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राम-सीता विवाहोत्सव : हर धर्म के व्यक्ति में है उत्साह, राम हमारे दिल में हैं

 

1 दिसंबर 2019 को विवाह पंचमी है। इस दिन भगवान राम और मां सीता का विवाह हुआ था। बिहार के मिथिला क्षेत्र सहित नेपाल के जनकपुर में विवाह पंचमी महोत्सव को लेकर भव्य तैयारियां की जा रही है।
अयोध्या से आई बारात के स्वागत के लिए नेपाल के धनुषा मुस्लिम समाज ने भव्य तैयारियां की है। जनकपुर में यह महोत्सव काफी व्यापक ढंग से मनाया जाता है। अयोध्या से चलकर साधु संत बारात के रूप में जनकपुर पहुंचते हैं। जगह जगह उनका भव्य स्वागत किया जाता है। इतना ही नहीं यह महोत्सव अगले चार दिन तक चलता है

मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को भगवान राम ने माता सीता के साथ विवाह किया था। अतः इस तिथि को श्रीराम विवाहोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इसको विवाह पंचमी भी कहते हैं। इस दिन भगवान् राम और माता सीता का विवाह करवाना बहुत शुभ माना जाता है।

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पौराणिक धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस तिथि को भगवान राम ने जनक नंदिनी सीता से विवाह किया था जिसका वर्णन श्रीरामचरितमानस में महाकवि गोस्वामी तुलसीदासजी ने रोचक तरीके से किया है। श्रीरामचरितमानस के अनुसार, महाराजा जनक ने सीता के विवाह हेतु स्वयंवर रचाया। सीता के स्वयंवर में आए सभी राजा-महाराजा जब भगवान शिव का धनुष नहीं उठा सकें, तब ऋषि विश्वामित्र ने प्रभु श्रीराम से आज्ञा देते हुए कहा- हे राम! उठो, शिवजी का धनुष तोड़ो और जनक का संताप मिटाओ।

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गुरु विश्वामित्र के वचन सुनकर श्रीराम तत्पर उठे और धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए आगे बढ़ें। यह दृश्य देखकर सीता के मन में उल्लास छा गया। प्रभु की ओर देखकर सीताजी ने मन ही मन निश्चय किया कि यह शरीर इन्हीं का होकर रहेगा या तो रहेगा ही नहीं। माता सीता के मन की बात प्रभु श्रीराम जान गए और उन्होंने देखते ही देखते भगवान शिव का महान धनुष उठाया। इसके बाद उस पर प्रत्यंचा चढ़ाते ही एक भयंकर ध्वनि के साथ धनुष टूट गया। यह देखकर सीता के मन को संतोष हुआ।

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फिर सीता श्रीराम के निकट आईं। सखियों के बीच में जानकी आईं, तब एक सखी ने सीता से जयमाला पहनाने को कहा। उस समय उनके हाथ ऐसे सुशोभित हो रहे थे, मानो डंडियों सहित दो कमल चंद्रमा को डरते हुए जयमाला दे रहे हो। तब सीताजी ने श्रीराम के गले में जयमाला पहना दी। यह दृश्य देखकर देवता फूल बरसाने लगे। नगर और आकाश में बाजे बजने लगे।

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