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संघीयता संविधान में है, व्यवहार में नहीं : लक्ष्मण लाल कर्ण

 

काठमांडू, २५ जनवरी । राष्ट्रीय जनता पार्टी के नेता तथा सांसद् लक्ष्मणलाल कर्ण ने कहा है कि आज संघीयता सिर्फ संविधान में है, व्यवहार में नहीं । उनका मानना है कि स्थानीय तहों कार्यरत कर्मचारी और पुलिस प्रशासन प्रदेश के मातहत ना होना ही संघीयता व्यवहार में ना होने की प्रमाण है । गजेन्द्र नारायण सिंह की १७वीं पुण्यतिथि के अवसर पर गजेन्द्र नारायण सिंह स्मृति प्रतिष्ठान द्वारा बिहीबार काठमांडू में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए उन्होंने कहा– ‘आज संघीयता सिर्फ संविधान में है, व्यवहार में नहीं है । ऐसी संघीयता गजेन्द्र बाबू ने परिकल्पना नहीं की थी ।’
नेता कर्ण ने यह भी कहा कि प्रधानमन्त्री केपीशर्मा ओली संविधान संशोधन करना ही नहीं चाहते हैं । उन्होंने आगे कहा– ‘हमारे संसद् प्रदीप यादव ने प्रधानमन्त्री से पूछा कि संविधान संंशोधन कब होगा ? प्रधानमन्त्री ने जवाफ दिया कि संविधान संशोधन फैशन बन गया है । उनकी यही कथन से स्पष्ट होता है कि वह संविधान संशोधन के लिए तैयार नहीं हैं ।’
नेता कर्ण ने कहा कि आज मधेश की राजनीति गजेन्द्र बाबु की दिशा में ही आगे बढ़ रहा है । उनका मानना है कि अगर गजेन्द्र बाबु को भूल जाएंगे तो मधेश आन्दोलन ही समाप्त हो जाएगी । उन्होंने आगे कहा– ‘आज देश जिस जगहों में खड़ा है, उसमें गजेन्द्र बाबु का भी योगदान है ।’ नेता कर्ण ने यह भी कहा है कि मधेशवादी पार्टी एक आन्दोलन भी है, मधेशी समुदाय को लड़ने से ही परिवर्तन आएगी ।
नेता कर्ण ने कहा कि स्व. गजेन्द्र बाबु सिर्फ कहते नहीं थे, जो कहते थे, उसको व्यवहार में अमल भी करते थे । उन्होंने आगे कहा– ‘नेपाल में संघीयता की बहस गजेन्द्र बाबु ने ही शुरु किया है । संसद् में मधेश की पहचान धोती और कुर्था की प्रवेश से लेकर हिन्दी भाषा का प्रयोग उन्होंने ही शुरु किया है, जिसके लिए हम लोग आज भी लड़ रहे हैं ।’ नेता कर्ण ने कहा कि जिस तरह स्व. गजेन्द्र बाबु अपनी विचार में दृढ़ थे, आज के नयां पीढ़ी में भी उसी तरह का दृढ़ता होनी चाहिए ।

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