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छोटी बालिकाएँ देवी का स्वरूप, नवरात्रि में इनकी विशेष पूजा का महत्तव

 

श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के तृतीय स्कंध के अनुसार दो वर्ष की कन्या को कुमारी कहते हैं। तीन साल की कन्या को त्रिमूर्ति कहा जाता है। चार साल की कन्या को कल्याणी कहलाती है। पांच साल की कन्या रोहिणी, छ: साल की कन्या कालिका कहलाती है। सात साल की कन्या को चण्डिका, आठ साल की कन्या को शांभवी कहा जाता है। नौ साल की कन्या को दुर्गा का स्वरूप मानते हैं। दस साल की कन्या को सुभद्रा नाम दिया गया है।

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रविवार, 6 अक्टूबर को दुर्गा अष्टमी और सोमवार, 7 अक्टूबर को दुर्गा नवमी है। इन तिथियों पर छोटी कन्याओं की पूजा करने की परंपरा है। छोटी बालिकाओं को देवी का स्वरूप माना जाता है, इसीलिए नवरात्रि में इनकी विशेष पूजा की जाती है, भोजन कराया जाता है और अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा के साथ उपहार भेंट किए जाते हैं।
नवरात्रि के अंतिम दिनों में अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्याओं को उनके घर जाकर ससम्मान भोजन के लिए आमंत्रित करना चाहिए। जब कन्याएं घर आ जाएं तो उन्हें साफ आसन पर बैठाएं। सभी कन्याओं के पैर धुलाकर, कुमकुम से तिलक करें। हार-फूल पहनाएं। भोजन कराएं और अंत में अपने सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा दें, अगर संभव हो सके तो उन्हें कुछ उपहार भी दें। उपहार में नए वस्त्र, शिक्षा से संबंधित चीजें, नए जूते-चप्पल, श्रृंगार का सामान दिया जा सकता है।
उम्र के अनुसार कन्याओं को कौन सी देवी का स्वरूप माना गया है
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के तृतीय स्कंध के अनुसार दो वर्ष की कन्या को कुमारी कहते हैं। तीन साल की कन्या को त्रिमूर्ति कहा जाता है। चार साल की कन्या को कल्याणी कहलाती है। पांच साल की कन्या रोहिणी, छ: साल की कन्या कालिका कहलाती है। सात साल की कन्या को चण्डिका, आठ साल की कन्या को शांभवी कहा जाता है। नौ साल की कन्या को दुर्गा का स्वरूप मानते हैं। दस साल की कन्या को सुभद्रा नाम दिया गया है।

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