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मार्गशीर्ष के महीने को भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप माना गया है

 
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मार्गशीर्ष के महीने को भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप माना गया है, इस माह शंख की पूजा भी की जाती है। इस माह में ऐसी चमत्कारी शक्तियां हैं जिस पर आप सहसा आसानी से विश्वास नहीं कर पाएंगे।
अगहन महीने में श्री कृष्ण का ध्यान और उपासना करने से अमोघ फल प्राप्त होता है। अमोघ का अर्थ होता है कभी नष्ट ना होने वाला फल। अत: इस माह निरंतर भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करते रहने से इस माह का संपूर्ण पुण्यफल आप पा सकते हैं। इसके अलावा भी इस अद्वितीय महीने में आप निम्न लाभ पा सकते हैं।
आइए जानें…
* इस महीने में सांवले सलौने भगवान श्री कृष्ण की उपासना करना और पवित्र नदियों, तट या सरोवर में स्नान करना विशेष शुभदायी होता है।
* अगर आप संतान की चाह रखते है तो श्री कृष्ण की आराधना करने मात्र से आपको संतान प्राप्ति का वरदान बहुत सरलता से प्राप्त हो सकता है।
* मार्गशीर्ष माह में कीर्तन करने तथा शास्त्रों का पाठ करने से अमोघ फल मिलता है।
* इस महीने में किए गए हर तरह के मंगल कार्य विशेष फलदायी होते हैं।
* इस महीने पूरे मन से श्री कृष्‍ण की आराधना करने से चंद्रमा से अमृत तत्व की प्राप्ति भी होती है।

* इस महीने कृष्‍ण मंत्रों, आरती, चालीसा, श्लोक, स्तुति आदि का पाठ विशेष फलदायी होता है।
* इस महीने गौ सेवा अवश्य करनी चाहिए। गायों की सेवा और उनकी उचित देखरेख करने से भी कृष्ण प्रसन्न होते है।
* इस महीने गाय के शुद्ध घी का दीया कृष्‍ण मंदिरों में अवश्‍य चलाना चाहिए।
इसके अलावा श्री कृष्ण को अपना बनाने और उनकी कृपा पाने के लिए केवल प्रेम की साधना ही पर्याप्त है। इस महीने में अगर आप पूरे प्रेम भाव से श्री कृष्ण को पुकारेंगे तो निश्चित ही आपको इसका उचित फल देंगे।
स्कंद पुराण के अनुसार श्री कृष्ण और राधा की कृपा पाने वाले मनुष्‍य को मार्गशीर्ष माह में व्रत, उपवास व निरंतर भजन, कीर्तन आदि करते रहना चाहिए। इसके साथ ही शाम के समय यानी संध्या काल में श्र‍ी कृष्ण और राधा की आराधना के साथ-साथ विष्‍णु जी और शिव जी के भजन-कीर्तन भी अवश्य करना चाहिए। इन दिनों प्रतिदिन गीता का पाठ अवश्‍य करना चाहिए।
इस पूरे महीने भर में मनुष्‍य पूरे विधि-विधान से श्री कृष्‍ण का ध्यान, जप-तप, व्रत-उपवास आदि करता है तो उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है। इस महीने कुछ वस्तुओं का प्रयोग करने की शास्त्रों में मनाही है। इस माह में जीरा खाने की मनाही हैं, अत: महीने भर जीरा नहीं खाना चाहिए तथा वसायुक्त भोजन करना चाहिए। इसके साथ ही इस महीने तेल मालिश करना शुभ फल प्रदान करता है।

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