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मतपत्र संबंधी विवाद में सर्वोच्च द्वारा अन्तरिम आदेश अस्वीकार

 

काठमांडू, ३१ आश्वीन । मतपत्र संबंधी विवाद में सर्वोच्च अदालत ने अन्तरिम आदेश देने में अस्वीकार किया है । प्रतिनिधिसभा और प्रदेशसभा निर्वाचन के लिए अलग–अलग मतपत्र की मांग करते हुए राष्ट्रीय जनता पार्टी नेपाल के नेता सर्वेन्द्रनाथ शुक्ला ने सर्वोच्च में रिट निवेदन दिया था । रिट के ऊपर बुधबार फैसला करते हुए सर्वोच्च अदालत के न्यायाधीश दिपकराज जोशी और पुरुषोत्तम भण्डारी के संयुक्त इजलास ने यह निर्णय लिया है । सर्वोच्च अदालत द्वारा जारी निर्णय के पश्चात अब निर्धारित चुनावी तिथि स्थगित होने का आशंका खत्म हो गयी है ।
लेकिन सर्वोच्च ने संकेत किया है कि प्रदेश और प्रतिनिधिसभा निर्वाचन में अलग–अलग मतपत्र की व्यवस्था होना ठीक रहेगी । फैसला में कहा गया है– ‘निर्वाचन कार्यतालिका के अनुसार प्रथम होनेवाले व्यक्ति निर्वाचित होनेवाली प्रणाली के लिए आवश्यक मतपत्र मिति २०७४–०७–१० के बाद छप रहा है । अर्थात् मतपत्र छपना बांकी ही है । प्रतिनिधिसभा और प्रदेशसभा के लिए अलग–अलग ऐन है, जहां तक दोनों सभा–सदस्य के लिए एक ही मतपत्र प्रयोग के संबंध में जो निर्णय हो गई है, इस विषय को निर्वाचन आयोग गम्भीर रुप में ले सकता है, काम बांकी ही होने के कारण अन्तरिम आदेश देना आवश्यक नहीं है ।’

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