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क्यों ज्यादा समय तक जीती हैं महिलाएं?

 

वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्होंने महिलाओं के पुरुषों से ज्यादा जीने की संभावना की वजह का पता लगा लिया है.

वैज्ञानिकों ने ये दावा मधुमक्खियों पर किए गए एक अध्ययन के बाद किया है.

‘करेंट बायोलॉजी’ नामक पत्रिका में छपे एक लेख में इन वैज्ञानिकों ने लिखा है कि इसके लिए उन्होंने ‘माइटोकॉन्ड्रिया’ में पाए जाने वाले डीएनए और समय-समय पर उसमें होने वाले बदलावों का अध्ययन किया.

माइटोकॉन्ड्रिया कोशिका को ऊर्जा पहुंचाने वाला कोशिकांग होता है. माइटोकॉन्ड्रिया की खास बात ये भी है कि ये सिर्फ मां से ही विरासत में मिलते हैं, पिता से कभी नहीं.

लेकिन आयु संबंधी विज्ञान के विशेषज्ञों का कहना है कि स्त्री पुरुष की जीवन अवधि के अंतर में लिंग विभेद की व्याख्या के लिए कई और भी कारक जिम्मेदार थे.

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लंदन में 85 वर्ष की आयु में चार पुरुषों की तुलना में छह महिलाओं की चाहत ज्यादा जिंदा रहने की होती है जबकि सौ की आयु में ये अनुपात दो और एक का होता है.

जबकि दूसरी और प्रजातियों में मादाएं पुरुषों की तुलना में ज्यादा जीवित रहती हैं.

मादाओं पर प्रभाव नहीं

इस शोध कार्य में ऑस्ट्रेलिया के मोनैश विश्वविद्यालय और लंदन के लांसेस्टर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञ शामिल थे. इन लोगों ने मधुमक्खियों की 13 प्रजातियों में नर और मादा के माइटोकॉन्ड्रिया का विश्लेषण किया.

“शोध के परिणाम माइटोकॉन्ड्रिया के भीतर स्थित डीएनए में कई उत्परिवर्तन की ओर इशारा करते हैं. ये उत्परिवर्तन पुरुषों के जीवन को प्रभावित करते हैं, “

डॉक्टर डेमियन डॉउलिंग, शोधकर्ता

शोध में शामिल मोनैश विश्वविद्यालय के डॉक्टर डेमियन डॉउलिंग के अनुसार, “शोध के परिणाम माइटोकॉन्ड्रिया के भीतर स्थित डीएनए में कई उत्परिवर्तन की ओर इशारा करते हैं. ये उत्परिवर्तन पुरुषों के जीवन को प्रभावित करते हैं, साथ ही उसकी गति को भी.”

उनके मुताबिक, “दिलचस्प बात ये कि ये उत्परिवर्तन मादाओं के जीवन पर कोई प्रभाव नहीं डालते.”

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उनका कहना है कि माइटोकॉन्ड्रिया सभी जंतुओं में पाया जाता है और मादाओं में पुरुषों की तुलना में ज्यादा जीने की चाहत बहुत सी प्रजातियों में एक जैसी होती है.

डॉक्टर डॉउलिंग कहते हैं, “इसलिए हमारे शोध परिणाम बताते हैं कि माइटोकॉन्ड्रिया में उत्परिवर्तन ही पूरे जंतु समुदाय के पुरुषों में उम्र कम घटाने की दर को बढ़ाता है.”

उनका कहना है, “यदि माइटोकॉन्ड्रिया में होने वाला कोई उत्परिवर्तन पिता को नुकसान पहुंचाता है और माता को कोई नुकसान नहीं पहुंचाता तो ये प्राकृतिक चयन के वक्त छूट जाता है.”

उनके मुताबिक हजारों पीढ़ियों से ऐसे कई उत्परिवर्तन हुए जिनसे सिर्फ पुरुषों को नुकसान हुआ और महिलाओं पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ा.

अबूझ पहेली

“मैं ये बिल्कुल नहीं मानता हूं कि ये कोई ऐसी खोज है जो कि ये बता दे कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में पाँच-छह साल ज्यादा जीती हैं. लंबी आयु के लिए जीवनशैली, सामाजिक रहन-सहन, व्यवहार जैसे कई और कारक जिम्मेदार होते हैं.”

टॉम किर्कवुड, आयु संबंधी मामलों के जानकार

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वहीं आयु संबंधी मामलों के एक जानकार टॉम किर्कवुड इस शोध के बारे में कहते हैं कि ये एक पहेली है.

उनके मुताबिक, “ये हो सकता है कि इससे हमें माइटोकॉन्ड्रिया के बारे में कोई और जानकारी मिले और नर और मादा मक्खियों में कुछ अंतर पता चले. ये हम सभी जानते हैं कि तमाम प्रजातियों में माइटोकॉन्ड्रिया आयु के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है.”

किर्कवुड आगे कहते हैं, “लेकिन मैं ये बिल्कुल नहीं मानता हूं कि ये कोई ऐसी खोज है जो कि ये बता दे कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में पाँच-छह साल ज्यादा जीती हैं.”

उनके मुताबिक लंबी आयु के लिए जीवनशैली, सामाजिक रहन-सहन, व्यवहार जैसे कई और कारक जिम्मेदार होते हैं. हालांकि जीवविज्ञान की दृष्टि से देखें तो सबसे बड़ा अंतर पुरुषों और महिलाओं के हॉर्मोन्स में होताह है.

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