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के आर एकल यात्री के सपनो को एक ऊंची उड़ान मिले ( शुभकामना )

 
के आर एकल यात्री
नमस्कार, जी हाँ मैं मनीषा हिमालिनी पत्रिका (नेपाल), कॉलम व्यक्तित्व और कृतित्व की श्रंखला में पूरे संसार के जाने माने, प्रसिद्ध , साहित्य को रोम रोम में आत्मसात किए हुए लेखकों को लेकर आती हूँ पर आज मैं आप और हम के बीच से एक ऐसे शख़्स का परिचय ले कर आई हूं । जो मूलतः नेपाल के रहने वाले हैं ।
जिनका परिवार आज भी यही स्थापित है बस रोजगार के सिलसिले में वो  10 साल बाहर , पर कहते है न ज़मी की खुशबू सात समंदर पार भी रची बसी रहती  है ।
उनके लिए कुछ पंक्तियां कहना चाहूंगी
“बहुत खास मेरी शख्सियत नही
ज़मी के बहुत करीब हूँ मैं….
ज़र्रा ज़र्रा जीता हूँ जिन्हें
वो मेरा , उनका नसीब हूँ मैं……
गर बुलन्दियों को छू गया
हाथ तब भी थामुंग मैं ………
मुझ में जो संस्कार हैं
मेरी माटी का अधिकार है …..
कुछ हर्फ़ ले कर उतरा हूँ
अपने खुबाबों की ज़मी पे में …….
जो साथ सब का मिल गया
कुछ कर गुज़र जाऊंगा
खुद को अपने बहुत करीब
पाउँगा मैं………………….
   ★★★जीवन परिचय★★★
★★★★★ के आर एकल यात्री ★★★★★
जन्म●● 27 जुलाई 1980
जन्म स्थान●● नागालैंड
पिता जी ●●●इण्डियन आर्मी
मूल निवास ●●●नेपाल
अस्थाई निवास ●●●मलेशिया
शिक्षा प्रारम्भिक ●●●मॉडल स्कूल किशन गंज इंडिया
मैट्रिक ●●●●त्रिभुवन मा० बी ० पैयूँपाटा बागलुड़
इंटर●●●● बलेवा पैयुंपाट कैम्पस बागलुड़
लिखित गीत ….कस्तो यो बन्धनमा
स्वर दिया ……राज सिगदेल
लिखित गीत …टयाकसी गुड्यो सरर
स्वर दिया…. तिलक बम मल्ल
लिखित गीत ,…..देउतालाई पनि नचढने
स्वर दिया …  राकेश ओली
★★★कृतियां★★★★
ग़ज़ल कृति
अक्षर हरूको पिरामिड-2071 सांझा ग़ज़ल संग्रह
हैसियत 3 7073 सांझा संग्रह
आने वाला ग़ज़ल संग्रह
तपकनी
आजीवन सदस्य
आवद्ध  साहित्य संस्था
हाम्रो मझेरी साहित्य प्रतिष्ठान चितवन
करुणा साहित्य समाज पैयुंपट बागलुड़
के आर जी के सपनो को एक ऊंची उड़ान मिले इसी शुभकामनाओं के साथ मैं

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