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एमाले को सरकार में शामील की जाएगी तो राजपा प्रतिपक्ष में रहेगीः डा. सुरेन्द्र कुमार झा

 

सभी (७) प्रदेशों में प्रदेश सरकार निर्माण हो चुका है । केन्द्र में भी नयां जनादेश के अनुसार बाम गठबबंधन की नेतृत्व में नयां सरकार बन चुका है । केन्द्र तथा प्रदेश दोनों जगह मन्त्रिरिषद् बिस्तार का काम हो रहा है । कूल ७ प्रदेशों में से ६ प्रदेश में बाम गठबन्धन की नेतृत्व में की सरकार है और प्रदेश नं. २ में मधेशवादी गठबंधन की । लेकिन पूर्ण सरकार निर्माण होने से पहले ही प्रदेश नं. २ में सरकार बनानेवाले संघीय समाजवादी फोरम नेपाल और राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) नेपाल की गठबंधन संकट में पड़ने लगा है । समाचार आ रहा है कि संघीय समाजवादी फोरम बाम गठबंधन में निर्मित केन्द्रीय सरकार में शामील होने की तैयारी में है । जिसके चलते संघीय समाजवादी और राजपा के बीच विश्वास का संकट दिखाई देता है । ऐसी ही पृष्ठभूमि में राजपा नेपाल के युवा नेता तथा सह–महामन्त्री डा. सुरेन्द्र कुमार झा के साथ हिमालिनी डटकम के लिए लिलानाथ गौतम ने बातचीत की है । प्रस्तुत हैं मधेश आन्दोलन के योद्धा और विश्लेषक डा. झा के साथ की गई बातचीत का संपादित अंश–


० नवनिर्वाचित प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली मन्त्रिपरिषद् बिस्तार कर रहे हैं । कहा जाता है कि अगली बार संघीय समाजवादी फोरम नेपाल को भी शामील कर वह मन्त्रिपरिषद् बिस्तार करने की तैयारी में हैं । संघीय समाजवादी फोरम और राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) नेपाल के बीच भी गठबंधन है, और इसी गठबंधन ने प्रदेश नं. २ में सरकार बनाया है । लेकिन संघीय समाजवादी फोरम के संबंध में सार्वजनिक समाचार के कारण अनेक आशंका व्याप्त है । वास्तविकता क्या है ?
– हाँ, सार्वजनिक सञ्चार माध्यमों से सुन रहे हैं कि संघीय समाजवादी फोरम केन्द्रीय सरकार में शामील हो रही है । लेकिन इसके संबंध में संघीय समाजवादी फोरम ने अभी तक औपचारिक रुप में राजपा को कुछ भी नहीं कहा है । संघीय समाजवादी फोरम और राजपा ऐसी शक्ति है, जो प्रदेश नं. २ में संयुक्त गठबन्धन निर्माण कर चुनाव में शामील हुआ था । चुनाव में संयुक्त रुप में सहभागी होते वक्त हम लोगों ने आम जनता को कहा था– ‘मधेश आन्दोलन के कारण ही देश में संघीयता आई है, सिर्फ ८ जिलों का ही सही, ‘मधेश प्रदेश’ प्राप्त हुआ है । इसीलिए यहां मधेश सरकार बनाने के लिए मधेशवादी गठबंधन को बहुमत चाहिए ।’ जनता ने हमारी बात सुन ली, प्रदेश नं. २ में मधेशवादी गठबंधन को ही बहुमत मिल गई । जनता की म्यान्डेट अनुसार ही यहां सरकार भी बन गया है । जहां तक केन्द्रीय सरकार में शामील होने की बात है, मुझे लगता है कि यह तो जनमत विपरित हैं । जनता ने स्पष्ट रुप में मधेशवादी गठबंधन को प्रतिपक्ष में रहने के लिए कहा है ।
० प्रदेश नं. २ में मधेशवादी गठबंधन ने सरकार तो बनाया है, लेकिन अभी तक सरकार पूर्ण नहीं है, क्यों ?
– सरकार बिस्तार होना चाहिए, लेकिन इसमें देरी हो रही है । मुख्यमन्त्री संघीय समाजवादी फोरम नेपाल से लालबाबु राउत हैं । सरकार बिस्तार के लिए मुख्यमन्त्री से ही पहल होना जरुरी है । अर्थात् सरकार बिस्तार के लिए संघीय समाजवादी फोरम को ही सक्रिय होना पड़ेगा । सरकार बिस्तार के लिए अगर मुख्यमन्त्री, मन्त्रियों की नाम मांग करते हैं तो हम लोग देने के लिए तैयार ही हैं । मेरी खयाल में संघीय समाजवादी फोरम की ओर से ही देरी हो रही है ।
० राजपा तो विभिन्न ६ पार्टी मिल कर निर्मित पार्टी है, जहां ६ अध्यक्ष भी हैं । कहा जाता है कि ६ पार्टी तो एक हो गई लेकिन ६ मनस्थिति नहीं, जिसके चलते मन्त्री छनौट में राजपा के भीतर भी विवाद है । क्या यह सच है ?
– इस विषय में राजपा के भीतर कोई भी विवाद नहीं है । किस को सरकार में ले जाना है, इसमें राजपा स्पष्ट है । मधेश आन्दोलन की भावना को सम्बोधन करते हुए मधेश आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता, अनुभवी और सक्षम व्यक्तित्व को ही मन्त्री बनाना चाहिए, इस में हम लोग स्पष्ट हैं । मुख्यमन्त्री की ओर से नाम मांक्ष् होने के तुरुन्त राजपा नाम दे सकती है ।
० राजपा केन्द्रीय सरकार में शामील होने की सम्भावना है कि नहीं ?
– राजपा को केन्द्रीय सरकार में शामील होने का म्यान्डेट जनता ने नहीं दिया है । जनमत के अनुसार राजपा को प्रतिपक्ष में ही रहना चाहिए । इस वक्त हम लोग गम्भीर राजनीतिक परिस्थित से गुजर रहे हैं, जहाँ परिवर्तनकारी मुद्दा और आज तक प्राप्त उपलब्धी को संरक्षण करना है और उसकी जिम्मेदारी हमारी कंधे पर है । क्योंकि इस देश में संघीयता मधेशी जनता द्वारा की गई आन्दोलन के कारण ही सम्भव हुआ है ।
० राजपा के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़नेवाला संघीय समाजवादी फोरम तो शामील हो रहा है, क्या कहते हैं ?
– इसके संबंध में संघीय समाजवादी फोरम के अध्यक्ष उपेन्द्र यादव और राजपा के शीर्ष नेताओं के बीच विचार–विमर्श हुई थी । अध्यक्ष उपेन्द्र यादव ने कहा है– ‘मीडिया में जिस तरह समाचार आ रहा है, वैसा नहीं है, हम लोग सरकार में शामील नहीं होंगे । लेकिन संघीय समाजवादी फोरम के ही सह–अध्यक्ष तथा अन्य नेताओं ने कहा है कि फोरम नेपाल सरकार में शामील होने की तैयारी में हैं, यह तय हो चुका है ।’ इस तरह का विरोधाष बातें तो आ रही है, लेकिन अभी तक संघीय समाजवादी फोरम की ओर से आधिकारिक विज्ञप्ति नहीं आया है ।
० कुछ लोगों का कहना है कि प्रदेश नं. २ में नेकपा एमाले को भी सरकार में शामील किया जा रहा है, क्या यह सच है ?
