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न्याय सुधार आयोग गठन की औचित्यता नहीं हैः प्रधान न्यायाधीश

 

काठमांडू, २० जनवरी । प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा ने कहा है कि तत्काल के लिए न्याय सुधार आयोग गठन करने की जरुरत नहीं है और इसकी औचित्यता भी नहीं है । आइतबार पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए उन्होंने कहा– ‘न्याय सुधार आयोग गठन के लिए बारबार बहस हो रहा है । लेकिन हम लोगों ने हाल ही में नयां संविधान जारी किया है, जहां न्यायलयों की अधिकार के विषय में स्पष्ट उल्लेख है, इसीलिए तत्काल आयोग गठन करने की जरुरत नहीं है ।’
प्रधान न्यायाधीश राणा को कहना है कि सर्वोच्च अदालत के न्यायाधिशों की पूर्ण बैठक से ही सम्पूर्ण विषयों में बहस कर निर्णय किया जाता है, ऐसी अवस्था में आयोग गठन करने की जरुरत नहीं पड़ती । उनका यह भी मानना है कि मुद्दा की जिम्मेदारी देने के लिए प्रधान न्यायाधीश के पास जो अधिकार है, उसमें कटौती कर स्वचालित प्रक्रिया में जाना भी ठीक नहीं है । उन्होंने आगे कहा– ‘हमारे यहां ऐसी अवस्था भी है, जहां विशिष्टकृत क्षमतावाले न्यायाधिशों की इजलाश में भी मुद्दा देनी पड़ती है । इसीलिए तत्काल स्वचालित प्रणाली में जाना भी ठीक नहीं है । लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि अगर न्याय क्षेत्र सुधार हो सकता है तो स्वाचालित प्रणाली में भी जा सकते हैं ।

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