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मौत आई तो जिंदगी ने कहा-‘आपका ट्रंक कॉल है साहब’ : नहीं रहे हास्य कवि प्रदीप चाैबे

 

१२ अप्रैल

स्मृति शेष

प्रसिद्ध हास्य कवि प्रदीप चौबे का निधन हो गया है। प्रदीप ने हंसी के साथ व्यंग्य का अनोखा पुट अपनी कविताओं में दिया। चौबे ने हमेशा देश, काल, वातावरण और समाज को ध्यान में रखकर अपना हास्य अंदाज सबके सामने रखा है। साथ ही उनकी कविताओं ने रूढ़िवादी पर करारा प्रहार किया है। हाल में वे कपिल शर्मा के शो में दिखाई दिए थे।२६ अगस्त १९४९ को जन्मे प्रदीप चौबे के बिना हर हास्य महफिल अधूरी थी। उनके करीबियों का कहना है कि वो जितना लोगों को हंसाते थे उनता ही अपने अंदर के ग़म को छुपाए रहते थे। उन्हें गाल ब्लैडर का कैंसर भी था। पिछले दिनों हुई छोटे बेटे की आकस्मिक मृत्यु के बाद उन्हें गहरा सदमा लगा था।

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उनके निधन से साहित्य समाज को अपूरणीय क्षति पहुंची है।

हर तरफ गोलमाल है साहब…

हर तरफ गोलमाल है साहब
आपका क्या ख्याल है साहब

लोग मरते रहें तो अच्छा है
अपनी लकड़ी की टाल है साहब

आपसे भी अधिक फले फूले
देश की क्या मजाल है साहब

मुल्क मरता नहीं तो क्या करता
आपकी देखभाल है साहब

रिश्वतें खाके जी रहे हैं लोग
रोटियों का अकाल है साहब

इसको डेंगू, उसे चिकनगुनिया
घर मेरा अस्पताल है साहब

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तो समझिए कि पात-पात हूं मैं
वो अगर डाल-डाल हैं साहब

गाल चांटे से लाल था अपना
लोग समझे गुलाल है साहब

मौत आई तो जिंदगी ने कहा-
‘आपका ट्रंक कॉल है साहब’

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