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बरसात में निमोनिया से कैसे बचें ? : रामदेव पंडित

 

हिमालिनी, अंक जुलाई २०१८ | असाढ, श्रावण और भाद्र को बरसात का मौसम माना जाता है । इस समय काठमाडौ के साथ ही देश के विभिन्न भागाें में भारी वर्षा हो रही है । भारी वर्षा के कारण गर्मी बढ़ती है और इस मौसम में डायरिया, हैजा जैसे रोगों का संक्रमण बढ़ता है । उसी प्रकार वायु प्रदूषण, धुआँ धूल आदि के कारण से बच्चों एवं वृद्ध–वृद्धाओं में निमोनिया होने की संभावना अधिक रहती है । वैसे तो निमोनिया का संक्रमण सामान्य रूप से ठण्डे मौसम में ज्यादा होता है । साथ ही जोखिम में रहने वालों को निमोनिया का संक्रमण होने की सम्भावना वर्षा में अधिक होती है । आयुर्वेद के अनुसार निमोनिया को उत्फुल्लिका कहा जाता है । ये वात दोष के प्रकोप के कारण से होता है । इसका प्रभाव इम्फाइसेमा, लङ्गस् एब्सेस्, हृदयघात, मस्तिष्कशोथ, लङ्गस् कन्जेसन् आदि में होता है ।
क्या है निमोनिया ?
त्रिभुवन विश्व विद्यालय शिक्षण अस्पताल पल्मोनोलोजी एण्ड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग के उप प्राध्यापक लिखते हैं, निमोनिया वह रोग है जिससे पेस्फड़े प्रभावित होते हैं, जो किसी भी उमर मे हो सकता है । हवा में रहनेवाले बैक्टीरिया और भाइरस साँसो के माध्यम से पेस्फड़ों मे पहुँचती है और जिसके कारण निमोनिया हो जाता है । निमोनिया का लक्षण उन व्यक्तियों मे जल्द ही दिखता है जिनमें रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता कम होती है साथ ही मुधमेह, किडनी, लिभर से सम्बन्धित रोग और एचआईभी एड्स संक्रमणवालों में ज्यादा होती है ।
बैक्टीरिया के कारण हुए निमोनिया का समय मे ही सही इलाज कराने से ये एक हप्ता में ही ठीक होता है । लेकिन निमोनिया के कारण चेष्ट एक्सरे में धब्बे दिखने के बाद उस धब्बा को ठीक करने में दो सप्ताह से छ सप्ताह तक लग सकता है ।
निमोनिया की वजह क्या है ?
स्ट्रेप्टोककस बैक्टीरिया, भाइरस, फंगस और परजीवका संक्रमण आदि के कारण से भी निमोनिया होता है । उसी प्रकार, हिमोफिलस इन्फ्लुएञ्जा, माइक्रोप्लाज्मा, क्यालामैडिया आदि कारण से भी निमोनिया होता है । साथ ही फ्लु भाइरस, राइनो भाइरस, एन्फ्लुएञ्जा, एडिनोभाइरस आदि भी निमोनिया के कारण होते हैं । इसके अलाबा डिजेल, पेट्रोल जैसे कोई रसायन एस्पिरेट होकर भी लङ्गस् के नली में पहुचकर, व लङ्गस् में लगे चोट और लङ्गस्, हर्ट एवं चेष्ट से सम्बन्धित अन्य रोगों के कारण निमोनिया होता है । साथ ही टाइफाईड बिगड़ कर भी लङ्गस् में संक्रमण होकर निमोनिया हो सकता है ।
निमोनिया होता है तो लङ्गस् की बाहर की झिल्ली में जल संचय होता है, जिसमें बाद में जाकर पस भी संचय होता है जिसके कारण लङ्गस् का संकुचन होता है । जिसके कारण साँस लेने में कठिनाई उत्पन्न होती है ।
निमोनिया का लक्षण ः
निमोनिया का संक्रमण हुवा हो तो ये लक्षण दिखाई पड़ते हैं ः
 ज्वर आना, खाँसी होना, चेष्ट पेन होना ।
 स्वाँस लेते वक्त स्वाँ स्वाँ जैसी ध्वनि निकलना, चेष्ट के अन्दर घरघरी होना ।
 चेष्ट एवं उदर के निचले भागों मे पीड़ा होना ।
 ओष्ठ और नाखुन का रङ्ग नीला होना ।
 ज्वर के कारण शरीर काँपना ।
 कफ निकलना ।
 शरीर तथा मांसपेशी दर्द होना ।
 थकान और कमजोरी महसूस होना ।
(पाँच वर्षसे कम उम्र के बच्चों को निमोनिया हो तो स्वाँस लेने मे कष्ट होता हैे, दूध पीने में कठिनाई होती है ।
किस अवस्था में निमोनिया के कारण प्राण जा सकता है ?
सर्दीखासी और ज्वर लम्बे समय तक आए फिर कोई ठीक इलाज न करने से निमोनिया बिगड़ कर बीमारी सेप्टिसेमिया में जा सकता है और सेप्टिसेमिया होने से ही रोगी की जान जा सकती है । ऐसे ही दारु, धुम्रपान सेवन करनेवालो को भी निमोनिया लगे तो भी प्राण जा सकता है ।
निमोनिया को रोकने का उपाय ः
निमोनिया के जोखिम मे रहे वर्ग निमोनिया से बचने के लिए ये उपाय अपना सकते हैं ः
 पोषण से भरा भोजन करना ।
 गरम गरम कपड़े पहनना करना ।
 रोग प्रतिरोधात्मक क्षमता कम रहे बीमार व्यक्ति को भीड़भाड़ मे नही जाना चाहिए । जाएँ भी तो मास्क का प्रयोग करना चाहिए ।
 धुमपान और मद्यपान ना करना ।
 लिभर, किडनी और लङ्गस् से सम्बन्धित रोग से ग्रसित हुए रोगी इससे बचने के लिए समय से ही फ्लु, इन्फ्लुएञ्जा और निमोनिया के विरुद्ध खोप लगाना चाहिए ।
 ठण्डीखाँसी और उच्च ज्वर आए तो तत्काल ही चिकित्सक को दिखाना चाहिए । अपने मन से एन्टीवायोटिक का सेवन नही करना चाहिए ।
इलाज विधिः
निमोनिया रोग का पहचान बीमारी के लक्षण एवं चेष्ट एक्सरे द्वारा किया जाता है । साथ ही खून का जाँच एवं खकार जाँच द्वारा भी निमोनिया को जाँच किया जाता है । लङ्गस् में निमोनिया का संक्रमण हुआ हो तो एक्सरे करने से चेष्ट में धब्बा दिखाई पड़ता है । चेष्ट में निमोनिया के धब्बे दिखाई पडे तो एन्टीबायोटिक्सका सेवनद्वारा भी रोग का इलाज किया जा सकता है । साथ ही, कुछ ही दिनो में बीमार को अस्पताल में दाखिल कराकर भी निमोनिया का इलाज किया जाता है । आयुर्वेद के अनुसार पिप्पली, शुण्ठी, क्रिफला, लवङ्ग, पिप्पलीमूल आदि औषध द्रव्य इसके इलाज मे लाभदायक माना जाता है । सतर्क रहें, स्वस्थ रहें ।

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