जंग-ए-आजादी के दो पहलू : रामेश्वर प्रसाद सिंह (रमेश)
दरअसल दिल्ली एसेमब्लि में बम फेंक कर गिरफ्तारी देने से पहले भगत सिंह को कोई नहीं जानता था | स्वेच्छ गिरफ्तारी देकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे गैर-जिम्मेदार नौजवान नहीं थे | कोर्ट केस के दौरान उनका स्टेटमेन्ट्स दर्ज हुए जिसे मिडिया को न चाहते हुए भी छापना पड़ता था और उनका विचार लोगों में आग की तरह फैलने लगा और देखते ही देखते क्रांति की वह मशाल जलने लगा औरअंग्रेजो का निंद गूल हो गई | यह काम शान्तिपूर्ण रुप से ही संभव हुआ था |
अब सबाल यहां खड़ा होता हैं कि क्या भगत सिंह नकाब के पिछे छुपते हुए सशस्त्र मार्ग से इतना क्रांति फैलाने में सक्षम होते ? क्या उनके स्वराज का विचार आग के तरह फैलते हुए भारतवासियों को जंग-ए-आजादी में कूद पड़ने के लिए प्रोत्साहित कर पाता ? बिलकुल नहीं |
For mass struggles, non-violence is essential.


