Fri. May 1st, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

तमाम अधिकारों और दावों के बावजूद समाज में महिलाओं की स्थिति दयनीय

 

24अगस्त काठमान्डू
मधु सिंह

फोटो साभार :lekhikaparimshlok

वर्तमान परिदृश्य में, यदि हमारे देश और समाज में महिलाओं की स्थिति पर दृष्टिगोचर करें तो यह स्पष्ट प्रतीत होता है कि महिलाओं को तमाम अधिकार मिलने के बावजूद, तमाम दावों के बावजूद उनकी स्थिति दयनीय है और अपने ही समाज में उन्हें कई प्रकार की चुनौतियों और कठिनाईयों का सामना करना पड. रहा है।
गौरतलब है कि प्राचीनकालीन समाज में भी महिलाएँ न सिर्फ आदर की पात्र थीं बल्कि उन्हें समानता का स्थान प्राप्त था । चाहे कानून के तराजू पर या प्रथाओं के नाम पर, या परंपराओं के मानदंड पर ही परखें, महिलाओं में बौद्धिक क्षमता, कार्य कौशल, वाक्पटुता आदि सभी दृष्टियों से पुरुषों के समकक्ष सममmा जाता था । वेद वेदांतर से हमें ऐसे प्रमाण मिलते हैं जिनमे प्रकृति स्वरुपा नारी को ईश्वरीय शक्तियों के रूप में स्थान मिला है कभी ज्ञानदायिनी के रूप में सरस्वती, वैभवदायिनी के रूप में लक्ष्मी, तो शक्तिदायिनी के रूप में चण्डी का रूप धारण कर महिलाओं ने सर्वत्र परमशक्ति के रूप में स्थान बनाया ।
परन्तु अफसोस, इतने अर्सों के बाद भी महिलाओं की सामाजिक स्थिति सुदृढ होने के बजाय जस की तस है और एक चीज, जो मैं अपने आप को ये कहने से रोक नहीं पा रही हूँ कि बास्तव में महिलाओं की इस स्थिति के लिए पुरुष प्रधान समाज तो जिम्मेदार है ही अपितु महिलाएँ भी उतनी ही जिम्मेदार हैं क्योंकि हम अपने को हमेशा पुरुषों से कम आँकते हैं,जबकि ऐसा है ही नहीं ,और मैं ये दाबे के साथ कह सकती हूँ कि स्त्रियों में ईश्वर द्धारा प्रदत पुरुषों से ज्यादा क्षमताएँ और शक्तियाँ हैं, फिर भी हम अपने को कमजोर सममmते हैं, अ‍ौर इसका एक बडा कारण है कि पुरुषों ने समाज में असमानता का ऐसा बीज बो रखा है कि महिलाएँ अपनी शक्तियों और क्षमताओं का भरपूर इस्तेमाल नहीं कर पातीं हैं जिसका फायदा हमारा पुरुष प्रधान समाज उठाता है और हमें कम और कमजोर सममmने की गलती कर बैठता है ।
यहाँ पर यह कहना आवश्यक है कि अभी भी कुद्द ऐसे अविकसित और अशिक्षित लोग हमारे समाज में हैं जो महिलाओं को सिर्फ भोग विलास की वस्तु मात्र सममmते हैं उन्हें उनकी प्रतिभाओं और क्षमताओं से कोई लेना देना नहीं हैं शराब पीना जो अक्सर एक फैशन के रूप में दशार्या जाया जाता है परन्तु वास्तविकता तो यह है कि नशे के प्रभाव में एक शिक्षित ,सुसंस्कृत व्यक्ति भी असभ्य व्यवहार करने लगता है और महिलाएँ कई प्रकार के हादसों के शिकार हो जातीं हैं विकसित देशों में भी महिलाओं के खिलाफ हिंसा की कई घटनाओं की जड़ शराब का सेवन है इन आसामाजिक तत्वों के कारण हमारा समाज दुष्कृत हो रहा है जिस कारण महिलाओं को स्वच्द्द और स्वतंत्र माहौल मिल नहीं पाता है। कार्यस्थल पर भी उन्हें कई तरह की यातनाओं का सामना करना पड़ता है
वैसे आज महिलाओं में पर्याप्त जागरुकता आ गई है भारतीय संविधान के १४वें और १५वें अनुच्द्देद में नारी और पुरुष को समानता का अधिकार प्रदान किया गया है तथा लिंग भेद का खंडन किया गया है सन १९९५ में हिन्दु कोड बिल के द्धारा बहुपत्नी प्रथा पर रोक लगा दी गई है। और अब २२ अगस्त १९१७ को उच्चतम न्यायालय द्धारा एक और एतिहासिक फैसला सुनाया गया जब मुस्लिम महिलाओं को तीन (३) तलाक से आजादी दे दी गई । अतः कागजी तौर पर तो महिलाओं को अनगिनत अधिकार प्रदान किए गए हैं परन्तु जब तक इन अधिकारों को हमारा पुरुष प्रधान समाज अपने सोच में शामिल नहीं करता तब तक इन अधिकारों का कोई मतलब नहीं । ऐसा नहीं है कि नेपाल के संविधान में महिलाओं को अधिकार नही्र दिए गए हैं पर वह देखा जाय तो सिर्फ कागजों तक ही सीमित है या कुछ खास वर्गों के लिए । कागज पर होना और कार्यान्वयन होना दो अलग बातें हैं । ३३ प्रतिशत का अधिकार दिया गया है पर अस्पष्ट सा क्योंकि देश की भौगालिक परिस्थितियों के अनुसार इसकी व्याख्या नहीं की गई है ।
उपर्युक्त तथ्यों से यह तो स्पष्ट है कि महिलाओं ने भले ही आर्थिक क्षेत्र से लेकर प्रत्येक क्षेत्रों में पर्दापण कर लिया हो परन्तु जब तक समाज के ठेकेदारों के वैचारिक दृष्टिकोण में परिवर्तन नहीं होगा तब तक स्त्रियों को बराबर का स्थान मिल पाना संभव नहीं है, और जहाँ तक मेरी अनुभूति कहती है इस स्थान को प्राप्त करने के लिए महिलाओं को स्वयं ही आगे बढना होगा और अंत में, मैं उन सभी लोगों से यह अपील करती हूँ कि महिलाओं को न सिर्फ सामाजिक स्तर पर बल्कि प्रत्येक क्षेत्रों में प्रोत्साहित कर सर्बोच्च स्थान दें, ताकि हमारा समाज और देश विकसित हो सके । और इतिहास इस बात का साक्षी है कि जहाँ समानता है वहाँ विकास निश्चित है।

मधु सिंह

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *