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लूनकरणदास गंगादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर द्वारा स्रष्टा सम्मान एवं काव्य पुस्तक ‘चाहतों के साए में’ का लोकार्पण (फोटो फीचर सहित )

 

 

दिनांक १० मई , काठमांडू | श्री लूनकरणदास गंगादेवी चौधरी साहित्यकला मन्दिर ने अपना वार्षिकोत्सव एवं २४ वाँ स्रष्टा सम्मान कार्यक्रम एक भव्य समारोह के साथ आयोजित किया । कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष माननीय बसन्त चौधरी जी ने की । समारोह के मुख्य अतिथि नेपाली साहित्य के जाने माने स्रष्टा कालीप्रसाद रिजाल थे तथा मुख्य अतिथि के पद पर मेरठ (भारत) से पधारे साहित्यकार एवं पर्यावरण संरक्षक डा.विजय पण्डित जी की गरिमामयी उपस्थिति थी । स्रष्टा सम्मान के साथ ही उक्त कार्यक्रम में साहित्यकार एवं कवि श्री बसन्त चौधरी द्वारा रचित कृति “चाहतों के साए में” का लोकार्पण किया गया जिसकी समीक्षा हिन्दी केन्द्रीय विभाग की पूर्व अध्यक्ष एवं हिमालिनी की सम्पादक डॉ.श्वेता दीप्ति ने की । आज के इस कार्यक्रम में सम्मानित होने वाले स्रष्टाओं के नाम इस प्रकार हैं—श्री भागीरथी श्रेष्ठ(गंगादेवी चौधरी स्मृति सम्मान), श्र िशशिकला तिवारी(अरनिको ललितकला सम्मान), कवि श्र िदुर्गालाल श्रेष्ठ(सरस्वती सम्मान), श्री शुभबहादुर सुनाम(नारायणगोपाल संगीत सम्मान),प्रा.डा.प्रेमकुमार खत्री(इतिहास शिरामणि बा.आ.शोध सम्मान),श्री मिथिला शर्मा बोहरा(बालकृष्ण सम रंग सम्मान), श्री फूलमान बल(नेपाल नवप्रतिभा सम्मान) ।

सम्मानित प्रा.डा. प्रेमकुमार खत्री ने अपने मंतव्य में कहा कि आज की पीढ़ी को अपनी संस्कृति और भाषा परम्परा के विकास पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि ये अपनी संस्कृति से विमुख होते जा रहे हैं जिसकी वजह से आज मानविकी विभाग के कई विभाग बन्द होने की अवस्था में हैं । प्रमुख अतिथि श्री कालीप्रसाद रिजाल ने सभी सम्मानित स्रष्टाओं को बधाई दी और आगे भी उनसे साहित्य विकास में योगदान की अपेक्षा की । भारत से पधारे विशेष अतिथि डा.विजय पण्डित जी ने कहा कि आज देश की प्राकृति संपदा की सुरक्षा हमारी आवश्यकता है और इसमें भारत और नेपाल को मिलकर आगे आने की जरुरत है । प्रकृति का स्ररक्षण हमारा नैतिक दायित्व है जिसे हमें मिलकर निभाना चाहिए । काव्य संग्रह ‘चाहतों के साए में’ की समीक्षा के क्रम में डा. श्वेता दीप्ति ने कहा कि कवि हृदय बसन्त चौधरी के व्यक्तित्व का आइना उनका काव्य है जहाँ वो एक मासूम दिल के साथ अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं । कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री बसन्त चौधरी ने अपने मंतव्य में सभी स्रष्टाओं का अभिनन्दन किया तथा अगले वर्ष से दो अन्य सम्मान भी देने की घोषणा की । उन्होंने कहा कि उनके साठवें दशक में उनकी रचित ‘वसंत’ और ‘चाहतों के साए में’ काफी महत्तव रखता है । कार्यक्रम में प्रज्ञा प्रतिष्ठान के कुलपति माननीय गंगाप्रसाद उप्रेती, साहित्यकला मंदिर की कोषाध्यक्ष श्री मेघा चौधरी, निर्देशक श्री पारस शाक्य और नेपाली साहित्य जगत की जानी मानी हस्तियों की सादर उपस्थिति थी ।

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