Tue. May 26th, 2020

भारत मे नागरिकता संशोधन अधिनियम पर कुछ बड़े सवालों का जवाब : डॉ श्रीकृष्ण मित्तल

  • 26
    Shares

🙏नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 पर कई सवाल उठे हैं। कुछ बड़े सवालों के जवा:
मुख्य प्रश्न – 1. यह अधिनियम क्यों?

उत्तर :- भारत में शरणार्थियों की बाढ़ आई हुयी है| पडोसी मुल्कों में धर्म परिवर्तन व् वहां के अल्प संख्यको यानी हिन्दू, सिख, इसाई, जैन,पारसी आदि की संख्या अतियाधिक कम हो चुकी है यानी या तो धर्म परिवर्तन या घातक हमलों द्वारा पलायन पर मजबूर कर दी गए हैं| क्योंकि बांग्लादेश, पाकिस्तान व् अफगानिस्तान देशों से हमारी सीमा लगती है और यह देश मुस्लिम बहुल और मुस्लिम धर्म को राष्ट्रीय धर्म मानते हैं तथा इन देशों में मुस्लिमो पर किसी प्रकार का धार्मिक अत्याचार संभव नही है इस लियी भारत सरकार ने यह अधिनियम पारित किया है|

२.प्रश्न क्या जल्दबाजी में पारित किया?
उत्तर :-जी नहीं, यह अधिनियम कितनी ही बार संसद में पेश हो चुका है और शायद एक जाति को प्रश्रय की राजनीति में पारित नही हो सका| वृतमान सरकार ने वोटो की राजनीति से ऊपर उठ कर यह विधेयक संसद में लाया और दोनों सदनों में विस्तृत चर्चा के पश्चात् असीम बहुमत से पारित हुआ है |

३.प्रश्न -क्या सविधानिक प्रक्रिया का पालन हुआ ?
उत्तर विधेयक को अधिनियम में परिवर्तित करने हेतु एक निर्धारित प्रक्रिया है जिसका पूर्ण रूप से पालन किया गया है | अगर प्रक्रिया का पालन नही तो सर्वोच्च न्यायालय इसे निरस्त कर सकता है या संशोधन हेतु आदेश दे सकता है|

यह भी पढें   सर्लाही में १५ सहित ३० नयाँ व्यक्ति में कोरोना संक्रमण, कूल संक्रमितों की संख्या ४८७

4. प्रश्न- क्या यह भारतीय हिंदुओं, मुसलमानों या किसी अन्य को प्रभावित करता है?
उत्तर- नहीं। यह किसी भी तरह से किसी भारतीय के अधिकारों को नहीं छीनता है वह चाहे मुसलमान हो या हिंदू या फिर कोई अन्य धर्म को मानने वाला।

5. प्रश्न- यह किस पर लागू होता है?
उत्तर- यह पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक आधार पर प्रताड़ना झेलने वाले केवल उन हिंदू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी और ईसाइयों पर लागू होगा जो 1 दिसंबर 2014 से पहले भारत आ चुके है।

6. प्रश्न- इन तीन देशों के धार्मिक अल्पसंख्यकों को यह कानून कैसे लाभ पहुंचाएगा?
उत्तर- उनके निवास की समय सीमा 11 वर्ष से घटा कर पांच वर्ष कर दी गई है। इस कानून के तहत वे नागरिकता पर अधिकार के तहत दावा कर सकते हैं।

7प्रश्न- यानी क्या इन तीन देशों के मुसलमान कभी भी भारत की नागरिकता नहीं ले सकेंगे?
उत्तर- ऐसा नहीं है। वे भारत की नागरिकता ले सकते हैं। इसके लिए उन्हें प्राकृतिक रूप से नागरिकता प्राप्त करने के नियमों के तहत आवेदन करना होगा जिनमें 11 वर्ष से निवास आदि शामिल हैं।

यह भी पढें   पूर्व राज्यमन्त्री चौधरी नहीं रहे

8. प्रश्न- क्या इस कानून के तहत इन तीन देशों के अवैध प्रवासियों को स्वत: ही निर्वासित कर दिया जाएगा?
उत्तर- ऐसा नहीं होगा। अब तक चली आ रही प्रक्रिया का ही पालन होगा। मौजूदा कानून के तहत ही प्राकृतिक रूप से नागरिक बनने के उनके आवेदन पर कार्यवाही होगी। हर व्यक्ति के मामले के हिसाब से तय होगा।

9.प्रश्न- केवल इन तीन देशों के बारे में ही कानून क्यों बना? केवल धार्मिक प्रताड़ना को ही आधार क्यों बनाया गया?
उत्तर- केवल इन तीन देशों में ही धार्मिक आधार पर अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का इतिहास रहा है। विशेष रूप से पाकिस्तान में धार्मिक आधार पर निशाना बनाया जाता रहा है।

10.प्रश्न- पाकिस्तान के बलूच और अहमदिया या फिर म्यानमार के रोहिंग्या को इस कानून के दायरे में क्यों नहीं रखा गया?
उत्तर- उनके मामलों पर मौजूदा कानून के तहत विचार होगा। उनके लिए विशेष श्रेणी नहीं बनाई गई है।

11.प्रश्न- श्रीलंका के तमिलों को इस कानून के दायरे में क्यों नहीं लाया गया?
उत्तर- श्रीलंका का गृह युद्ध समाप्त हुए एक दशक से अधिक हो गया। वहां धार्मिक आधार पर नहीं बल्कि नस्ल या संजातीय आधार पर भेदभाव हुआ करता था। श्रीलंका में इस भेदभाव पर काबू पा लिया गया है।

यह भी पढें   पाकिस्तान में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 50,000 के पार मृतकों की संख्या 1,067

12.प्रश्न- क्या संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत भारत शरणार्थियों को अपने यहां शरण देने के लिए बाध्य नहीं है?
उत्तर- हां और भारत अपने दायित्व से भाग नहीं रहा। लेकिन वह हर शरणार्थी को नागरिकता देने के लिए बाध्य नहीं है। हर देश के अपने नियम हैं। भारत इस कानून के तहत किसी भी शरणार्थी को वापस नहीं भेज रहा। वह संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत उन्हें शरण देगा इस अपेक्षा के साथ कि जब उनके यहां हालात ठीक होंगे तो वे अपने घर वापस चले जाएंगे। लेकिन इन तीन देशों के धार्मिक रूप से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों के बारे में इस कानून में इस वास्तविकता को स्वीकार किया गया है कि वहां धार्मिक रूप अल्पसंख्यकों के लिए हालात कभी नहीं सुधरेंगे।

Dr. SK Mittal, National convener of BJP (cow defence)

आपके और भी कोई प्रश्न हों तो लिखें
::आपका डा श्रीकृष्ण मित्तल::
🙏🌹💐🌸🌷🌺🙏

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Loading...
%d bloggers like this: