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मधेश में औपनिवेशक शासन लम्बे समय से चला : नेता प्रदीप गिरी

 

काठमांडू, २४ जनवरी । राजनीतिक चिन्तक तथा नेपाली कांग्रेस के नेता प्रदीप गिरी ने कहा है कि नेपाली की राजनीतिक दिशा परिवर्तन के लिए स्व. गजेन्द्र नारायण सिंह जी ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है । उनका कहना है कि स्व. गजेन्द्र जी के कारण ही नेपाल में संघीयता, समानुपातिक और समावेशी मुद्दा में सोचने के लिए राजनीतिककर्मी बाध्य हुए हैं । गजेन्द्र नारायण सिंह की १७वीं पुण्यतिथि के अवसर पर गजेन्द्र नारायण सिंह स्मृति प्रतिष्ठान द्वारा बिहीबार काठमांडू में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए उन्हाें ने ऐसा कहा है ।

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कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए नेता गिरी ने कहा– ‘मधेश के साथ लम्बे सयम से भेदभाव किया गया, औपनिवेशिक शासकों की तरह वहां भेदभाव रहा, उसके विरुद्ध गजेन्द्र नारायण सिंह जी ने पीडित समुदाय को इकठ्ठा किया ।’ उनका कहना है कि स्व. गजेन्द्र जी ने जिस आन्दोलन का शुरुआत किया, उसके कारण ही यहां के राजनीतिक दल, नेता और शासक वर्ग समावेशी और समानुपातिक प्रणाली के प्रति सोचन के लिए बाध्य हो गए हैं । नेता गिरी को यह भी मानना है कि जिसतर महात्मा गांधी में राजनीतिक सादगीपन था, उसीतरह का सादगीपन गजेन्द्र जी में भी था । उन्हाें ने कहा कि दोनों नेताओं ने समतामुलक राजनीति और समाज निर्माण के लिए जीवन अर्पित किया ।

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अपने मन्तव्य के क्रम में नेता गिरी ने वर्तमान राजनीति तथा सत्ता के चरित्र के प्रति भी असन्तुष्टि व्यक्त किया उनका कहना है कि नेपाल एक गरीब देश है, लेकिन यहां के राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री तथा मन्त्रियों के करोड़ो की गाड़ी चढ़ने की चाहत है, जो विल्कुल अस्वभनीय है । जिस तरह राजनीतिक परिवर्तन की शुरुआत मधेश से हुआ है, उसीतरह प्रशासनिक शुशासन और सामाजिक सदाचार की शुरुआत भी मधेश से ही होने की अपेक्षा उन्होंने किया ।

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