Wed. Jul 1st, 2026
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वक़्त की आंच से जल रहा है जिगर नेह की बारिशों से बुझा जाइये ।।आरती आलोक वर्मा

 

गजल

आरती आलोक वर्मा
दास्ताँ प्रीत की अब सुना जाइये 
इक गजल प्यार से गुनगुना जाइये ।।

चांद पलकें बिछाये खड़ा है जहाँ 
चांदनी बन वहाँ आप आ जाइए ।।

नींद आती नहीं है मुझे आजकल 
लोरियाँ आप माँ की सुना जाइये ।।

वक़्त की आंच से जल रहा है जिगर
नेह की बारिशों से बुझा जाइये ।।

आरती का जनाजा निकल अब पड़ा 
चार बूंदें अश्कों की गिरा जाइये ।।

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