Sun. Jul 21st, 2019

सच में यह गर्मी बड़ी बेशर्मी और साम्यवादी है : बिम्मी कालिंदी शर्मा

जो चीज या काम मर्द के लिए ठीक है वही काम अगर औरत करें तो इतनी हाय तौबा मचती है 

हिमालिनी अंक मई २०१९ |(गर्मी बड़ी बेशर्मी, ब्यंग ) यह गर्मी इतनी बेशर्मी से लोगों के शरीर से कपडेÞ उतरवा रही है कि क्या कहें । हर कोई गर्मी से परेशान है और कपड़े को अपना दुश्मन मान रहा है । इसी लिए अपने शरीर के कपड़े ऐसे खोल रहा है जैसे केले का छिलका निकाल रहा हो । जितनी गर्मी बढेÞगी व्यापारियों की उतनी ही चांदी होगी । गर्मी के कारण पानी से ले कर तरबूजे तक का बिक्री जो बढ़ गया है । बच्चे आईसक्रीम के लिए ललचा रहे हैं । गर्मी के कारण परेशान औरतें भगवान ने उनको मर्द क्यों नहीं बनाया ? यह कहते हुए भगवान को भी कोस रही हैं । उन्हे सिर्फ जांघिया पहन कर रहने को जो नहीं मिल रहा है । ज्यों–ज्यों गर्मी बढ़ती जाती है इंसान के शरीर से वस्त्र घटते जाता है । बस वह नंगे होने से बचा रह जाता है ।
अगर नागा देश के वासिंदे होते तो नंगे भी मजे से रह लेते । यह गर्मी मर्द के लिए जितनी उदार है उतनी औरत के लिए नहीं ।

मर्द सारे कपडेÞ उतार कर सिर्फ एक तौलिया या गमछा लपेट कर घर में बैठ सकता है पर औरत नहीं । वैसे औरतें भी गर्मी में स्लीवलेस कपड़े से ले कर हाफ पैंट तक तो पहन ही लेती है । सबसे ज्यादा ताज्जुब इस बात पर लगता है कि गर्मी में एक औरत या लड़की के सामने मर्द सिर्फ तौलिया लपेटे उपर बिना कुछ पहने बैठ जाता है और मजे से बात भी कर लेता है । उसमें शर्म, लिहाज नाम कि कोई चीज नहीं बचती गर्मी में । अगर औरत भी इसी तरह अपने मेहमान के सामने बैठ जाए तो यही जालिम समाज उसे बदनामी के चादर में लपेट देता है ।
कितना फर्क है समाज के रिवायतों में ? जो चीज या काम मर्द के लिए ठीक है वही काम अगर औरत करें तो इतनी हाय तौबा मचती है । मर्द को भी तो औरत के सामने आने पर मिनिमम सभ्यता का ख्याल रखें और कपड़े पहने । पर नहीं मर्द तो अधनंगा भी बाहर घूमे तो समाज कुछ नहीं कहेगा । पर औरत यही काम गलती से भी कर दे तो ना बाबा ना बवाल समाज में आ जाएगा । नेपाल और नेपाली समाज में तो मर्द जितना नंगा होगा वह उतना ही प्रतिष्ठित और पूजित होगा । नेपाल में ही नहीं नेपाली मर्द विश्व में कहीं भी हो वह औरत या लड़की के सामने बिना उपर कपड़ा पहने छाती खुला रखे बैठ सकता है । बेचारा नंगा तो नहीं है उसने कम से कम कच्छा तो पहना है यही कह कर समाज और परिवार गर्मी में मर्दों का बचाव करती है । गर्मी न हुई त्यौहार में मिलने वाली कोई छूट हो गई जिसे मर्द आसानी से कहीं भी भुना सकता है पर औरत नहीं । वाह भई गर्मी तुम भी नश्लवाद, वर्ग और जेंडर में फर्क करने वाले नेपाल सरकार जैसी ही हो ।

