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जनता का ध्यान वर्तमान समस्याओं से हटाने के लिए कालापानी मुद्दा उठाया गया : सर्वेन्द्रनाथ शुक्ला

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सर्वेन्द्रनाथ शुक्ला, उपाध्यक्ष
राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) नेपाल

हिमालिनी, अंक- दिसंबर 2019 ।राप्रपा से तराई मधेश लोकतांत्रिक पार्टी का राजनीतिक सफर तय करते हुए वर्तमान में सर्वेन्द्र शुक्ला जी राजपा नेपाल के उपाध्यक्ष हैं । वर्तमान राजनीतिक परिवेश पर राष्ट्रीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष सर्वेन्द्रनाथ शुक्ला के विचार–

० उपचुनाव के परिणाम पर आपके विचार क्या हैं ?
– उपचुनाव से देश की राजनीति में कोई परिवर्तन तो नहीं आ सकता किन्तु इससे एक शिक्षा अवश्य मिली है । आमचुनाव सम्पन्न होने के बाद राजनीतिक दल के नेताओं ने क्या क्या किया, चुनाव सम्पन्न होने के दो वर्षो । की अवधि में सत्ता पक्ष, प्रतिपक्षी दल ने क्या किया, दो नम्बर प्रदेश में मधेसवादी दल की सरकार ने क्या किया इन सबका असर उपचुनाव पर दिखा जिससे हमें सीखने की आवश्यकता है । देखा जाय तो इस चुनाव में सभी पार्टी की लोकप्रियता घटी है । काँग्रेस की स्थिति में थोड़ा सुधार तो हुआ है पर इसे भी संतोषजनक नहीं कह सकते हैं । जहाँ तक राजपा का सवाल है इसने भी जनता के बीच अपनी छवि का मजबूत नहीं किया है । राजपा नेपाल सरकार में नहीं है, इसने काला दिवस मनाया पर इसका असर उपचुनाव में जैसा दिखना चाहिए था नहीं दिखा । इसका कारण राजपा नेपाल के अध्यक्षमण्डल के सदस्यों की सोच है । हम जनता के समक्ष यह नहीं कह सकते कि हम वैकल्पिक शक्ति हैं क्योंकि हम उस मजबूत अवस्था में हैं ही नहीं । हम वैकल्पिक शक्ति बनना चाहते हैं पर इस दिशा में कोइृ कार्य नहीं कर पा रहे हैं ।

० उपचुनाव के परिणाम को देखते हुए क्या हम यह कहें कि परिणाम ने बड़े दल को ही स्थापित किया ?
– नहीं अभी यह नहीं कहा जा सकता है । इसके लिए हमें आम चुनाव का इंतजार करना होगा । नेकपा सबसे बड़ी पार्टी है जो सरकार का नेतृत्व कर रही है और उसी हिसाब से अपना कार्य कर रही है । काँग्रेस विपक्ष की भूमिका में है उसके बाद हम हैं । उनकी अपेक्षा हम बहुत पीछे है । । इस अवस्था में हम जनता के समक्ष यह कह ही नहीं सकते कि हम वैकल्पिक शक्ति हैं । इसमें बड़ी पार्टी ही सक्षम है इसमें कोई शक नहीं है , फिलहाल तीसरी शक्ति का अस्तित्व सामने नहीं है । परन्तु राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं है । हमारे लिए मत आर्जन की जगह सिर्फ मधेश है जबकि वहाँ भी संवैधानिक व्यवस्था मिलाने के लिए औरों को भी जगह दी गई है । यहाँ भी बँटवारा ही हुआ है । पर वर्तमान में कोई साफ तसवीर सामने नहीं है जिसके आधार पर कुछ कहा जा सके ।

