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पूर्व प्रधानमन्त्री बाबूराम का दलित समुदाय से प्रश्न : हिन्दु धर्म क्यों स्वीकारना ?

 

५ सेपटेम्बर, काठमांडू

 

 

पूर्व प्रधानमन्त्री बाबूराम भट्टराई ने दलित समुदाय से यह प्रश्न करते हुये कहा कि जो धर्म आपको पैर से जन्मे होने का संज्ञा देता है और आपको जन्म से ही विभेद तथा अपमान करता है, उस धर्म को क्यों स्वीकार कर रहे हैं ? इस पर दलित समुदाय के जनप्रतिनिधियों बाद विवाद भी किया ।
समता फाउण्डेशन द्वारा आयोजित गुरुवार तथा शुक्रवार दो दिवसीय कार्यक्रम काठमांडू का पार्क भिलेज रिसोर्ट में किया जा रहा है । जिसके उद्घाटन में तीन पूर्व प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दहाल प्रचण्ड, शेरबहादुर देउवा और बाबूराम भट्टराई एक ही मन्च में उपस्थित थे । यह दृश्य कभी कभी देखने को मिलता है ।
तीन पूर्वप्रधानमन्त्री मध्ये प्रथम वक्ता के रुप में भट्टराई थे । जिन्होंने राज्य का विभिन्न तह में दलित के प्रतिनिधि का तथ्यांक पेश करते हुये बताया कि जातीय जनसंख्या के आधार में वह नहीं हो पाया है । उन्होंने स्पष्ट करते हुये बताया कि वर्तमान निर्वाचन प्रणाली कायम रहने तक दलित का  प्रतिनिधित्व राज्यसत्ता में समानुपातिक नहीं हो सकता है ।
उन्होंने दलित समुदाय के जनप्रतिनिधियों से प्रश्न करते हुये कहा कि हिन्दु धर्म क्यो स्वीकारना जब हिन्दु धर्म में दलित का स्थान सबसे नीचा दिखाया गया है । उन्होंने कहा कि अगर मैं इस विषय पर बोलता हूं तो कहा जाता है कि यह डलर खाकर ऐसा बोलता है । पाप लगेगा इसे, पर जो सही है वह मैं बोलता रहूंगा ।
उन्होंने कहा कि भारत के संविधान का जन्मदाता अम्बेडकर हिन्दु होते हुये भी इसके रुढिवादी के कारण अन्त में बुद्ध धर्म स्वीकारा था ।

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