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तहरीक ए तालिबान का पाकिस्तान पर एक अाैर अातंकवादी अाक्रमण

 
तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान में कई बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका है। शुक्रवार को‍ फिर उसने एक इंस्टिट्यूट को निशाना बनाया।

पाकिस्‍तान में शुक्रवार की शुरुआत मनहूसियत, मातम और चुनौती के साथ हुई है। इसकी वजह बनी पेशावार के एग्रीकल्‍चर ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट में हुई आतंकी घटना। शुक्रवार सुबह को हुए इस आतंकी हमले में तीन लोगों की मौत हो गई वहीं करीब 16 लोग घायल हो गए। इसकी जिम्‍मेदारी तहरीक ए तालिबान(Tehreek-i-Taliban Pakistan) पाकिस्‍तान ने ली है। टीटीपी पाकिस्तान में कई बड़े आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका है। इस आतंकी हमले में तीन छात्र एक फ्रंटियर कॉर्प्‍स का जवान, एक पुलिस अधिकारी, एक गार्ड और एक पत्रकार भी जख्‍मी हुआ है। आईएसपीआर (Inter-Services Public Relations) के मुताबिक दो जवानों को मिलिट्री अस्‍पताल शिफ्ट किया गया है। जानकारी के मुताबिक सेना ने इस हमले में शामिल तीन आतंकियों को मार गिराया है। हालांकि अपुष्‍ट खबरों में इनकी संख्‍या को चार भी बताया जा रहा है। घायलों को नजदीकी अस्‍पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि गनीमत यह भी रही कि आज वहां पर ईद ए मिलाद उल नबी के उपलक्ष्य में छुट्टी थी।

एक हफ्ते में पेशावर में दूसरा आतंकी हमला 

पाकिस्‍तान के अखबार के मुताबिक इंस्टिट्यूट में तेज धमाकों की करीब तीन बार आवाजें सुनी गई हैं। इसके साथ ही इंस्टिट्यूट में आग लगी हुई है। जानकारी के मुताबिक आतंकी इस हमले को अंजाम देने के लिए बुर्का पहनकर इंस्टिट्यूट में घुसे थे। यह सभी आतंकी रिक्‍शे से यहां तक आए थे। इसके बाद उन्‍होंने गेट पर खड़े गार्ड को गोली मारी और हास्‍टल की इमारत में दाखिल हो गए। बताया जा रहा है कि सुबह 8.15 बजे के आसपास गोलीबारी शुरू हुई थी, जब वे सो रहे थे। एक छात्र ने बताया कि वह और उसके दोस्त गोलीबारी की आवाज सुनकर भागने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उसके दो दोस्त फायरिंग में घायल हो गए। बीते एक हफ्ते में पेशावर में यह दूसरा आतंकी हमला है।

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पेशावर के सैनिक स्कूल में मचाया था कत्ले आम  

हम आपको बता दें कि ये आतंकी संगठन वही है जिसने 16 दिसंबर 2015 को पेशावर के सैनिक स्कूल पर हमला करके 126 बच्चों की हत्या कर दी। इस हमले को छह आतंकियों ने अंजाम दिया था। इस हमले से पूरी दुनिया सन्‍न रह गई थी। सभी देशों की तरफ से इस हमले की कड़ी निंदा की गई थी। पेशावर लगातार इस आतंकी संगठन के निशाने पर रहा है। इसी सप्‍ताह दो बार पेशावर में आतंकी हमले हो चुके हैं।

मलाला पर हमले में शामिल

इसी आतंकी संगठन ने नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित मलाला यूसुफजई पर वर्ष 2012 जानलेवा हमला किया था। इसके अलावा 2010 में न्यूयॉर्क के टाइम स्कॉयर पर हुए बम धमाके की जिम्मेदारी भी तहरीके तालिबान ने ली थी। यही वजह है कि अमेरिका पाकिस्तान में तालिबान के ठिकानों पर ड्रोन जहाज के जरिए लगातार बमबारी करता रहा है। 9/11 हमलों के बाद अमेरिकी सेना ने जब अल कायदा के खि‍लाफ कार्रवाई के लिए Operation Enduring Freedom चलाया तो अफगानिस्तान से भागकर कई आतंकी पाकिस्तान के कबायली इलाकों में छुप गए थे। इन आतंकियों के खिलाफ जब पाकिस्तानी सेना ने कार्रवाई शुरू की तो स्वात घाटी में पाकिस्तानी सेना का ही विरोध होने लगा।

