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औरतों के खिलाफ हिंसा और लड़कियों की खरीद-फरोख्त ने मुझे विचलित किया : अनुराधा काेईराला

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मेरा जन्म नेपाल के ओखलढूंगा जिले के रामजतार में हुआ। पर मेरी पढ़ाई-लिखाई भारत में पश्चिम बंगाल के कलिम्पोंग में स्थित सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल से हुई। वहां की शिक्षिकाओं से मुझे सामाजिक कार्यों की प्रेरणा मिली। 20 साल से अधिक समय तक मैंने काठमांडू के आसपास विभिन्न स्कूलों में बच्चों को पढ़ाया। 90 के दशक से इस संघर्ष की शुरुआत काठमांडू के पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन के लिए जाते समय एक छोटी-सी घटना से हुई।
मैं रोज पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन करने जाती थी, तो वहां कुछ महिलाओं को भीख मांगते हुए देखती थी। एक दिन मैंने उन महिलाओं से बात की और उनके बारे में जानने का प्रयास किया। उन्होंने जब अपनी कहानी बताई, तो मैं अंदर से हिल गई। व्यावसायिक यौन शोषण के लिए नेपाल से भीतर और बाहर बच्चों, लड़कियों और महिलाओं की तस्करी की जा रही थी। उनमें से अधिकतर महिलाओं के साथ घरेलू हिंसा, बलात्कार, यौन शोषण, खरीद-फरोख्त जैसी घटनाएं घट चुकी थीं, अंतत: वे भीख मांगने को मजबूर थीं।

मेरे मन में उनके लिए कुछ करने की इच्छा जगी। मैंने अपनी बचत की रकम से आठ औरतों को एक-एक हजार रुपये देकर इस शर्त पर सड़क पर छोटी-मोटी चीजों की दुकानें लगवाई कि वे प्रतिदिन मुझे दो रुपये वापस करेंगी, ताकि उन रुपयों से अन्य महिलाओं की मदद की जा सके। इन महिलाओं के साथ उनकी लड़कियां भी थीं। मैंने उधार के पैसों से दो कमरे किराये पर लेकर उनकी बेटियों के खाने, रहने, दवाई और शिक्षा की व्यवस्था की।
वे लोग धीरे-धीरे अपने काम में ढलने लगीं। इस बीच कुछ लोगों की सलाह पर मैंने माईती नेपाल के नाम से एक एनजीओ बनाया। माईती नेपाल की स्थापना के बाद, मैंने मानवता की सेवा का निर्णय लिया। इसके तहत सबसे पहले एक घर बनवाया ताकि उन लोगों को एक निवास स्थान प्रदान कर सकूं, जिनके पास कहीं और जाने की जगह नहीं है। मैंने औरतों के खिलाफ हिंसा और लड़कियों की खरीद-फरोख्त के खिलाफ जागरूकता फैलाने के लिए गांव-गांव जाना शुरू किया। इसके बाद जो सच मेरे सामने आया वह वाकई चौंकाने वाला था।

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कुछ गांव तो तस्करी के चलते लड़कियों से खाली हो चुके थे। मैंने कई तस्करों के खिलाफ लड़ाई लड़कर उन्हें जेल भिजवाया। जागरूकता अभियान, बचाव अभियान, तस्करों को पकड़वाना, जरूरतमंदों को कानूनी सहायता प्रदान करना, महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम, और एचआईवी संक्रमित बच्चों और महिलाओं को एंटी रेट्रो वायरल थैरेपी (एआरटी) प्रदान करना मैती नेपाल की नियमित गतिविधियां हैं।

माईती नेपाल के संघर्ष का परिणाम है कि, नेपाल सरकार अब प्रतिवर्ष पांच सितंबर को एंटी-ट्रैफिकिंग दिवस के रूप में मनाती है। अब, मैती नेपाल के पास तीन प्रिवेंशन होम, ग्यारह ट्रांजिट होम, दो धर्मशालाएं और एक स्कूल है। प्रतिदिन एक हजार से अधिक बच्चे माईती नेपाल से प्रत्यक्ष शिक्षा, स्वास्थ्य की सेवाएं प्राप्त कर रहे हैं। अब तक लगभग 12 हजार लड़कियों को अवैध धंधे से और 45 हजार से ज्यादा महिलाओं और बच्चों को भारत और नेपाल सीमा पर होने वाली तस्करी से बचाया गया है।

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इन लड़कियों, महिलाओं को यहां शिक्षा के साथ सिलाई-बुनाई जैसी चीजें सिखाई जाती हैं जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। मुझे 2010 में अमेरिका में ‘सीएनएन हीरो अवार्ड’ और 2017 में भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान दिया। जब मैं उनकी मानसिक और शारीरिक पीड़ा को देखती थी, तो मुझे बेहद तकलीफ होती थी। इसी से मुझे इस अपराध से लड़ने और जड़ से उखाड़ फेंकने की ताकत मिली।

-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।
साभार अमर उजाला

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