आज से चैती छठ का शुभारम्भ
९ अप्रैल
चैती छठ पूजा चार दिन का पर्व होता है, जो चैत्र शुक्ल चतुर्थी से आरंभ हो कर चैत्र शुक्ल सप्तमी तक चलता है। इस दौरान लगातार 36 घंटे का व्रत रखा जाता है। पहला दिन नहाय खाय होता है, इस दिन सेन्धा नमक, घी से बना हुआ अरवा चावल और कद्दू की सब्जी प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है। दूसरे दिन खरना पूजा के साथ उपवास शुरू होता है। इस दिन भर व्रत करने के बाद शाम को सूर्यास्त के समय पूजा करने के बाद खीर का भोग लगा कर उसका प्रसाद ग्रहण किया जाता है। तीसरे दिन यानि षष्ठी को अस्त होते हुए सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य अर्पण करते हैं। अंत में सप्तमी के दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य दे कर चार दिन की ये पूजा सम्पन्न होती है।
पवित्रता का रखते हैं ध्यान
चैती छठ पूजा में पवित्रता का विशेष ध्यान रखना होता है। सारी पूजा पूरी शुद्धता के साथ की जाती है। छठ पूजा के चारों दिनों के दौरान घरों में भजन और प्रचलित लोकगीत गाने की परंपरा है। हांलाकि छठ व्रत अधिकतर महिलाओं द्वारा ही किया जाता है, परंतु पुरुष भी इस व्रत को रख सकते हैं। व्रत करने वाली महिलायें परवैतिन कहलाती हैं। व्रत के चार दिनों में उपवास के साथ कठिन नियम और सयंम में रहना होता है। इस अवधि में लोग आराम दायक बिस्तरों और सुख साधनों से दूर रहते हैं। कोरे तथा बिना सिले वस्त्र पहने जाते हैं। माना जाता है कि छठ का व्रत करने वाली महिलाओं को संतान की प्राप्ति और उसके सकुशल रहने का आशिर्वाद मिलता है। पुरुष भी अपने मनोवांछित कार्य में सफल होने के लिए व्रत रखते हैं।

