बारा के तूफान में फेसबुक मार्फत सहयोग से महिलाओ के लिए ‘हाइजेनिक किट’ बितरण
रेयाज आलम,चैत्र २6 गते मंगलवार । कहा जाता है, की एक औरत का दर्द एक औरत ही समझ सकती है, बारा-पर्सा में आए चक्रवाती तूफान (बवंडर) में राहत सहयोग करने के लिए बिभिन्न संघ संस्था में सक्रीय रहने वाली महिलाओ का समूह ‘वुमन फर वुमेन’ ने पीड़ित महिलाओं को राहत बितरण किया। महिलाओ के समुह ने फेसबुक मार्फत सहयोग आह्वान किया, जिसमे बिभिन्न संघ संस्था तथा बिभिन्न दाताओ के सहयोग से उक्त राहत सामाग्री वितरण किया गया। अभी तक नकदी और सामान मिलाकर ११ लाख से ज्यादा रकम संकलन हो चूका है और संकलन-बितरण कार्य जारी है।
राहत बितरण में महिलाओ के जुडी सामग्री ‘हाइजेनिक किट’ बितरित की गई। उक्त किट में महिला मैत्री योग्य दैनिक उपभोग्य सामान थे,एक किट में सेम्पु, नहाने का साबुन, कपडा धोने का साबुन, सिनेटरी प्याड, तोलिया, रबर, तेल, ५ ब्रस, २ मच्छरदानी , टर्च, नेलकटर जैसे सामान थे।
राहत बितरण में ऐसी सामग्री की जरूरत क्यों पड़ी ? इसका कारण बताते हुए नीलिमा पन्त ने बताया की महिलाओ में स्वछता की कमी के कारण बहुत सी बीमारिया पनपती है जो मौत का कारण बनती है। ५ ऐसी खतरनाक बीमारियां हैं, जिनका महिलाओं के स्वास्थ्य पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। जैसे दिल की बीमारी के कारण लगभग २९ प्रतिशत औरतें मृत्यु को प्राप्त हो जाती हैं। बहुत-सी ऐसी महिलाएँ भी हैं, जो गंदगी-धूल के कारण सांस लेने में तकलीफ, सीढ़ियाँ चढ़ने में असमर्थता जैसे कारणों से दिल की बीमारी होती है। स्तन कैंसर भी औरतों में पाई जाने वाली एक सबसे प्रचलित बीमारी है। यह लंग कैंसर के बाद दूसरे स्थान पर पाई जाने वाली ऐसी बीमारी है, जो महिलाओं की मृत्यु होने का एक सबसे प्रमुख कारण है। ऑस्टियोपोरोसिस भी औरतो को डराता है। आज देश में लगभग ६० प्रतिशत महिलाएँ इस बीमारी से ग्रस्त हैं। यह बीमारी बड़े स्तर पर इलाज कराने योग्य है। जिसमे अधिकतर महिलाएं ३० वर्ष की आयु के बाद बहुत मोटी होने लगती हैं। इससे इनकी नई हड्डियां बननी समाप्त हो जाती हैं और पुरानी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। तनाव की स्थिति महिलाओं में पुरुषों की तुलना में अधिक संख्या में पाई जाती है। ऑटोइम्यून डिसिज उन बीमारियों के समूह में आती है, जिनमें इम्यून सिस्टम हमारे शरीर पर अटैक करता है और टिशूस को नष्ट कर देता है या बदल देता है। इस श्रेणी में लगभग ८० से भी ज्यादा गंभीर क्रानिक बीमारियां हैं जिसमें ल्यूपस, मल्टीपल स्किलरोइसिस और मधुमेह आदि भी शामिल हैं। यह विश्वास किया जाता है कि ७५ प्रतिशत ऑटोइम्यून बीमारियां महिलाओं में पाई जाती हैं।
नीलिमा पन्त ने बताया की राहत बितरण में महिलाओ की इन समस्याओ पर किसी का ध्यान नहीं जा रहा था,ज्यादातर महिलाओ की बीमारिया गंदगी के कारण आती है,इसलिए हमलोगो ने सोशल मीडिया मार्फत सहयोग लेकर एक प्रयास किया है। हमलोग इस आगे भी निरंतरता देंगे। राहत वितरण कार्य में निलीमा पौडेल, कबिता खडका, बिमला गुप्ता, लक्ष्मी खरेल, सुभद्रा बन्जारा, प्रभा खडका, निलम पन्थ, मुना दाहाल, उर्मिला साप्कोटा, शैली चौधरी समेत की सहभागिता रही ।





