जिन्दाबाद या मुर्दाबाद कहने से ही आजादी नहीं मिलती है : मुरारीलाल अग्रवाल

दो हफ्ते पूर्व राजपा की केन्द्रीय कार्यसमिति की बैठक हुई थी । बैठक में झापा से लेकर कंचनपुर तक के नेता तथा कार्यकर्ताओं की उपस्थिति थी ।.बैठक में विधान पुनर्लेखन ,घोषणापत्र में संशोधन ,आर्थिक नियमावली तथा अन्य विषयों पर गहन रुप से विचार -विमर्श किया गया था।.इसी प्रकार तीसरे चरण के निकाय चुनाव के बारे में भी सहभागियों द्वारा राय व्यक्त की गई ।
अधिकांश नेता तथा कार्यकर्ताओं का कहना था कि हमें चुनाव में शामिल होना चाहिए । मेरी धारणा है कि हमें चुनाव में शामिल होना चाहिए । लेकिन अभी कि स्थिति में कार्यकर्ता रुकने वाले नहीं हैं ।वे जरूर शामिल होंगे चाहे स्वतन्त्र से ही क्यों न हो । इससे पूर्व भी प्रदेश नं.५ में पार्टी द्वारा मनाही करने पर भी पार्टी के ही नेताओं द्वारा स्वतन्त्र से उम्मीद्वारी दी गई। फिर भी पार्टी द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई । अगर ऐसी ही स्थिति रही तो ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति आगे भी हो सकती है ।इस प्रकार मधेश के हित में गहरे रुप से पार्टी को आगे बढ्ना चाहिए । इसी सन्दर्भ में मैं कहना चाहूँगा कि अभी छः पार्टियों का विलय तो हुआ लेकिन इनके हृदय का विलय नहीं हो पाया है । पार्टी आन्दोलन करना जानती है ,लेकिन आन्दोलन कैसे किया जाता है ,इसकी जानकारी पार्टी में किसी को भी नहीं है । हमें हिन्दुस्तान से शिक्षा लेनी चाहिए कि वहां के जो शीर्षस्थ नेता हैं उन्होंने किस प्रकार से आन्दोलन संचालन किया और कौन कौन सी समस्यायें झेलनी पडी। अन्त में मैं कहना चाहूंगा कि मधेश आन्दोलन को अभी तक अन्तर्राष्ट्रीय नहीं बनाया गया है । दुनिया में जो भी आन्दोलन हुआ है वह दूसरे देशों के सहयोग से ही सफल हुआ है । अतः हमें अपनी सफलता हासिल करने के लिए दूसरे देशों से अवश्य सहयोग लेना चाहिए ।

