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अब खुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला, हम ने अपना लिया हर रंग जमाने वाला : निदा फाजली

 

उर्दू और हिंदी के अजीम शायर


निदा फाजली उर्दू और हिंदी दुनिया के अजीम शायरों और गीतकारों में शुमार होते थे। उनके गीत काफी सरल माने जाते हैं, जो हर एक की जुबान पर चढ़े रहते थे। प्रतिगतिशील वामपंथी आंदोलन से जुड़े रहे निदा फाजली को हर तबके से प्यार मिला और उनके गीतों को काफी पसंद भी किया गया।

इस बेहतरीन शायर ने 8 फरवरी 2016 को सबका साथ छाेड दिया

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1. क्‍या हुआ शहर को कुछ भी तो दिखाई दे कहीं, यूं किया जाए कभी खुद को रुलाया जाए
घर से मस्‍जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें, किसी रोते हुए बच्‍चे को हंसाया जाए

2. अपनी मर्जी से कहां अपने सफर के हम हैं,
रुख हवाओं का जिधर का है उधर के हम हैं

3. अब खुशी है न कोई दर्द रुलाने वाला
हम ने अपना लिया हर रंग जमाने वाला

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4. इस अंधेरे में तो ठोकर ही उजाला देगी
रात जंगल में कोई शम्‍म जलाने से रही

5. कुछ भी बचा न कहने को हर बात हो गई
आओ कहीं शराब पिएं रात हो गई

6. कभी किसी को मुकम्‍मल जहां नहीं मिलता
कहीं जमीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता

7. कोई हिंदू कोई मुस्‍लिम कोई ईसाई है
सब ने इंसान न बनने की कसम खाई है

8. कोशिश भी कर उम्‍मीद भी रख रास्‍ता भी चुन
फिर इस के बाद थोड़ा मुकद्दर तलाश कर

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9. खुदा के हाथ में मत सौंप सारे कामों को
बदलते वक्‍त पे कुछ अपना इख्‍तिकार भी रख

10. तुम से छूट कर भी तुम्‍हें भूलना आसान न था
तुम को ही याद किया तुम को भुलाने के लिए

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