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टीटीपी के करीब 35,000 सदस्य

पाकिस्तानी फौज की इस कार्रवाई से भड़के कबीलाई संगठनों ने बाद में तहरीक-ए-तालिबान का गठन कर लिया और पाकिस्तानी फौज के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। टीटीपी में आज करीब 35,000 सदस्य हैं। ये वही तालिबान है जो कभी पाकिस्तान के हाथों की कठपुतली हुआ करता था। आज उसी तालिबान को लेकर पाकिस्तान खौफ में जी रहा है।

कट्टरपंथी इस्लामी अमीरात को कायम करना है मकसद

तहरीक-ए-तालिबान टीटीपी पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा के पास स्थित संघ-शासित जनजातीय क्षेत्र से उभरने वाले चरमपंथी उग्रवादी गुटों का एक संगठन है। इनका ध्येय पाकिस्तान में शरिया पर आधारित एक कट्टरपंथी इस्लामी अमीरात को कायम करना है। इस आतंकी संगइन का गठन दिसंबर 2007 को बेयतुल्लाह महसूद​ के नेतृत्व में किया गया था। इसमें करीब 13 गुट शामिल थे। इस संगठन ने जनवरी 2013 में घोषणा की थी कि वे भारत में भी शरिया-आधारित अमीरात चाहते हैं और वहां से लोकतंत्र और धर्म-निरपेक्षता खत्‍म करने के लिए लड़ते रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे कश्मीर में सक्रीय होने के प्रयास कर रहे हैं।

FATA में फैला है टीटीपी 

पाकिस्तानी तालिबान का दायरा पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर संघ-शासित कबायली क्षेत्र (FATA) में फैला है। यह गुट अफगानिस्तान के तालिबान से अलग है। हालांकि, इनकी गतिविधि‍यों को अफगानिस्तान के तालिबान और अल कायदा का समर्थन हासिल है। FATA की सभी सात कबायली जिलों और खैबर पख्तून के कई जिलों में इसके सदस्य हैं। इसका मुख्यालय उत्तरी वजीरिस्तान में है। इसका नेटवर्क पाकिस्तान के चारों प्रांतों में है।पाकिस्तान में सबसे ज्यादा आतंकी हमले यही संगठन करता है। पाकिस्तान में आत्मघाती बम विस्फोट की करीब तीन-चौथाई घटनाओं में इसका ही हाथ रहा है।

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खात्‍मे के लिए चलाया ऑपरेशन 

पाकिस्‍तान सरकार की तरफ से इस आतंकी संगठन के खात्‍मे के लिए ऑपरेशन भी चलाया गया था। इसमें पाकिस्तान के 4000 से ज्यादा सैनिक मारे भी गए जबकि हजारों जख्मी हुए। हालांकि इस ऑपरेशन के बाद इस आतंकी संगठन की कमर काफी हद तक टूट भी गई है। लेकिन इसके बाद भी यह संगठन लगातार बड़े आतंकी हमलों को अंजाम देने की कोशिशों में लगा हुआ है।

लगाया गया प्रतिबंध 

पाकिस्तान की तरफ से टीटीपी पर 25 अगस्त 2008 को प्रतिबंध लगाया गया था। प्रतिबंध लगने के बाद सात अन्‍य आतंकी संगठन भी टीटीपी का हिस्सा बन गए। अमेरिका ने 1 सितंबर 2010 को इस संगठन को खतरनाक आतंकी गुटों की सूची में शामिल किया था। ब्रिटेन ने 18 जनवरी 2011 को इसे प्रतिबिंधत संगठनों की सूची में डाला। वहीं कनाडा ने 5 जुलाई 2011 को काली सूची में डाला था।


साभार दैनिक जागरण से

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