Thu. Aug 6th, 2020

जिसकी लाठी उसकी भैस- पर्सा फोरम का अधिवेशन

रेयाज आलम, बीरगंज, चैत्र १५ गते शुक्रवार । संघीय समाजवादी फोरम पर्सा का अधिवेशन गुड्डा-गुड़िया का खेल बन गया है। जिसमे विवाद दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहा है। अधिवेशन लोकतान्त्रिक प्रक्रिया का अभ्यास न होकर वर्चस्व कायम करने का उपक्रम बनकर रह गया है। ना कोई नियम, न निर्वाचन आयोग की कोई भूमिका,ना ही कोई विधि-विधान। जिसकी लाठी उसकी भैस।
पर्सा फोरम में विवाद की शुरुआत सक्रीय सदस्य्ता फॉर्म भरने के समय से हुई। सक्रीय सदस्य्ता भरने के समय सभी नेताओ में सहमति हुई की सभी वार्ड में सक्रीय सदस्य्ता देने का समय घोषित कर दिया जाए, जिससे पारदर्शी तरीका से सबको सक्रीय सदस्य्ता दिया जा सके,लेकिन सहमति के वावजूद जिला अध्यक्ष ने समिति बनाई ही नहीं। सदस्य्ता जमा करने के अंतिम दिन नेताओ को मालूम हुआ की प्रदीप यादव पक्ष गुपचुप तरीके से सक्रीय सदस्य बना चूका है। जिसका विरोध हुआ और असंतुस्ट पक्ष को सक्रीय सदस्य्ता जमा करने के लिए अतिरिक्त पांच दिन का समय मिला।  यही प्रदीप यादव से चूक हो गई, उनके हाथ से पार्टी की लगाम छूट गई और सभी नेतृत्व गण आपने अपने खेमे में खुलकर लग गए।
असंतुष्ट पक्ष जिला उपाध्यक्ष मंजूर अंसारी के नेतृत्व में अपने समर्थको का सदस्य्ता तयशुदा अंतिम दिन में दर्ज कराया। तयसीमा समाप्त होने के आठ दिन बाद प्रदीप यादव अपने पहुंच के प्रयोग से दोबारा सक्रीय सदस्य्ता दर्ज करने में सफल रहे। अगर इतना सब होने के बाद सार्थक प्रयास होता तो दोनों पक्ष मिलकर वड़ा कमिटी बना सकते थे। लेकिन जिला अध्यक्ष ने केंद्रीय सदस्यों को बैठक में बुलाए बगैर तीन दिन में सम्पूर्ण जिला का वड़ा अधिवेशन सम्पन्न करने का तुगलगी फरमान जारी किया। नतीजा बिना किसी अचार सहिता, बिना निर्वाचन समिति के जिसको जहा सम्भव हुआ वड़ा कमिटी बन गया। कई जगह समानांतर वड़ा अधिवेशन हुआ।
विवाद बढ़ता देखकर आलाकमान के निर्देश पर दोनों पक्ष का संयुक्त बैठक हुआ, जिसमे तय हुआ की जो वडा कमिटी बन चूका है उसमे दोनों पक्षों के कमिटी को मिला दिया जायेगा और आगे कमिटी गठन की जानकारी दे कर संयुक्त रूप से काम किया जाएगा,लेकिन ये सहमति भी लागु नहीं हुआ। विवाद और बढ़ता देखकर राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्देश से राष्ट्रीय उपाध्यक्ष लालबाबू राउत गद्दी ने अपने उपस्थिति में दोनों पक्षों का संयुक्त बैठक करके दोनों को मिलाने का प्रयास किया और सभी विवादित जगहों पर समाजोजन के लिए पांच सदस्यीय समिति बना दिया।
समिति बनने के बाद भी समस्या सुलझने के बजाय और उलझते जा रहा है। अभी तक जिला में सिर्फ दो गुट थे लेकिन सही समायोजन नहीं होने के कारण गुट पर गुट बनते जा रहे है। कई एक गुट से दूसरे गुट में पलायन करने वाले है,इससे शक्ति संतुलन बदलने वाला है।   महानगरपालिका, नगरपालिका और गांवपालिका के समानांतर अधिवेशन होने के आसार है। यहाँ तक की जिला अधिवेशन भी समानांतर होने की खबरे आरही है। सभी नेता आरोप प्रत्यारोप कर  रहे है। कोई अपने घर परिवार के लोगो को,  कोई अपने जाती के लोगो को स्थापित करने में लगा है। पर्सा जिला की अन्य पार्टिया चटखारे ले लेकर मजाक उड़ा रहे है। जिसतरह के माहोल बन गए है कोई नया आदमी फोरम में जुटना नहीं चाहेगा।  ये तो तय है की विवाद लम्बा खींचने पर फोरम का एक घटक फोरम छोड़ कर चला जायेगा और स्थानीय चुनाव से पहले वाले हालत में फोरम आधा होकर रह जाएगा।

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