हम पर कृपा बरसाना गुरूवर : संगीता ठाकुर
हम पर कृपा बरसाना गुरूवर
अगर न होते गुरूवर मेरे तो
हम कहाँ चलपाते जग में
अगर चलना हम सिख भी जाते
पर हँसना कहाँ सिख पाते जग में ।
पग– पग पर मार्गदर्शन उनका
अनुशासीत करता है हमको
कभी गुस्सा कभी हँसना उनका
पथ प्रदर्शन करता हमको ।
उल्झे शब्दों को सुलझाकर
ज्ञान दर्पण दिखाते हमको
जीवन का रहस्य बताकर
मुस्काना हमें सिखाते गुरूवर ।
कभी नर कभी नारी बनकर
ज्ञान का पाठ पढ़ाते हमको
हम अनगिनत गलती भी कर ले
पर हमें क्षमा कर देते गुरूवर ।
सत्यम–शिवम सब रूप है गुरूवर
लक्ष्मी –दुर्गा सरस्वती सब है
हम मानव अज्ञानी गुरूवर
हम पर कृपा बरसाना गुरूवर
हम पर कृपा बरसाना गुरूवर ।।



