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भारतीय जाँच पर नज़र, इंटरनेट रहे आजाद: अमरीका

 

इंटरनेट पर भड़काऊ सामग्री डाले जाने पर 245 वेबसाइट-वेब पन्नों को भारत में ब्लॉक किए जाने के फैसले के ठीक एक दिन बाद अमरीकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता विक्टोरिया नूलैंड ने कहा कि अमरीका इंटरनेट की आजादी के पक्ष में है.

सोशल मीडिया वेबसाइट्स और ब्लॉग्स पर भड़काऊ सामग्री डाले जाने और फिर पूर्वोत्तर के लोगों के पलायन के मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए विक्टोरिया नूलैंड ने कहा कि भारत पलायन के मामले पर जांच कर रहा है और हम इस प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं.

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एक पत्रकार वार्ता में नूलैंड ने कहा, “हम हमेशा से ही इंटरनेट की आजादी के पक्ष में हैं. भारत सरकार पूरे मामले की जांच कर रहा है, इस बीच हम वहां की सरकार से आग्रह करते हैं कि वो मूलभूत अधिकारों, कानून और मानवाधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जारी रखे.”

विक्टोरिया नूलैंड

इंटरनेट के माध्यम से पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ नफरत फैलाए जाने की कोशिशों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए भारत सरकार ने सोमवार को करीब 245 वेब पन्नों और वेबसाइटों को ब्लॉक करने का आदेश दिया था.

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अफवाहें और पलायन

भारत के प्रमुख शहरों से पूर्वोत्तर के लोगों के पलायन की प्रारंभिक जांच में पता चला था कि दहशत फैलाने वाले कई सोशल मीडिया खाते, ब्लॉग और वेबसाइटें भारत के बाहर, खासतौर पर पाकिस्तान से संचालित किए जाते थे.

नूलैंड ने कहा है कि भारत में अशांति के मामले में एक पक्ष बनी फेसबुक और ट्विटर जैसी कंपनियां अमरीकी सरकार से किसी प्रकार के सलाह के लिए स्वतंत्र हैं. गौरतलब है कि ये कंपनिया अमरीकी मूल की हैं.

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हालांकि अमरीकी विदेश मंत्रालय से विकिलीक्स के मामले पर इंटरनेट की आजादी के बारे में उनकी राय पूछे जाने पर नूलैंड ने कहा कि वो मामला अलग है.

उन्होंने कहा, “विकिलीक्स के मामले का इंटरनेट की आजादी से लेना-देना नहीं है. विकिलीक्स अमरीकी सरकार की गुप्त जानकारी लीक कर रहा था.”

अमरीका की खूफिया कूटनीतिक जानकारी सार्वजनिक करने के कारण विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज से अमरीका बेहद नाराज है.

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