Sun. May 31st, 2020

मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल में मंचीय कविता और बाजारीकरण पर विस्तृत चर्चा- फोटो सहित

मेरठ लिटरेरी फेस्टिवल, मेरठ | कार्यक्रम का दूसरे दिन २५ नोभेम्बर को साहित्यिक चर्चा जिसका विषय था मंचीय कविता और बाजारीकरण हुई । नेपाल से पहुँची डा.श्वेता दीप्ति ने कहा कि भावनाएँ और अनुभूति हैं तो कविता है । कविता की सार्थकता तभी है जब प्रबुद्ध लोग और श्रोता उसे सराहे और जो स्थापित हैं उन्हें भी आगे बढने का अवसर दें । जयपुर के राजेन्द्र मोहन शर्मा ने कहा कि बाजार ने यह समझ लिया है कि वही बिकेगा जो मैं बेचुँगा । हिन्दी के सशक्तिकरण में साहित्य को नहीं हिन्दी को हिंग्लिश बनाने वाले सिनेमा के योगदान को सराहा जा रहा है । मुरादावाद से आए साहित्यकार डा.महीपचन्द्र दिवाकर ने कहा कि हिन्दी को विश्वपटल पर सकारात्मक दृष्टि से देखे जाने की आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि जब गंगा अपनी धार बदल सकती है तो भाषा क्यों नहीं हमें उसके बदलते स्वरुप के साथ स्वीकार करना चाहिए । झारखंड से आए दिनकर शर्मा ने मुक्तिबोध की कहानी पक्षी और दीमक को काफी भावपूर्ण एकल अभिनय द्वारा प्रस्तुत किया । साथ ही आइएमएम टी के विद्यार्थियों ने अपनी सांगितिक प्रस्तुति दी ।

यह भी पढें   कोरोना संक्रमितों की संख्या में तीव्र वृद्धि, एक ही दिन १५६ नयां संक्रमित, कूल संक्रमितों की संख्या १०४२

इसे भी पढें..

क्रांतिधरा मेरठ साहित्यिक महाकुंभ का भव्य आयोजन, नेपाल की सहभागिता …

कार्यक्रम के अंतिम दिन सभी साहित्यकारों को सम्मानित किया गया और कार्यक्रम की भावपूर्ण समाप्ति इस उम्मीद से की गई कि आगे भी ऐसे कार्यक्रमों को निरन्तरता मिलती रहेगी ।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: