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जंग-ए-आजादी के दो पहलू : रामेश्वर प्रसाद सिंह (रमेश)

 
रामेश्वर प्रसाद सिंह (रमेश), गोलबजार-13, सिरहा (मधेश) | लोग अक्सर पुछते रहते हैं कि क्या केबल शान्तिपूर्ण आन्दोलन से आजादी संभव हैं ? अगर हैं तो भारत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान गाँधी से ज्यादा प्रभावकारी भगत सिंह क्यों थे ? अंग्रेजो के लिए गाँधी से ज्यादा शर-दर्द भगत सिंह क्यों थे ? आप लोंग भी भगत सिंह के तरह क्यों नहीं संघर्ष करते हैं ? आदि इत्यादि…सब से पहली बात हैं कि हम लोंग न केबल भगत सिंह के तरह ही अपितु गाँधी और मंडेला की तरह भी संघर्ष कर रहें हैं ? और फिर भगत सिंह के दो पहलू थे । आप लोंग भगत सिंह को किस पहलू के वजह से जानते हैं ?

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दरअसल दिल्ली एसेमब्लि में बम फेंक कर गिरफ्तारी देने से पहले भगत सिंह को कोई नहीं जानता था | स्वेच्छ गिरफ्तारी देकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे गैर-जिम्मेदार नौजवान नहीं थे | कोर्ट केस के  दौरान उनका स्टेटमेन्ट्स दर्ज हुए जिसे मिडिया को न चाहते हुए भी छापना पड़ता था और उनका विचार लोगों में आग की तरह फैलने लगा और देखते ही देखते क्रांति की वह मशाल जलने लगा औरअंग्रेजो का निंद गूल हो गई | यह काम शान्तिपूर्ण रुप से ही संभव हुआ था |

अब सबाल यहां खड़ा होता हैं कि क्या भगत सिंह नकाब के पिछे छुपते हुए सशस्त्र मार्ग से इतना क्रांति फैलाने में सक्षम होते ? क्या उनके स्वराज का विचार आग के तरह फैलते हुए भारतवासियों को जंग-ए-आजादी में कूद पड़ने के लिए प्रोत्साहित कर पाता ? बिलकुल नहीं |

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जेल जीवन के दौरान उन्होंने विचार की क्रांति के मार्ग अपनाया | फिरंगी सरकार के गढ़ मे खड़ा रह कर अपने लोगों का विश्वास जिता क्यों की मिडिया को मजबुरन उनके विचारों को छापना पड़ता था | उनका मानना था की औपनीवेशिक शासन के तले जीने वालें लोग किसी संगठन से ज्यादा अखबारों की खबर पर ज्यादा विश्वास रखते हैं | और गिरफ्तारी दिए बिना यह संभव नहीं | स्वेच्छ गिरफ्तारी का महता यहाँ से भी जानी जा सकती हैं | उनका यह भी मानना था की आजादी कैद-खाना से ही जन्म लेते हैं |
इसिलिए हम लोंग भगत सिंह के उस पहलू के हिसाब से चलते हैं जो की क्रांति फैलाने में सक्षम हुआ | अगर इतिहास पढने की फूर्सत नहीं हो तो भगत सिंह फिल्म ही देख लिजिए और फिर बिचार किजिए की हम लोंग जो आन्दोलन करते हैं वह गिरफ्तारी के बाद का भगत सिंह के आन्दोलन से मिलता हैं या नहीं | और फिर उन्हों ने ही कहा हैं:-जन संघर्ष के लिए अहिंसा आवश्यक हैं |
For mass struggles, non-violence is essential.

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