घर हो या बाहर का ज्यादा काम तो औरत ही करती है । पसीना भी उन्हें ही ज्यादा आता है पर औरत को ढकीं, छुपी और छुईमुई का पौधा बना कर ही रखना चाहता है समाज । इसी लिए तो इतनी गर्मी में भी साढे पांच मीटर का लंबा कपड़ा जिसे साड़ी कहते हैं उसे पहन कर वह भी बकायदा मोटे कपड़े के पेटीकोट के साथ । बेचारी उन औरतों पर इस गर्मी में क्या गुजरती होगी जो यह पहनती है । सबसे ज्यादा तो सहना पड़ता है मुस्लिम औरतों को जो सलवार सूट पहन कर भी उपर से काला चोगा जैसा काला बुर्का पहन कर कड़ी धूप में चलती है और थोड़ी सी उफ भी नहीं करती । इन मुस्लिम औरतों को कोई बड़ा पुरस्कार देना चाहिए ऐसी भीषण गर्मी में भी काला बुर्का पहनने का जो हिम्मत करती है । उनको भी तो बुर्के से आजाद होने का मन करता होगा पर कौन सुने उनकी ?

सच में यह गर्मी बड़ी बेशर्मी और साम्यवादी है । सब से एक जैसा सुलूक नहीं करती । कोई एसी में आराम फरमा रहा है तो किसी के नसीब में हाथ से चलने वाला पंखा भी नहीं । उपर शनिदेव और नीचे यह धरती दोनो प्रतिष्पर्धा कर रहे हैं आग उगलने में । अन्न उपजाने वाली धरती अभी गर्मी से आग उपजा रही है । और जाड़े में दिखाई पड़ने में भी मुश्किल सूर्य देव अभी अपनी पूरी ताकत के साथ ज्यादा समय तक जहां कहीं दिख जाते हैं । सूर्य देव भी सब को उसके किए की सजा दे रहे हैं । गर्मी बहुत निठल्ला और बेरोजगार सा है जो दिनभर छत और आँगन पर आ कर पसर जाता है । न खुद जाता है न किसी को कहीं जाने देता है । घर के जेल में बेचैनी से बंदी बनकर बैठे रहो दिन भर । बस पानी का घूंट भरो, गले को तर करो और गर्मी को एक हजार आठ गाली देते रहो ।

और गर्मी का सब से ज्यादा फायदा उठाती है बिजली रानी । घंटो तक रूठ कर ऐसे चली जाती है जैसे कोई बीबी रूठ कर मायके गई हो । बहुत देर के मान मनौवल और फोन करने के बाद किजली रानी ऐसे घर में पधारती है जैसे दीपावली में लक्ष्मी जी आई हों । गर्मी और बिजली का चोली दामन का साथ है । जहां गर्मी का पारा बढ़ता है बिजली को भी बुखार आ जाता है । बिन बिजली न गर्मी जाएगी न आईपीएल देखने को मिलेगा न ईलेक्सन का अपडेट ही पता चलेगा । न फेसबुक, ट्विटर और ह्वाट्स् एप में अपने प्रेमी से जी भर कर बात करने को मिलेगी । बिजली रानी को भी लोगों की कमजोरी पता है इसी लिए वह इठलाते हुए जाती है ओर मटकते हुए आती है । क्योंकि बिजली रानी के अभाव में लोग ठंडे पानी के लिए भी तरस जाते हैं । इसी लिए अब बिन घरनी घर भूत का डेरा वाले मुहावरे को बदल कर बिन बिजली घर, अफिस सब सून कहना चाहिए ।

जब बिजली रानी गर्मी में ऐंठने लगती है तब जल देव भी अपना नखरा दिखाने लगते है । वह भी नल से ऐसे गाएब हो जाते हैं जैसे गधे के सिर से सिंग । बिजली और पानी हाथ मिला लेते हैं और लोगों को कष्ट देने के लिए । बिजली नहीं आएगी तो पानी भी नहीं आएगा । पानी चाहिए तो बिजली को बुलाओ । बिना बिजली के तो काम चल जाएगा पर बिना पानी के कैसे रहेगा कोई ? जल के अभाव में निर्जल हो कर लोग मछली जैसे तड़पने लगते है । पर गर्मी को इस से कोई मतलब नहीं । यह तो बेशर्म हो कर अपना पारा बढ़ाती ही जाती है और उपर आसमान से सूर्यदेव धरती का नजारा देख कर मुस्कुराते हुए यह कहते हैं कि ‘और भोगो अपनी करनी का फल, बड़ा मजा आ रहा है न ?’

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of