Sat. Apr 18th, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

दाे दिनाें मनाया जाएगा महाशिवरात्रि पर्व

 

देवाधिदेव महादेव को प्रसन्न करने के लिए किए जाने वाले व्रतों में महाशिवरात्रि सर्वोपरि है। इसे  दुनियाभर के सनातनी उपवास समेत रात्रि जागरण कर मनाते हैं। यह महा पर्व फाल्गुन चतुर्दशी को मनाया जाता है।

इस बार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 13 फरवरी को रात 10.22 बजे लग रही है, जो 14-15 की मध्य रात्रि 12.17 बजे तक रहेगी। फाल्गुन चतुर्दशी तिथि इस बार 13 व 14 दोनों दिन मध्य रात्रि में मिल रही है। ऐसे में महाशिवरात्रि दोनों दिन यानी 13 व 14 फरवरी को मनाई जाएगी।

काशी विद्वत परिषद के संगठन मंत्री ख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार, जो लोग 13 को व्रत रहेंगे, वे 14 को पारन करेंगे। वहीं 14 को महाशिवरात्रि व्रत रखने वाले रात में ही पारन कर लेंगे। वैष्णव मतावलंबी उदया तिथि के इस पर्व को मनाते हैं, ऐसे में उनकी महाशिवरात्रि 14 को होगी।

यह भी पढें   नए साल में नई उम्मीद: जनमत के सहारे बनी सरकार से सुशासन और बदलाव की बड़ी अपेक्षाएँ

अलग-अलग पक्ष : महाशिवरात्रि में तिथि निर्णय के लिए तीन पक्ष लिए जाते हैं। पहला चतुर्दशी प्रदोष व्यापिनी, दूसरा निशिथ व्यापिनी और तीसरा उभय व्यापिनी। पं. द्विवेदी के अनुसार, धर्म सिंधु ने मुख्य पक्ष निशिथ व्यापिनी ग्रहणीय बताया है, लेकिन दोनों दिन प्रदोष व्यापिनी मिलें या दोनों ही दिन न मिलें तब प्रदोष व्याप्ति वाली परा ग्रहण करते हैं। इस तरह इनके मत में परा ग्रहण करने में प्रदोष व्यापिनी में तो निशिथ है ही, अव्यक्ति में प्रदोष व्यापिनी ले रहे हैं। इससे व्यक्त होता है कि निशिथ व्यापिनी मुख्य व प्रदोष व्यापिनी गौण है।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 15 अप्रैल 2026 बुधवार शुभसंवत् 2083

पद्म पुराण के अनुसार अर्द्धरात्रि से पहले चतुर्दशी का योग हो तो शिवरात्रि पूर्व विद्धा ही लेनी चाहिए। स्कंद पुराण में कहा गया है कि बड़े से बड़े पापों को निष्कृत पूर्व विद्धा है, लेकिन अमावस्या युक्ता शिवरात्रि वर्जित है और अमावस्या के योग की निंदा की गई है। महाशिवरात्रि व्रत विवरण में लिंग पुराण में उल्लेख है कि -‘प्रदोष व्यापिनी ग्राह्या शिवरात्रि चतुर्दशी। रात्रि जागरण यस्मात्‌ तस्मात्तां समूपोपयेत॥’ अर्थात शिवरात्रि की चतुर्दशी प्रदोष व्यापिनी लेनी चाहिए। देखा जाए तो धर्म सिंधु, पद्म पुराण, स्कंद पुराण में निशिथ व्यापिनी को महत्व दिया गया है तो लिंग पुराण के अनुसार प्रदोष व्यापिनी चतुर्दशी की महत्ता बताई गई है। ऐसे में दोनों का अपना निर्णय मान्य है।

यह भी पढें   आज का पंचांग: आज दिनांक 14 अप्रैल 2026 मंगलवार शुभसंवत् 2083

पूजन विधान : मान्यता है कि भगवान शंकर का विवाह माता पार्वती के साथ इस दिन ही हुआ था। इस दिन प्रयाग व काशी में गंगा स्नान का विशेष महत्व होता है। जो व्यक्ति निराहार रहकर रात्रि के चारों प्रहर शिव पूजन करता है, उससे भगवान शंकर अति प्रसन्न होते हैं। कहा गया है कि महाशिवरात्रि के समान कोई पापनाशक व्रत नहीं है। इस व्रत को करके मनुष्य सभी पापों से छूटकर अनंत फल प्राप्त करता है। इस दिन शिवलिंग का विधि-विधान से अभिषेक व पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन करना चाहिए।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *