कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़-दार में – बहादुर शाह ज़फ़र

हसरतों ने कभी दिल का दामन नही छोडा जब भी मौका मिला अपना सर उठा लिया । जी हाँ जिन्दगी है तो हसरतें भी साथ ही चलती हैं । उसके बगैर तो जिन्दगी ही नही । आइए आज हसरतों पर कुछ चुनींदा शायरों के खयाल जानें
अब दिल की तमन्ना है तो ऐ काश यही हो
आँसू की जगह आँख से हसरत निकल आए
– अहमद फ़राज़
बाद मरने के भी छोड़ी न रिफ़ाक़त मेरी
मेरी तुर्बत से लगी बैठी है हसरत मेरी
– अमीर मीनाई
हसरतों का हो गया है इस क़दर दिल में हुजूम
साँस रस्ता ढूँढती है आने जाने के लिए
– जिगर जालंधरी
इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं
दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद
– कैफ़ी आज़मी
छुप के रहना है जो सब से तो ये मुश्किल क्या है
तुम मिरे दिल में रहो दिल की तमन्ना हो कर
– जलील मानिकपूरी
कह दो इन हसरतों से कहीं और जा बसें
इतनी जगह कहाँ है दिल-ए-दाग़-दार में
– बहादुर शाह ज़फ़र
किस किस तरह की दिल में गुज़रती हैं हसरतें
है वस्ल से ज़ियादा मज़ा इंतज़ार का
– ताबाँ अब्दुल हई
यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले
आज क्यूँ दिल में छुपी बैठी है हसरत मेरी
– अमीर मीनाई
ग़म-ए-ज़माना ने मजबूर कर दिया वर्ना
ये आरज़ू थी कि बस तेरी आरज़ू करते
– अख़्तर शीरानी

