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बीरगंज में नेपाल भारत खुली सीमा विषयक सेमिनार का आयोजन,अवराेध लगाने का विरोध!

 
२६सितम्बर

बीरगंज। रेयाज आलम | नेपाल -भारत खुली सीमा सम्वाद समूह प्रदेश नम्बर 2 द्वारा नेपाल के बीरगंज में भारत नेपाल खुली सीमा विषयक सेमिनार का आयोजन किया गया।मंगलवार को आयोजित सेमिनार में वक्ताओं ने नेपाल व भारत के सम्बन्ध को सदियों से ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक व पारिवारिक बताते सीमा पर तार कांटा व घेरा बंदी के साथ परिचयपत्र की आवश्यकता को खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षा प्रबंध उचित है।रिश्तों पर दीवार मंजूर नही।सीमा पर दीवार सम्बन्धो पर दीवार खड़े करने जैसी है।

वक्ताओं ने सीमा क्षेत्र में होने वाले अपराध, तस्करी नियन्त्रण के लिए सुरक्षा निकाय को सजग व चुस्त दुरुस्त रहने की जरूरत पर बल दिया।कहा गया कि सुरक्षा निगरानी में सीमा सुरक्षित रहेगी।
कहा गया कि नेपाल व भारत सीमा क्षेत्र की जनता के बीच का सम्बन्ध जनस्तर सम्वन्ध है।इसे काठमाण्डु व दिल्ली परिभाषित न करे।बल्कि,जन भावना का क़द्र करते हुए सर्वमान्य निर्णय होना चाहिए।यदि तार बाड लागू करने की कोशिश हुई।तो विरोध भी होगा।
नेपाल -भारत खुली सीमा सम्वाद समूह प्रदेश नम्बर २ के संयोजक राजीव झा के सभापतित्व में सम्पन्न कार्यक्रम में राजपा के अध्यक्ष मण्डल सदस्य व शीर्ष नेता राजेन्द्र महतो, नेपाली कांग्रेस के केन्द्रीय सदस्य अजय चौरसिया, वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष एवं प्रदेश सभा सदस्य ओम प्रकाश शर्मा,समेत चन्द्र किशोर झा,इंडो नेपाल चेम्बर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, रमेश पटेल, मन्जुर अन्सारी, वीरगंज महानगरपालिका के नगर प्रमुख विजय सरावगी, नेपाल भारत सहयोग मञ्च के संयोजक अशोक बैद्य, नेजामुद्दिन समानी, रामतुल्लाह खा आदि शामिल थे। कार्यक्रम में मंच संचालन नेपाल -भारत खुली सीमा सम्वाद समुह के ओम प्रकाश सर्राफ ने किया।

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1 thought on “बीरगंज में नेपाल भारत खुली सीमा विषयक सेमिनार का आयोजन,अवराेध लगाने का विरोध!

  1. नेपाल भारत सीमा पर किस कारणो से तार बार या परिचय पत्र कि अावश्यकता है ? अगर सुरक्छा लक्छ है तो किस से खतरा है अाैर किसको खतरा है ? भारत को नेपाल से कोई खतरा तो है ही नही पहले भी नही था ईसलिये तो करीब एकलाख खस मन्गोल नश्ल के लोगो को अार्मी अाैर अन्य छेत्र मे भातर नाैकरी मे रखा है । चीन से खतरा है तो चीनी रन्ग रुप के लोगो को भारत मे घुसने केलिए पासपोर्ट कि ब्यवस्था हो । अगर वह हिन्दी बिहारी टोन मे बोले या यू पी के टोन मे बोले तो उससे कोई खतरा नही है भारत को ।ईसी तरह नेपाल को भारत से कोई खतरा है ही नही अगर खतरा रहती तो कबका नेपाल का नामोनिशान मिट गया होता । अब रही मधेसी लोगो को दुख देने के मनशाय से तार बार या परिचय पत्र लगाने की बात तो मधेसी से भारत को कोई मतलब नही है अाैर मधेसी लोग भारतीय भी नही है । भातर सरकार पहले बिहार अाैर यू पी के लोगो से पूछे उनलोगो को क्या चाहिये ? तब निर्णय ले अाैर अगर नेपाल सरकार जान बुझकर मधेसी लोगोको दुख देना चाहती है तो वो किसी किमत पर मान्य नही होगा । हा अगर मधेस को छोड कर नेपाल सरकार तार बार ही नही पक्की दिवार भी उठाले तो मधेसी लोगो को कोई अापत्ती नही होगा । बिहार अाैर यू पी के लोगो से सम्बन्ध होने के नाते अाैर मधेशी लोग बिपन्न होने के नाते दैनिक उपभोग की वस्तु पर भारत या नेपाल सरकार दवारा किसी किसिम का कर न लेने कि ब्यवस्था हो ।क्यो कि भारत सरकार २५० बर्षो से पहाडी लोगो की अार्थिक उन्नति मे सहयोग करती अारही है अाैर उनलोगो का करय शक्ति मधेशियो कि तुल्ना मे बहुत अागे है ।

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