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लोकसेवा–विज्ञापन संघीयता की मर्म विपरित, सरकार अधिनायकवाद की अभ्यास मेंः सांसद् यादव

 

काठमांडू, २० अगस्त । पर्सा निर्वाचन क्षेत्र नं. १ से निर्वाचित प्रतिनिधिसभा सदस्य प्रदीप यादव ने सरकार के ऊपर आरोप लगाया है कि सरकार अधिनायकवाद की अभ्यास कर रही है । उनका कहना है कि लोकसेवा आयोग द्वाारा सार्वजनिक विज्ञापन संघीयता की मर्म और भावना के विपरित है, उसको संरक्षण कर सरकार अधिनायकवाद की अभ्यास कर रही है ।
सांसद् यादव ने कहा कि आयोग द्वारा सार्वजनिक विज्ञापन के विरुद्ध वे बार–बार सदन से सडक तक संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार उसको अनदेखा कर रही है । उन्होंने कहा– ‘स्थानीय कर्मचारी भर्ती के लिए आयोग ने जो विज्ञापन प्रकाशित किया है, वह संघीयता और समावेशिता की मर्म और भावना के विपरित है । इसके विरुद्ध बार–बार सदन से लेकर सडक तक आवाज उठ रही है । लेकिन सरकार अनदेखा कर रही है, आन्दोलनकारी के ऊपर पुलिस दमन हो रहा है ।’
सांसद् यादव ने कहा कि देश में जो लोकतन्त्र और संघीयता प्राप्त है, उसमें सभी जाति और समुदाय का समान सहभागिता है, लेकिन कुछ व्यक्ति विशेष ने इसको अपने हित में उपभोग किया है । उनका कहना है कि आज भी निजामति सेवा में मधेशी और जनता लगायत उत्पीडित समुदाय की सहज पहुँच नहीं है, एकल जातीय वर्चस्व है ।
उल्लेखित विषयों में सांसद् यादव ने सभामुख की ओर से सरकार की ध्यानाकर्षण भी किया है । उन्होंने कहा है कि आज भी देश में सामाजिक न्याय प्राप्ति के लिए लड़ाई जारी है । आयोग द्वारा जारी विज्ञापन के विरुद्ध आन्दोलनरत समूह से बार्ता कर समस्या समाधान के लिए भी उन्होंने आग्रह किया है ।

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