सत्ता और भत्ता के लिए किया गया ‘मधेश आन्दोलन’ का औचित्य नहीं हैः यादव
नेपाल संघीय समाजवादी निकट बुद्धिजिवियों की भेला वीरगंज में सम्पन्न
वीरगंज, ३ जून । नेपाल संघीय समाजवादी पार्टी के उपाध्यक्ष राजकुमार यादव ने कहा है कि अब सत्ता और भत्ता के लिए राजनीति करनेवालों की दिन नहीं है । उनका मानना है कि सत्ता और भत्ता के लिए केन्द्रित रह कर विगत दिन में जो मधेश आन्दोलन हुआ है, उसका अब कोई भी औचित्य नहीं है । पार्टी निकट बुद्धिजिवी द्वारा वीरगंज में शनिबार आयोजित भेला को सम्बोधन करते हुए उन्होंने यह बात कहा है ।
कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए उपाध्यक्ष यादव ने कहा– ‘२०६३–०६४ साल में मधेश जनविद्रोह हो गया, उसके बाद सरकार और फोरम के बीच २२ सूत्रीय सम्झौता की गई और २०७२–०७३ में भी विभिन्न सहमति और सम्झौता की गई, जिस को अनदेखा कर आज फोरम नेपाल सत्ता मे गया है । इससे स्पष्ट होता है कि मधेश आन्दोलन केवल सत्ता और भत्ता के लिए था ।’ उनका मानना है कि खून–खरबा से मधेश की मांग भी पूरा होनेवाला नहीं है । कार्यक्रम में पार्टी केन्द्रीय सदस्य एवं कालिकामाई गांवपालिका के अध्यक्ष नथुनी प्रसाद कुशवाहा, पोखरीया नगरपालिका के प्रमुख दीपनारायण रौनियार, केन्द्रीय सदस्य कविता चौधरी, विनादेवी बठा ने भी अपनी–अपनी ओर से मंतव्य व्यक्त किया ।
बुद्धिजीवी भेला ने योगेन्द्र चौरसिया के संयोजकत्व में २२ सदस्यीय बुद्धिजीवी तदर्थ जिला कमिटी गठन किया है । कमिटी के उपाध्यक्ष में सरिता चौधरी, सचिव में सन्दिप चौरसिया है । सदस्य में रामप्रवेश साह, सोनालाल ठाकुर, राजकुमार साह, अमिरीलाल यादव, अब्दुल मिया, दिपेन्द्र चौधरी, रामचन्द्र राउत कुर्मी, राधा बैठा, वीरेन्द्र साह आदि हैं । नेपाल संघीय समाजवादी पार्टी के पर्सा जिला अध्यक्ष हरेन्द्र साह कानु के सभापतित्व में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ था ।

