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सभी भाषाओं की जननी है संस्कृत : डॉ कामिनी वर्मा

 

डॉ कामिनी वर्मा,लखनऊ ( उत्तर प्रदेश )। भारतीय पंचांग के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा को सम्पूर्ण विश्व में *संस्कृत दिवस* मनाया जाता है और इस दिन भाई बहन के प्रेम का पर्व *रक्षा बंधन* भी देश विदेश में हर्षोल्लास से मनाया जाता है।संस्कृत भाषा को देवभाषा होने का गौरव प्राप्त है ।संसार की समस्त भाषाएं मानवजनित हैं ,परंतु संस्कृत देव प्रसूत ,अतः इसे देववाणी भी कहते हैं।
ऐसी मान्यता है ब्रह्मांड की समस्त तकनीक वायुमंडल में आध्यात्मिक शक्ति के उदघोष के रूप में विद्यमान है जैसा कि उपनिषद के निम्न मंत्र से स्पष्ट होता है-
*तस्मात् एतस्मात आकाशः सम्भूत:,आकाशाद वायु:,वायोर्अग्नि:,अग्नेराप:,अदभ्य: पृथिवी, पृथिव्या ओषध्य:*

परमात्मा ने शब्दों के माध्यम से आकाशवाणी की । शब्द नित्य हैं, ये आकाश में विचरण करने लगे जिन्हें ऋषियों ने दीर्घकालीन तपस्या व चिंतन के फलस्वरूप प्राप्त करके संकलित किया। इन्हीं सूक्तों का संकलन वेदों के रूप में प्राप्त होता है।अतः वेदों को श्रुति व अपौरुषेय माना जाता है। वेद विश्व के प्राचीनतम ग्रंथ हैं।अतः संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषा है । मानव जीवन के लिए अपेक्षित समस्त आध्यात्मिक, नैतिक, राजनीतिक , सामाजिक ज्ञान वेदों में उपलब्ध है। विश्व का समृद्धतम साहित्य संस्कृत भाषा में है । वेद व्यास द्वारा संकलित 4 वेद, 6 वेदांग, 18 पुराण, 108 उपनिषद, ब्राह्मण ग्रंथ, स्मृतियां संस्कृत में है । लौकिक संस्कृत में भी प्रचुर साहित्य उपलब्ध है । संस्कृत के शब्दकोश में 102 अरब , 78 करोड़ 50 लाख शब्द हैं । जो विश्व की किसी भाषा में सर्वाधिक है । वर्तमान में विश्व की समस्त भाषाओं में वैज्ञानिक व तार्किक दृष्टि से सर्वाधिक परिमार्जित भाषा है ।जिसे *जुलाई में 1989 में फोर्ब्स पत्रिका* ने कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के लिए सबसे अच्छी भाषा माना है। कंप्यूटर द्वारा गणित के प्रश्नों को हल करने की विधि अंग्रेजी में न होकर संस्कृत में है। अन्य भाषाओं की तुलना में संस्कृत में सबसे कम शब्दों में वाक्य पूरा हो जाता है। संस्कृत में बात करने से तंत्रिका तंत्र क्रियाशील रहता है। अमेरिकन हिन्दू विश्वविद्यालय के अनुसार संस्कृत में बात करने से रक्तचाप, मधुमेह व कोलेस्ट्रॉल आदि की समस्या में भी कमी आती है। यह भाषा चित्त को एकाग्र रखने में भी उपयोगी है।
प्राचीन काल मे संस्कृत जनमानस की भाषा थी , इसे राष्ट्रीय भाषा का महत्व प्राप्त था। परन्तु अरब आक्रमण के बाद से इसका महत्व न्यून होता गया । आज अपनी क्लिष्टता के कारण यह जनवाणी न रहकर देववाणी रह गयी है। संस्कृत की वैज्ञानिकता , तार्किकता, व्याकरण, समृद्ध साहित्य को देखते हुये वेदों,उपनिषदों व संस्कृत साहित्य के कुछ अंश को पाठ्यक्रम में शामिल करके अपनी समृद्ध धरोहर को अक्षुण्ण बनाये रखने की आवश्यकता है, क्योंकि संस्कृत ही वह भाषा है जो मानव को संस्कारित करके देवत्व की प्राप्ति कराने में सक्षम है तभी संस्कृत दिवस मनाने का औचित्य है।

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