Wed. Jul 1st, 2026
English मे देखने के लिए क्लिक करें

गीत–संगीत से नेपाल–भारत को जोड़नेवाले गायक पन्नाकाजी

 

लिलानाथ गौतम
नेपाली गीत–संगीत के क्षेत्र में चिर–परिचित नाम स्व. पन्नाकाजी की आज (पौष २४ गते) ८७वें जन्म दिन है । पन्नाकाजी वह शख्स हैं, जिन्हों ने गीत–संगीत के माध्यमों से नेपाल और भारत को जोड़ने का काम किया है । उन का जन्म वि.सं. १९८८ पौष २४ गते काठमांडू में हुआ था, जिन्होंने अनुमानित ४ सौ कालजयी गीत में अपना स्वर दिया है, जो रेडियो नेपाल से प्रसारित हुआ करता था । लेकिन उस समय की प्राविधिक कठिनाई के कारण अधिकांश गीत आज संरक्षित नहीं है ।
पन्नाकाजी के जेष्ठ सुपुत्र प्रीतममान शाक्य कहते हैं कि पन्नाकाजी द्वारा स्वरवद्ध लगभग ३ सौ से ४ सौं गीत हैं, जिस में आज सिर्फ ५७ गीत पाया गया है, उस में से १२ भजन हैं । पन्नाकाजी की सबसे अधिक चचिर्त गीत, जिसका शब्द है– ‘तिरिरी मुरली बज्यो बनैमा’ जो आज भी चर्चित है । गीत–संगीत में प्रवेश करनेवाले नव–गायक तथा संगीतकार इसी गीत में आज भी प्राक्टिस करते हैं । ‘तिरिरी मुरली बज्यो बनैमा’ गीत में दर्जनों गायकों ने अपना स्वर दिया है, जिसमें बंगलादेशी गायिका रेविकासफी उल्ला भी एक हैं । वैसे तो मसहूर भारतीय गायिका लता मंगेश्वर ने भी पन्नाकाजी द्वारा संगीतबद्ध गीत में अपना स्वर दी है, जिस को भारतीय संगीतकार जयदेव ने संगीतबद्ध किया था । ‘आमा तिमीलाई शुभकामना’ बोल की उक्त गीत नेपाली चलचित्र ‘माइती घर’ में भी गया रखा है ।

यह भी पढें   लामिछाने का भव्य स्वागत भारत की कूटनीतिक जीत : कंचना झा


पन्नाकाजी वह शख्स है, जो नेपाली के अलवा अपनी भातृभाषा नेवारी और हिन्दी में भी गाते थे । जानकार लोगों का कहना है कि उस वक्त पन्नाकाजी स्टेज कार्यक्रम में नेपाली और नेवारी के अलवा हिन्दी गीत भी गाते थे । पन्नाकाजी द्वारा स्वरबद्ध ‘कसरी म बिर्सु उनलाई ?’ बोल की गीत ने सन् १९७० में संगीत की दुनियां में एक तरंग सिर्जना की थी । उक्त गीत का रचनाकार राममान तृषित हैं और संगीतकार शिव शंकर हैं । जापान में आयोजित ‘एक्स्पो ओशाका’ नामक कार्यक्रम में उक्त गीत और संगीत ने सभी का मन जीत लिया था । उक्त गीत अल–इण्डिया रेडियो में प्रसारण होने के बाद भारतीय संगीत जगत के हस्ती पं. शिवकुमार शर्मा (सन्तुर वादक) और हरिप्रसाद चौरसिया (बांसुरी वादक) का हृदय छु लिया । बाद में उन लोगों ने अपनी कृति Instrumental Album (The Best of Sound Scapes) में उक्त संगीत को समेट लिया, जहां उस को Spring Times: Music of The Mountains नाम दिया गया, जो विश्वभर आज भी सुना जाता है ।
इतना ही नहीं, पन्नाकाजी द्वारा स्वरबद्ध और संगीतबद्ध अन्य दर्जनों गीत–संगीत है, जो आज भी प्रसिद्ध है और नयी पीढ़ी के गायिक–गायिका उन गीतों को गाना चाहते हैं । गीत–संगीत में लगनेवाले नयी पीढ़ी के लोगों को पन्नाकाजी रचित गीत–संगीत जिस तरह छूता है, उसी तरह उस को संरक्षण करना भी आज की आवश्यकता है ।

About Author

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may missed