– हां, मैं भी इस तरह की बातें सुन रहा हूं । अगर सच में ही प्रदेश नं. २ में बाम गठबंधन को सरकार में शामील की जाएगी तो, वह मधेशी जनमत कें विपरित होगा । केन्द्र में बाम गठबंधन के साथ शामील होना और प्रदेश नं. २ में भी बाम गठबंधन को सरकार मेें ले आना, यह दोनों जनमत के विपरित है । अगर अनपेक्षित रुप में ऐसी घटना होगी तो राजपा नेपाल प्रदेश नं. २ में भी प्रतिपक्ष में रहने के लिए बाध्य हो जाएगी । संघीय समाजवादी फोरम को दी गई समर्थन वापस किया जाएगा । हां, प्रदेश नं. २ में मधेशवादी गठबंधन को जनता ने म्यान्डेट दिया है, बाम गठबंधन को नहीं । सिर्फ सरकार बनाने के लिए ही नहीं, मधेशवादी गठबन्धन को कायम रखकर संविधान संशोधन करने के लिए भी मधेशी जनता ने म्याण्डेट दिया है ।

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० प्रदेश नं. २ में बाम गठबंधन को सरकार में शामील होने से क्या फरक पड़ता है ?
– मधेश में रहनेवाले जनता जानती है कि एमाले संविधान संशोधन विरोधी शक्ति है । आज तक जितनी बार संविधान संशोधन के लिए पहल की गई, उतनी ही बार एमाले ने अवरोध किया । मेरे खयाल में जब तक मधेशवादी गठबंधन कायम रहेगा, तब तक ही हम लोग संविधान संशोधन के लिए दबाव दे सकते हैं । इसीलिए हमारी मांग संबोधन न होने तक बाम गठबंधन में शामील होना, जनता को धोखा देना है । हमारी ओर से ऐसी धोका हो ही नहीं सकती । अगर कोई गठबंधन को धोखा देकर बाम गठबंधन में शामील होते हैं तो राजपा नेपाल प्रतिपक्ष में ही रहकर अपनी भूमिका निर्वाह करगी ।
हां, केन्द्र में बाम गठबन्धन की नेतृत्व में सरकार बनी है । यह तो स्थायी सत्ता भी है, जिसके विरुद्ध मधेशी जनता ने तीन–तीन बार मधेश आन्दोलन किया । केपीशर्मा ओली वही हैं, जो गणतन्त्र के लिए की गई आन्दोलन को अनदेखा कर कहते थे कि ‘बैल–गाड़ा’ में बैठकर अमेरिका नहीं पहुँच सकते हैं । पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड वही है, जो मधेश आन्दोलन को नेपाली सेना और वाईसीएल परिचालित कर खत्म करना चाहते थे । आज हमारे सामने जो संविधान है, वह भी ऐसे ही संघीयता विरोधी शक्ति द्वारा निर्मित संविधान है । और कार्यान्वयन के जिम्मेदारी में आज उन को ही मिल रही है । ऐसी अवस्था में अपने प्रभुत्व कायम रखने के लिए वे लोग मधेशवादी गठबन्धन ध्वंस्त बनाना चाहते हैं । लेकिन इसमें हम लोगों को ही सचेत रहना चाहिए ।
० कहा जाता है कि संविधान संशोधन की शर्त मे ही फोरम नेपाल सरकार में शामील हो रही है । अगर संविधान संशोधन किया जाता है तो क्या फरक पड़ेगा ?
