, बिर्जू बिल्टु आ बाबू जैसे सुप्रसिद्ध नाटकों में उनके अभिनय का लोहा सभी ने माना है। इसी तरह मह जोडी के आमा-२, सृष्टि कालाजार, बीबीसी नेपाली सेवा के द्वारा निर्मित कथा मीठो सारंगी को और दीपक रौनियार की लघु फिल्म चौखट में उन्होंने शानदार अभिनय किया है। उनके द्वारा अभिनित बाबा धारावाहिक हाल ही में नेपाल टेलीविजन द्वारा प्रसारित भी किया गया था। नाटक के जरिये सामाजिक रूपांतरण के लिए वो हमेशा ही सक्रिय रही।
देश विदेश के फिल्म फेस्टीवल में काफी लोकप्रिय हर्ुइ लघु फिल्म चौखट में मुख्य भूमिका निर्वाह करने वाली रंजू का अभिनय अब सिनेमा के पर्दाें तक ही सीमित रह गया है। पुरूष प्रधान समाज द्वारा निर्धारण कर दी गई घेरा को लांघते हुए विद्रोह करने वाली एक नारी के रूप में लघु फिल्म चौखट में जिस तरह से रंजू ने अभिनय किया था असल जिन्दगी में भी उनका स्वभाव भी वैसा ही था। मिथिला समाज में घूंघट में रहने की प्रथा को तोडते हुए रंजु महिलाओं के अधिकार के लिए वास्तविक जिन्दगी में भी संर्घष्ा करती नजर आई और इसी संर्घष्ा के दौरान उन्हें अपनी जान भी गंवानी पडी।
मिथिला राज्य की मांग करते हुए शान्तिपर्ूण्ा धरना पर बैठे लोगों पर हुए इस दुखद और आततायी घटना से सिर्फमिथिला क्षेत्र की ही नहीं बल्कि पूरे देश ने अपना एक रंगकर्मी को खो दिया है जिसने छोटे शहर से निकल कर अन्तर्रर्ाा्रीय स्तर तक अपना नाम रौशन किया था। रंजु आज नहीं रहकर भी उन तमाम युवती और महिला के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है जो कि यह सोचते हैं कि छोटे शहर में कोई मौका नहीं होता और यहां करने को कुछ भी नहीं होता। रंजु ने यह साबित कर दिया था कि यदि आप के भीतर जोश और जज्बा हो तो आप किसी भी मुकाम को हासिल कर सकते हैं घर की चौखट और सामाजिक बन्धन आपको रोक नहीं सकती है।
घटना में मारे जानेवाले सभी को सरकार के तरफ से शहीद घोषणा हर्ुइ है और उनके परिवारजनों को दश लाख दने की बात भी हर्ुइ है । लेकिन मिथिलाबासी ने जो पीडा भुगतने पडेÞ वह इसके तुलना में कुछ नहीं है ।
हिमालिनी परिवार ऐसे कलासाधक को सलाम करती है और उनके हौसले को नमन करते हुए उनके प्रति हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करती है। ±±±

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