केन्द्र संघीयता का विराेधी था और आज भी है : राजपा नेत्री रानी शर्मा
आदर्श और विकासोन्मुख विचारधारा की राजनीतिक समाजसेवी रानी शर्मा, जो गणतंत्र नेपाल के प्रदेश नंबर दो के महोत्तरी जिला के संसदीय क्षेत्र नंबर 3 (2) से विधायक पद पर निर्वाचित हैं। मधेश और मधेसियों के अधिकार के संरक्षण तथा पहचान हेतु संघर्षरत एक जीवंत पार्टी (रा.ज.पा.) राष्ट्रीय जनता पार्टी के केन्द्रीय वरिष्ठ महिला उपाध्यक्ष पद की हैसियत से मधेश आन्दोलन में अपना स्वतंत्र और स्वच्छ छवि आम जनमानस के हृदय में स्थापित करने में सफल रानी शर्मा का प्रत्येक कदम जनहित में सक्रिय देखा जा रहा है। प्रत्येक घर को अपना घर और व्यक्ति को अपना भाई, चाचा, माँ, बहन मानकर दिनरात जनता के लिए समर्पित रानीशर्मा आज इस क्षेत्र में राजनीति के आदर्श को स्थापित कर भ्रष्ट नेताओं के लिए संकटकालीन अवस्था सृजना करती जा रही है। आम नागरिक उनके कार्यशैली से संतुष्ट और खुश नजर आ रहे हैं, वहीं भ्रष्ट राजनीतिकर्मीयों को अपना व्यापार डूबने की चिन्ता पकडे हए है। प्रस्तुत है उनसे हिमालिनी प्रतिनिधि श्री अजय झा की हुई बातचीत का सारांश जिसमें राज्य के विकास एवं शिक्षा पर उनसे बात की गई है ।
विधायक रानी शर्मा से विकास के बारे में पूछने पर जबाब में बोलीं कि “मैं अपने क्षेत्र के एक भी वार्ड को विकास कार्य से अछूता नहीं रहने दूंगी। मैं चाहती हूँ कि, इस क्षेत्र के प्रत्येक महिला को आधुनिक शिक्षा पाने के लिए अभिप्रेरित करूँ। इसके लिए आवश्यक सभी सामग्रियाँ सामुदायिक विद्यालय को क्रमशः उपलब्ध कराने में जोड़तोड़ से काम कर रही हूँ। इसी अभियान के तहत एक नमूना विद्यालय स्थापना करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।”
दुसरा सवाल जो मैंने समग्र मधेश के लिए ही पूछा था कि, यह सार्वजनिक हो गया है कि, यहाँ की महिलाएँ अति कुपोषण के शिकार हैं; फिर आप और आपकी सरकार इसपर क्या सोच रही है? इस प्रश्न की गंभीरता को हृदयंगम करते हुए बोलीं कि ‘यह एक गंभीर चुनौती है और हम इसको स्वीकार भी करते हैं। सरकार अपने सामर्थ्य और सोच के अनुसार काम करेगी। केंद्र सरकार इस प्रदेश के प्रति वक्र दृष्टि रखती है। हर काम में षडयंत्र पूर्वक अवरोध संघीय सरकार के द्वारा पैदा किया जाता है। इस विषय पर एकमुष्ट काम होना अति आवश्यक है। छिटफुट रुप मे हो रहे काम से समस्या का जड़ समाप्त नहीं होनेवाला है। केंद्र से लेकर स्थानीय स्तर तक का कर्मचारी समायोजन न होने के कारण एक आर्थिक वर्ष अन्यौल अवस्था में ही बीत चूका है। इस वर्ष कार्यक्रम को गति प्रदान करने में हम लोग जी जान से लगे हुए हैं परन्तु इस दो नंबर प्रदेश के प्रति संघीय सरकार का वक्र दृष्टिकोण कायम ही है।
वास्तव में संघीयता हमारी ही माँग थी। वो लोग तो इसके विरोधी थें और हैं। वो अभी भी इसे समाप्त करने पे लगे हुए है। इस परिस्थिति में हम अपनी पूर्ण क्षमता के अनुसार काम नहीं कर पा रहे हैं। हमारी प्रत्येक योजना में केंद्र अपने ढंग से विरोध जताता रहता है। यहाँ अशिक्षा और गरीबी दो प्रमुख बिकराल मुद्दा है। इसके लिए महिलाओं में शैक्षिक चेतना और प्राविधिक तालीम के जरिए आर्थिक अवस्था को सुधारने का ठोस कार्यक्रम लाना होगा। इसके लिए आम महिलाओं तथा