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हिन्दी और नेपाली एक ही परिवार के साझा भाषा हैः मन्त्री त्रिपाठी

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लिलानाथ गौतम/काठमांडू, १० जनवरी ।
संघीय मामिला तथा सामान्य प्रशासन मन्त्री हृदयेश त्रिपाठी ने कहा है कि हिन्दी और नेपाली भाषा एक ही परिवार के साझा भाषा है । विश्व हिन्दी दिवस के सन्दर्भ में त्रिभुवन विश्वविद्यालय केन्द्रीय हिन्दी विभाग और भारतीय राजदूतावास के संयुक्त आयोजन में शुक्रबार काठमांडू में आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधन करते हुए उन्होंने ऐसा कहा है । मन्त्री त्रिपाठी को मानना है कि कोई भी भाषा किसी भी प्रभुत्व को बढ़ोत्तरी नहीं करेगी, ज्ञान को बढ़ाएगी । उन्होंने कहा है कि अगर कोई किसी भाषा का विरोध करता है तो वह अज्ञानी है ।


प्रमुख अतिथि के रुप में बोलते हुए मन्त्री त्रिपाठी ने कहा– ‘नेपाली और हिन्दी का मूल स्रोत संस्कृति है, इसीलिए दोनों एक ही परिवार के भाषा है ।’ उनका मानना है कि हिन्दी से जुड़े होने के कारण नेपाली भाषा सम्पन्न भाषा है । कार्यक्रम में स्वागत मन्तव्य रखते हुए नेपाल स्थित भारतीय राजदूतावास के कार्यवाहक राजदूत डॉ. अजय कुमार ने भी कहा कि हिन्दी और नेपाली दोनों भाषा की एक ही लिपि है और मूल भी एक ही है । उनका यह भी मानना है कि नेपाल–भारत प्रगाढ़ सांस्कृतकि संबंध के लिए हिन्दी की महत्वपूर्ण योगदान है । कार्यक्रम में कार्यवाहक राजदूत डा. अजय कुमार ने विश्व हिन्दी दिवस पर भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रेसित शुभकामना मन्तव्य वाचन कर सुनाए थे ।

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इसीतरह कार्यक्रम में हिन्दी और नेपाली भाषा में रचित ४ साहित्यिक पुस्तकें और त्रिवि हिन्दी विभाग द्वारा प्रकाशित साहित्यिक पत्रिका ‘साहित्य लोक’ भी विमोचन किया गया । कार्यक्रम के दौरान साहित्यकार डा. रामदयाल राकेश को ‘स्व. हरिहर–सावित्री’ पुरस्कार से सम्मानित किया गया । डा. राकेश इस पुरस्कार से सम्मानित होनेवाले प्रथम पात्र हैं । यह पुरस्कार त्रिवि हिन्दी विभाग के प्रमुख डा. संजिता वर्मा की ओर से उनके सास–ससुर के नाम से स्थापित पुरस्कार है । इसीतरह डा. वर्मा के ही माता–पिता के नाम में स्थापित ‘अमरमणि स्मृति पुरस्कार’ से त्रिवी हिन्दी विभाग के उत्कृष्ट विद्यार्थी अंशु झा को सम्मानित किया है, झा भी इस पुरस्कार से पुरस्कृति प्रथम विद्यार्थी हैं ।


कार्यक्रम में त्रिवि की ओर से धन्यवादज्ञापन करते हुए डा. वर्मा ने कहा कि नेपाल में नेपाली भाषा–साहित्य के लिए बहुत सारे पुरस्कार है, लेकिन हिन्दी भाषा–साहित्य के लिए कोई भी नहीं है, इसी कमी को पूरा करने के लिए ‘हरिहर–सावित्री’ और ‘अमरमणि स्मृति पुरस्कार’ स्थापित की गई है, जो हिन्दी भाषा–साहित्य में सेवा करनेवाला और त्रिवि हिन्दी विभाग के उत्कृष्ट विद्यार्थी को दी जाएगी ।

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तस्वीरः राजनारायण यादव/हिमालिनी

कार्यक्रम में नेपाल स्थित भारतीय राजदूतावास के लिए कार्यवाहक राजदूत डा. अजय कुमार की मन्तव्य (भीडियो में)

कार्यक्रम में मन्त्री हृदयेश त्रिपाठी का मन्तव्य

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