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पर्यटन और आवास : प्रकाशप्रसाद उपाध्याय

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हिमालिनी अंक मई २०१९ | कोई व्यक्ति जब घर या अपने नगर से बाहर घूमने की दृष्टि से या कार्यवश दूसरे नगर की ओर निकलता है तब वह या तो यात्री कहलाता है या पर्यटक । इसके अलावा उसके सामने सबसे पहला प्रश्न उस नगर में एक ऐसे स्थान की तलाश होती है जहाँ वह सुरक्षापूर्वक सुकून से रात बिता सके । मेरे भी सामने यह प्रश्न कई बार खड़ा हुआ जब मैं पर्यटक के रूप में अपने नगर से बाहर निकला ।

पिछले दिनों मुझे किसी कार्यवश बुटवल जाना पड़ा । हालाँकि बुटवल की यह मेरी पहली यात्रा नही थी । पर इस बार की यात्रा में मुझे नेपाल में पर्यटन के क्षेत्र में होेटल, गेष्ट हाउस, लॉज, होम स्टे आदि के योगदानों को गहनता से समझने का अवसर प्राप्त हुआ । काठमांडू से बुटवल तक के बीच की २६७.३ कि.मी.की दूरी तय करने के क्रम में मुझे लगभग ८ घंटे की सड़क–यात्रा पूरी करनी पड़ी और मार्ग में पड़ने वाले विभिन्न जिलों के नगरों में अवस्थित विभिन्न स्तर के होटलों को देखने, समझने और वहाँ जलपान आदि करने का अवसर मिला । प्राकृतिक सुंदरता से सुशोभित इस देश का हर जिला अपनी सुंदरता बिखेरता और विशेषता प्रदर्शित करता पाया जाता है । अतः इन मार्गों से गुजरने वाले विदेशी पर्यटक एक–दो दिन के लिए ही सही किसी न किसी नगर में रुक जाया करते हैं । इन सभी स्थलों में एक–दो रात बिताने वाले पर्यटकों के लिए आवासीय और खानपान की सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जो होटल, गेष्ट हाउस और लॉज आदि के विशाल संजाल को देखकर समझा जा सकता है ।

बुटवल पहुँचने पर मैंने अपने बजट के अनुकूल एक होटल में रात बितायी । होटल सामान्य स्तर का पर आधुनिक सुविधाओं से युक्त था, जैसे कि अटैच बाथरूम, नहाने के लिए गरम पानी की सुविधा, टेलिविजन और खानपान की व्यवस्था । सड़क के बगल में ही होटल अवस्थित होने के कारण परिवहन के लिए भागदौड़ नही करनी पड़ी । वहाँ पहुँचकर मित्र को फोन करने पर वह मिलने आये । दूसरे दिन उनके निमंत्रण और आग्रह पर एक शादी में शामिल होेने पहुँचा । एक अन्य होटल के पार्टी पैलेस में शादी का समारोह हो रहा था । अतः भोजन उपरांत उस होटल के मुआयना के लिए निकला । वहाँ विभिन्न आकार और मूल्य के डिलक्स कमरे थे । होटल का भवन, उसकी बनावट और प्रांगण सभी चित्ताकर्षक थे । होटल में विद्यमान सुविधाओं के संबंध में पूछताछ की । वहाँ ठहरने के दर भी सामान्य थे और वह सभी सुविधाएँ विद्यमान थी जिसका उल्लेख ऊपर किया जा चुका है । संक्षेप में इतना ही कहा जा सकता है कि पर्यटक स्वदेशी होें या विदेशी, मार्ग में पड़ने वाले ये सभी होटलें यात्रियों के बजट के अनुकूल हैं और यात्रियों को एक–दो रात ठहरने का बोझ का अनुभव होने नही देते ।

बातचीत में यह भी पता चला कि वहाँ अंतर्राष्ट्रीय स्तर के दो से लेकर पाँच स्तर तक के सितारे होटल (स्टार होटल) भी उपलब्ध हैं, जो सितारे होटलों की सुख–सुविधा चाहने वाले विदेशी पर्यटकों को पूर्ण रूप से संतुष्ट करने में समर्थ हैं । प्रति वर्ष नेपाल आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि होने का संभवतः यह भी एक प्रमुख कारण हो सकता है । नेपाल पर्यटन विकास बोर्ड के एक रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल की यात्रा में आने वाले पर्यटकों की संख्या पिछले वर्ष दस लाख से ऊपर पहुँची । इनमें सबसे अधिक पर्यटक दक्षिण एशिया के देशों के थे । इनमें से भारतीय पर्यटकों की संख्या सबसे अधिक रही है तो दूसरे नंबर पर रहे चीनी यात्री ।

