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आदित्यनाथ पर क्यों हो रहे हैं निधि जी नाराज ?

 

डॉ. मुकेश झा

कहा जाता है कि क्रोधी व्यक्ति, ईष्र्यालु व्यक्ति और आक्रिशित व्यक्ति विवेक शुन्य और मृत तुल्य हो जाता है । उस का प्रत्यक्ष उदाहरण नेपाली कांग्रेस के उप–सभापति एवं पूर्व में अनेकों मंत्रालय में मंत्री एवं उप–प्रधानमंत्री समेत रहे विमलेन्द्र निधि जी हैं ।
हाल ही में उन्होने आकस्मिक प्रेस सम्मेलन बुलाकर पत्रकारों के सामने विवाह पञ्चमी के अवसर पर योगी के भ्रमण पर योगी के भ्रमण के दौरान होने वाले कुछ कार्यक्रमों को लेकर अपनी आपत्ती जनाई है ।

 

 

जनकपुरधाम में होने वाला विवाह पञ्चमी महोत्सव में हरेक वर्ष भारत के अयोध्या से अनेकों सन्त–महन्थ बारात के रुप में जनकपुरधाम आतें हैं । ईस बार भारत के ऊत्तर प्रदेश स्थित गोरखपुर मंदिर के महन्थ एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ जी का भी उस बारात में आने की विशेष चर्चा हो रहि है । हालाकि ईस बात की आधिकारिक पुष्टी भारत और नेपाल के आधिकारिक निकाय द्वारा नहीं की गई है ।
परन्तु स्थानीय जनमानस में उसी तरह कि तैयारी चल रहि है । उसी के साथ यह चर्चा भी है कि योगी आदित्यनाथ के साथ भारत के रेल मंत्री एवं गृह मन्त्री के आने कि भी चर्चा हो रहि है साथ ही अंतिम समय में भारतीय प्रधानमंत्री मोदी जी आ जाए ईस संभावना को भी नकारा नहीं जा सकता । ईसतरह के अवस्था में जव कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है । राजनीति में लम्वे समय से रहे एवं देश के उच्च ओहदे का कार्यभार सम्हाले हुए वर्तमान में मुख्य प्रतिपक्षी दल के उप–सभापति जैसे पद पर आसिन रहे विमलेन्द्र निधि जी द्वारा ईस तरह के व्यवहार पर सभी क्रोधित एवं आश्चर्यचकित है ।
विमलेन्द्र निधि जी ने मुख्यमंत्री माननिय योगी आदित्यनाथ जी के भ्रमण पर कुछ सवाल उठाए हैं । उन का कहना है कि योगी आदित्यनाथ जी बारात बनकर आए, उस में कोई आपत्ती नहीं है परन्तु उन के द्वारा जयनगर–जनकपुर–कुर्था रेल्वे का उद्घाटन होना आपत्ति जनक है । विमलेन्द्र निधि जी का दुसरा आपत्ती है कि योगी आदित्यनाथ राज–संस्था के पक्षधर हैं और नेपाल राज संस्था सहित का हिन्दु राष्छ« हो ईस के पक्षधर हैं । ईसलिए भी योगी जी का जनकपुरधाम आना नेपाल के लोकतन्त्र के लिए खतरा का संकेत है । मुख्यतः ईन दो वातों पर उप–सभापति विमलेन्द्र निधि जी ने आकस्मिक प्रेस सम्मेलन करवाया और आदित्यनाथ जी के नेपाल भ्रमण पर विरोध जताया ।
अब सवाल यह है कि क्या विमलेन्द्र निधि जी ने आदित्यनाथ जी के विरोध करने से पर्व नेपाल सरकार से ईस भ्रमण के विषय में कोई जानकारी लिया था या कौवा कान ले गया कहते ही कान छुने कि बजाय कौवा के पिछे लग गए ।
दुसरी बात, अगर योगी आदित्यनाथ जी किसी भी संरचना के उद्घाटन नेपाल सरकार के आग्रह, आमन्त्रण और अनुमति के बिना नहीं कर सकते । इसिलिए यदि यहां विरोध करना ही है तो विमलेन्द्र निधि जी को चाहिए की वो ओली सरकार का विरोध करे ना कि योगी आदित्यनाथ जी का ।
अगर नेपाल सरकार ने किसी को किसी संरचना का उद्घाटन करने के लिए बुलाया है जिसे आदित्यनाथ जी से उद्घाटना करवाना कूटनैतिक मर्यादा के विपरित है तो यहां बिरोध बुलानेवाला अर्थात नेपाल सरकार या ओली सरकार का होना चाहिए ना कि आमन्त्रित अतिथी का ।
विमलेन्द्र निधि जी को नेपाली कांग्रेस का पद विरासत के रुप में मिला है । पिता श्री महेन्द्र नारायण निधि जो की नेपाली कांग्रेस के महामन्त्री थे और जिनका भारतीय कांग्रेस के साथ भी अच्छा संबंध था, उनके पहचान ने विमलेन्द्र निधि जी को नेपाली कांग्रेस में एक उचाई पर स्थापित किया है ।