बालिकाओं के लिए सहज उपलब्ध प्राविधिक शिक्षा तथा तालीम केन्द्रों की स्थापना को मैंने अपने कार्यक्रम का केन्द्र बनाया है। CTEVT नेपाल द्वारा व्यवस्थित हेल्थ असिस्टेंट, ओप्थेल्मिक, नर्सिङ्ग, रेडियोग्राफी, लैब टेक्निसियन लगायत अन्य प्रबिधिक पाठ्यक्रम को संचालन करने की ओर विशेष पहल कर गाँव में छुपे कोहिनूर को विश्व के मंच पर लाने का प्रयास करुँगी। किसान को सुविधा और सम्मान अर्पण करते हुए आधुनिक खेती हेतु खाद और बीज का समयानुकूल व्यवस्था होना मुझे अति अनिवार्य लगता है। किसान कमजोर हो रहे हैं। जीवन शैली टूट रहा है। खेती भगवान् भरोसे है। ऋण बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण इलाका ऊर्जाहीन हो गया है। युवा विदेश पलायन हो रहे हैं। पारिवारिक जीवन वर्वादी के कागार पर है। सामाजिकता बिखर रहा है। एक प्रकार से देखा जाय तो, समस्या ही समस्या नजर आता है। सभी का समाधान भी खोजना है, लेकिन प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाना होगा। इस प्रकार ग्रामीण जीवन स्तर को मजबूत बनाने तथा दीर्घकालीन सुविधा उपलब्ध कराने हेतु स्थानीय स्तर में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों को वैज्ञानिक ढंग से उपयोग में लाकर तालीम प्राप्त महिलाओं के द्वारा निर्मित सामग्रियों के विक्री वितरण के लिए बाजार का व्यवस्थापन कर उन्हें व्यक्तिगत आर्थिक सम्पन्नता के साथहि सामाजिक विकास के पथ पर अग्रसर काराने का प्रयास करुँगी। तत्काल यही एक उपाय है जिसे हम अपने प्रयास से भी आगे बढ़ा सकते हैं।
बाल विवाह के कारण समाज में सामूहिक समस्याएँ उत्पन्न हो रहे हैं। बालविवाह सीधे हमारे जीवन शैली और सामजिक व्यवस्था से सम्वन्धित है। शारीरिक और मानसिक रूपसे अविकसित माता के गर्भ से पूर्ण स्वस्थ संतान की अपेक्षा नहीं की जा सकती। एक अविकसित बच्चा देश और परिवार के लिए अभिशाप के समान होता है। यह किसी भी देश और समाज के लिए पतन का प्रमुख कारक तत्व होता है। अतः वालविवाह को निरुत्साहित करने के लिए भी शिक्षा पर विशेष जोड़ देकर बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनाना सामाजिक परिवर्तन के लिए एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
महिलाओं में कुपोषण एक समस्या के रूपमें देखा जा सकता है। इसका मौलिक कारण भी महिला खुद ही है। एक महिला अपने पुरे परिवार को समय पर खिलाती है, देखभाल करती है। बच्चों को संभालती है परन्तु खुदपर ध्यान नहीं देती है। यही से कुपोषण का चक्र सुरु होता है। वास्तव में यह चेतना के कमी और त्याग का भाव तथा पारिवारिक माया मोह के कारण भी वो इस प्रकार से व्यवहार करती है। अपना जीवन परिवार के लिए न्योछावर करना अपना धर्म समझती है जो खुद उसके लिए दुखकारक सावित होता है। इस समाज में एक परम्परागत सोच है कि पुरुष वाहर का काम करेंगे और महिला घर के भीतर का। अब, जबकि संसार बहुत विकसित हो चला है, महिलाएँ विकास और प्रविधि के हर क्षेत्र में अपना अमुल्य योगदान दे रही हैं, तो हममे इसका वोध और परिवर्तन का सोच भी होना आवश्यक है। हम विकास के लिए भौतिक आधार तैयार करने के लिए तत्पर हैं। महिला वर्ग को घर से बाहर निकल कर अपना अधिकार और कर्तव्य के लिए पूर्ण सजग होना ही होगा।