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दर्शनीय धार्मिक स्थलों से भरे बुटवल उप–महानगर में सिद्धबाबा का प्रसिद्ध मंदिर का दर्शन करने भी पहुँचा, जिसके संबंध में यह मान्यता है कि बाबा गोरखनाथ गोरखपुर से आते–जाते यहाँ रुका करते थे । अतः यह मंदिर उनके नाम से भी समर्पित है ।
प्रति वर्ष नेपाल आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में हो रही निरंतर वृद्धि को ध्यान में रखते हुए अब पर्यटन उद्योग के व्यवसायियों द्वारा इन्हें रात्रि काल में आवासीय सुविधा एवं घूमने के लिए परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न उपाय किये जा रहे हैं । चूँकि पर्यटक भ्रमणशील होते हैं और वे एक ही स्थल पर अधिक दिन नही रुकते हैं, अतः उनके लिएं रात बिताने की दृष्टि से होटलों में कमरों की संख्या बढ़ाई जा रही है । नेपाल राष्ट्र बैंक के एक रिपोर्ट के अनुसार दो वर्ष पूर्व तक नेपाल में ऐसे होटलों के कमरों की संख्या ७५,७९२ थी । अब इनमें १६.३३प्रतिशत की वृद्धि की गयी है । राष्ट्र बैंक के इस सर्वे के अनुसार काठमांडू उपत्यका में ७८२ होटलें और आवास गृह हैं, जहाँ रात्रि काल में रुकने वाले पर्यटकों के लिए २८,५०५कमरें उपलब्ध हैं । भगवान बुद्ध की जन्मभूमि लुम्बिनी के निकट का नगर भैरहवा में १७९ होटलें और लॉज हैं, जहाँ रात बिताने की दृष्टि से रुकने वाले पर्यटकों के लिए १,९८५कमरें विद्यमान हैं ।

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समान रूप से, देवी सीता की जन्मभूमि जनकपुर में विद्यमान ४७ होटलों में १,४२० पर्यटकों के लिए रात बिताने की सुविधा उपलब्ध हैं । इसके अलावा, सुदूर पश्चिम का एक प्रमुख नगर धनगढ़ी और पूर्वांचल के विराटनगर में विद्यमान होटलों में भी रात बिताने वाले पर्यटकों के लिए कमरों की संख्या में असाधारण वृद्धि की गयी है । नेपालगंज–हुम्ला मार्ग होकर मानसरोबर की यात्रा में जाने वाले भारतीय एवं स्वदेशी पर्यटकों के लिए नेपालगंज में होटलों और लॉजों की संख्या में ६८.६ प्रतिशत की वृद्धि की गयी है, जिसके फलस्वरूप रात बिताने वाले पर्यटकों के लिए कमरों की संख्या ५,७५७ हो गयी है । प्रकृति की अलौकिक सुंदरता बिखेरती नेपाल की पर्यटकीय नगरी पोखरा के ९१९ होटलों में ऐसे पर्यटकों के लिए १८,२५३ कमरों की व्यवस्था विद्यमान है । इन होटलों के अलावा सर्वसुलभ गेष्ट हाउस, लॉज और होम स्टे की सुविधाएँ भी पर्यटकों को आकर्षित करती है । होम स्टे में ठहरने वाले पर्यटकों को तो स्थानीय जनता की वेशभूषा, खानपान, धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी अवगत होने का अतिरिक्त अवसर प्राप्त होता है ।

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नेपाल में विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने वाले कई स्थल हैं । इनमें से प्रमुख विंदु हैं– विश्व का सर्वोच्च हिमशिखर माउण्ट एवरेष्ट, ऊँची–ऊँची विभिन्न हिमश्रृंखलाएँ और इनके आसपास के हरे–भरे वन्यक्षेत्र, यहाँ के विभिन्न जीव–जंतु और चहचहाती और कलरव करती पक्षियाँ, अठखेलियाँ करती नदियाँ, इन नदियों पर होेने वाले राफ्टिंग और नौकाचालन जैसी नौवहन की सुविधाएँ । लुम्बिनी, मुक्तिनाथ और जनकपुर जैसे धार्मिक स्थल और धार्मिक आस्था के विभिन्न पर्व (जिनमें इन्द्रजात्रा, गाईजात्रा, महिलाओं के पावन पर्व छठ, तीज और स्वस्थानी व्रत कथा से संबंधित अनुष्ठानें शामिल हैं, यहाँ के लोकनृत्य, नेपाली वास्तुकला और शिल्पकला के उत्कृष्ट स्वरूप को दर्शाने वाले भवनें, मंदिरें और काष्ठ एवं प्रस्तर कला की वस्तुएँ तो विदेशी पर्यटकों का मन मोहने से नही चूकतीं । इनके अतिरिक्त साहसिक क्रियाकलापों में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए विभिन्न ऊँचाइयों की पर्वत श्रृखलाओं के ऊपर आरोहण और आइस क्लाइम्बिंग और नीले आकाश में उड़ान भरते हुए प्रकृति की सुंदरता निहारने वालों के लिए पैराग्लाइडिंग और हॉट एयर बैलून जैसे क्रियाकलापों का अतिरिक्त अवसर उपलब्ध होता है । इन सभी नैसर्गिक सुंदरता का अवलोकन करने के बाद कई पर्यटक यह सोचकर बार–बार नेपाल की यात्रा में आते हैं कि ‘गर फिरदौस बर रुए जमीं अस्त, हमी अस्तो, हमी अस्तो, हमी अस्त’ (अगर पृथ्वी में कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, यहीं है) । कई पर्यटक तो यहाँ के परिवेश से प्रभावित होकर बाद में वापस आने और इसे अपना निवास स्थल बनाने पर गर्व महसूस करने लगते हैं ।
संदर्भ सामग्रीः–
काठमांडू पोस्ट (अँग्रेजी दैनिक)
नेपाल पर्यटन विकास बोर्ड ।

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