दोनो आपस में भाई भाई जेसे हैं । भारतीय कांग्रेस भी परिवारवाद के आधार पर चल रहा है और नेपाली कांग्रेस भी । ईस नाते भी और नेपाली कांग्रेस को भारतीय कांग्रेस ने नेपाल में आन्दोलन के समय किए सहयोग के लिए नमक कि किमत अदा करने के लिए भी भारतीय जनता पार्टी के तरफ से मुख्यमंत्री रहे योगी आदित्यनाथ जी का विरोध करना विमलेन्द्र निधि जी ने अपना दायित्व समझा होगा । तभी तो बिना सोंचे समझे विचारे सिधे मैदान में कुद परे ।
विमलेन्द्र निधि जी का आरोप है कि योगी आदित्यनाथ जी राजा के समर्थक है और राजतन्त्र के पक्ष में कई बार बोल चुके है, इसिलिए उन का जनकपुरधाम भ्रमण राजतन्त्र के स्थापना में सहयोगी हो सकता है । सायद विमलेन्द्र निधि जी नेपाली कांग्रेस के ईतिहास को बिना याद किए ही यह बात बोल दिए । नेपाल में जब भी राजतन्त्र के समर्थक यदि कोई रहा है तो वह नेपाली कांग्रेस ही है ।
योगी आदित्यनाथ जी जव पिछली वार काठमांडू आए थे और राजतन्त्र एवं हिन्दु राष्ट्र के विषय में कुछ बोलें, उस के कुछ समय के बाद गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में उन से मेरी मुलाकात हुई थी । मैने उनसे स्पस्ट कहा था कि नेपाल में जनता लोकतन्त्र चाहती है । हिन्दु होने के नाते हिन्दु राष्ट्र चाहते है लेकिन लोकतान्त्रिक हिन्दु राष्ट्र न कि राजतान्त्रिक हिन्दु राष्ट्र । तो मेरी ईस बात पर योगी जी ने कहा कि हम सर्वदा जनमानस के साथ है । हम नेपाल के विकास में नेपाल के जनता के साथ है, जनभावना का कदर करना ही हम अपना कर्तव्य मानते है । उस समय योगी जी मुख्यमंत्री नहीं बने थें ।
योगी आदित्यनाथ एक फकिर है । उन्हे पद, मान, प्रतिष्ठा से ज्यादा स्वयं का प्रतिष्ठा से प्रेम है जिस पर विमलेन्द्र निधि जी ने विना विचारे ही कुठाराघात किया है । भारत में भारतीय जनता पार्टी के विरोध कांग्रेस जिस तरह से करती है उस तरह से भाजपा के मुख्यमंत्री का किसी बहाने नेपाल में विरोध हो, ईस बात की जिम्मेवारी विमलेन्द्र निधि जी ने लिया होगा । ताकी भारतीय कांग्रेस को भारत में योगी जी के विरुद्ध बोलने का अवसर प्राप्त हो । लेकिन नेपाल और भारत के कांग्रेस का चरित्र अब सब को पता है की यह ना तो खूद कुछ करेगा और ना दुसरों को कुछ करने देगा ।
श्रीमान विमलेन्द्र निधि जी को नेपाल में हुए भुकम्प में आकश्मिक पत्रकार सम्मेलन करवाने कि आवश्यक्ता महशुस नहीं हुई, देश में आगलगी, बाढ के समय में भी कोई पत्रकार सम्मेलन नहीं किया । देश में जब रोहिंगिया घुसपैठ हो रहा था तब भी उन्होने कोई आपत्ति नहीं जताई । जव कुछ मुस्लिम युवकों ने सिरहा के सुखीपुर में एक महिला के साथ सामुहिक वलात्कार किया, उस पर भी निधि जी को कोई आपत्ती नहीं है । लहान, सिरहा में अज्ञात समुह द्वारा एक मंदिर तोडा गया उस पर भी उन्होने कुछ नहीं बोला । रौतहट में दुर्गा पुजा के मुर्ती बिसर्जन को लेकर हुए विवाद पर भी मौन रहें । लेकिन योगी आदित्यनाथ जी के जनकपुरधाम भ्रमण करने पर ईन को घोर आपत्ती है । ईसी लिए ‘प्रोटोकौल’ की बात करने वाले निधि अपने सारे ‘प्रोटोकल’ तोडते हुए अनाधिकारिक योजना पर असंवेदनशील प्रतिक्रिया दे बैठें ।
विमलेन्द्र निधि जी को आत्मग्लानी होना चाहिए कि जिस समाज में अतिथी देवो भवः कि परम्परा रहि है, उस समाज में किसी अवसर पर आए एक प्रतिष्ठित व्यक्ति के विरोध में जुट गए हैं ।
अगर निधि जी को विरोध करना है तो अब भी समय है कि वह योगी आदित्यनाथ जी के लिए कहे गए वक्तव्य कि गलती स्वीकार माफी मागते हुए ओली सरकार का विरोध करे । नहीं तो ईस असभ्यता का प्रयश्चित करने का मौका भी उन्हे नहीं मिलेगा ।

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