– हां, सुनने में तो ऐसा ही आ रहा है । कहा जाता है कि कि सरकार मं शामील होने के लिए संघीय समाजवादी फोरम नेपाल चार शर्तों को आगे बढ़ाया है । उसमें से एक शर्त है– संविधान संशोधन । लेकिन संविधान संशोधन किस तरह किया जाएगा, उसके बारे में कुछ भी नहीं आया है । सार्वजनिक समाचारों के अनुसार उपेन्द्र यादव मधेश आन्दोलन के दौरान की गई २२ सूत्रीय सम्झौता कार्यान्वयन पर जोर दे रहे हैं । लेकिन उक्त २२ सूत्रीय सम्झौता कुछ भी नहीं है । हां, उक्त सम्झौता प्रथम मधेश विद्रोह के लिए साक्षी हो सकता है । मैं मानता हूं कि तत्कालीन राज्यपक्ष और विद्रोही पक्षों की बीच की गई उक्त २२ सूत्रीय सम्झौता ने मधेश आन्दोलन अनुमोदन किया है । लेकिन उक्त २२ सूत्रीय सम्झौता मधेशी जनभावना को प्रतिनिधित्व नहीं करती । हमे नहीं भूलना चाहिए कि तत्कालीन राज्य के साथ की गई उक्त २२ बुँदे सम्झौता के कारण ही उपेन्द्र यादव को ‘मधेश का गद्दार’ घोषणा की गई थी और पार्टी विभाजित हुई थी । उसके बाद भी मधेश आन्दोलन जारी रहा । इसीलिए राजनीतिक हिसाब से २२ सूत्रीय सम्झौता में ऐसा कोई भी महत्वपूर्ण चीज नहीं है, जहां मधेशी, जनजाति अथवा पीछड़ी हुई क्षेत्रों के लिए प्राप्त अधिकार के संबंध में उसमें लिखा हो । २२ सूत्रीय सम्झौता के बदले ८ सूत्रीय सम्झौता राजनीतिक दृष्टिकोण से परिस्कृत और मुद्दा के दृष्टिकोण से स्पष्ट है, जो तत्कालीन मधेशी मोर्चा तथा अन्तरिम सरकार के प्रधानमन्त्री तथा राष्ट्र प्रमुख गिरिजाप्रसाद कोइराला के बीच हुई थी । उक्त सम्झौता माधवकुमार नेपाल, पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड के रोहबर और पड़ोसी मुल्क भारत के मध्यस्तता में हुई थी । लेकिन उक्त सम्झौता के संबंध में आज उपेन्द्र जी ने कुछ भी उल्लेख नहीं किया है । मेरे खयाल से २२ सूत्रीय सम्झौता के बदले ८ सूत्रीय सम्झौता की वैधानिक है । केपीशर्मा ओली के साथ बात करते वक्त उक्त ८ सूत्रीय सम्झौता को आगे बढ़ाना चाहिए था । लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया ।

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० आप की खयाल में अब किस तरह संविधान संशोधन होना चाहिए ?
– मेची से लेकर महाकाली तक जिस भू–भाग को तराई कहा जाता था, उसी भू–भाग को हम लोग तराई–मधेश भी कहते हैं । हमारी मान्यता है कि उक्त सम्पूर्ण भू–भाग में दो प्रदेश होना चाहिए । इसीलिए संविधान संशोधन करते वक्त उस में सीमांकन परिवर्तन संबंधी प्रावधान भी होना चाहिए । इसीतरह स्थानीय निकायों को प्रदेश मातहत लाना चाहिए, नागरिकता के संबंध में अन्तरिम संविधान में जो प्रावधान है, उसी को कायम रखना चाहिए । इन्ही आधारभूत विषयों को लेकर हमारी संघर्ष जारी रहेगा ।
० आपने जिस तरह कहा है, उसी तरह संविधान करने की प्रतिबद्धता की जाएगी तो राजपा सरकार में शामील हो सकती है ?
– पहली बात, हमारी प्राथमिकता सरकार नहीं है । वि.सं. २०६३–०६४ के बाद कई बार ३ सूत्रीय और ४ सूत्रीय सम्झौता करा कर हम लोगों को सरकार में शामील किया गया । लेकिन सम्झौता कार्यान्वयन नहीं की गई । आज फिर एक और सम्झौता कर सरकार में शामील होना, मन्त्री बनना और पैसा कमाना, यह सब राजपा से होनेवाला नहीं है । हां, मधेश आन्दोलन, जनजाति आन्दोलन, थरुहट आन्दोलन की भावना अनुसार संविधान संशोधन की जाएगी तो, उसके बाद सोंच सकते हैं ।
० वाम गठबन्धन की ओर से राजपा को सरकार में सहभागिता के लिए कोई अनेरोध आया है या नहीं ?
– केन्द्रीय सरकार में सहभागिता को लेकर अभी तक बाम गठबन्धन की ओर से राजपा को कोई भी औपचारिक अथवा अनौपचारिक प्रस्ताव नहीं आया है ।

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