० आपका एक लम्बा राजनीतिक इतिहास रहा है । अभी भी आप नेतृत्वदायी भूमिका में हैं फिर भी आपकी पार्टी मजबूत स्थिति में नहीं है क्या इसकी जिम्मेदारी आप लेंगे ?
– देखिए ऐसा है कि राजपा गठन के समय सारा अधिकार अध्यक्ष मंडल को दिया गया । दूसरे पदाधिकारी के पास कोई अधिकार नहीं है । एक वर्ष के भीतर महाधिवेशन होना था पर नहीं हुआ । अब एकीकरण की ओर सबका ध्यान कर दिया गया है । परन्तु राजपा नेपाल के भीतर ही एकीकरण नहीं हुआ है तो और दल के साथ क्या होगा ? अध्यक्ष मण्डल के बीच अभी भी मतभेद है । उन्हें सामूहिक रुप में सोचना होगा और पार्टी हित में काम करना होगा जिसका अभाव दिख रहा है । सबसे पहले राजपा को संगठित करना होगा । अभी असंतोष की वजह से न तो अधिवेशन हो रहा है और न ही एकीकरण सम्भव हो रहा है । हो सकत है कि मेरी भी कमी हो पर ज्यादा अध्यक्षमंडल ही दोषी हैं ।
० आखिर अध्यक्ष मण्डल में मतभेद का क्या कारण है ?
– बात यह है कि अध्यक्ष मण्डल में बातें तो मिल गई है । किन्तु मन नहीं मिला है । उनके बीच मतभेद नहीं मनभेद है । सबसे पहले इसे ही दूर करना होगा । पार्टी के लिए सोचना होगा । हम मजबूत होंगे तभी हमारी स्थिति मजबूत होगी । पार्टी में इसी बात का अभाव है ।

० आप कई पार्टी से आबद्ध रहे पर कोई भी पार्टी वैकल्पिक शक्ति नहीं बन पाई । क्या आपमें कोई कमी रही है ?
– मैं आजतक कभी ड्राइभिङ सीट पर नहीं बैठा । राप्रपा में जब था तो वह बहुत मजबूत स्थिति में थी किन्तु नेताओं के इगो के कारण पार्टी की अवस्था खराब हुई । तमलोपा में आया तो कई समस्या सामने आई और इसका विभाजन हो गया । यहाँ भी मूल में इगो ही था । अभी राजपा नेपाल में हूँ तो यहाँ भी शंका उपशंका में सभी उलझे हुए हैं पार्टी हित में कोई काम ही नहीं हो रहा है । इस स्थिति में वैकल्पिक शक्ति बन ही नहीं सकते । संविधान संशोधन की उम्मीद भी फिलहाल नहीं दिख रही । नेकपा को इस ओर सोचना चाहिए यह सिर्फ मधेश के लिए नहीं बल्कि आम जनता के लिए आवश्यक है । अगर यह नहीं हुआ तो इसका असर मधेशवादी दलों पर ही नहीं नेकपा पर भी पड़ेगा ।

० क्या राजपा नेपाल और समाजवादी पार्टी का एकीकरण सम्भव है ?
– इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है । इन दोनों पार्टियों को एकीकरण करना ही होगा । यहाँ सवाल व्यक्तिगत फायदे या नुकसान का नहीं है बल्कि इससे समग्र मधेश को फायदा होगा । अगर यह दोनों पार्टी मिलती है तभी तीसरी वैकल्पिक शक्ति की उम्मीद हम कर सकते हैं । यह उपचुनाव का परिणाम भी यही कहता है कि दोनों को एक हो जाना चाहिए ।

० एकीकरण होगा या चुनाव में गठबन्धन ?
– स्थानीय निकाय में गठबन्धन की स्थिति आ सकती है । केन्द्रीय चुनाव में एकीकरण सीट बटवारा के आधार पर बढ सकते हैं किन्तु गठबन्धन भी सामान्य नहीं बल्कि मजबूत गठबन्धन करना होगा २०७४ के चुनाव में ट्रायल हो चुका है अब अगले चुनाव में मजबूत गठबन्धन बनाना होगा । एकीकरण के लिए वातावरण बनाना होगा एमाले और माओवादी की तरह ।

० क्या राजपा नेपाल सरकार में शामिल होगा ?
– इसमें कोई सत्यता नहीं है यह सिर्फ चर्चा का विषय बनाया गया है । जिस समय ओली जी सरकार बना रहे थे उस समय हमें भी बुलाया गया था किन्तु हमने इनकार किया । हमारी कुछ माँगे थी । रेशम चौधरी की रिहाई, आन्दोलनकारियो्र पर लगाय गयाा मुद्दा वापसी,संविधान संशोधन, घायलों का उपचार आदि पर यह नहीं माना गया आज भी जब तक यह नहीं माना जाएगा हम सरकार में नहीं जाएँगे ।

० इस बीते महीने में सरकार के द्वारा किया गया कार्य और कालापानी विवाद आदि के विषय में आप क्या कहेंगे ?
– पाँच वर्ष की सरकार ने दो दशक के बाद होने वाले काम का प्रचार करने के कारण जनता की महत्तवाकांक्षा बढी हुई है । इसी बात से ध्यान हटाने के लिए बीच बीच में सरकार यह गेम खेल रही है । मंत्री बदलना भी इसी की एक कड़ी है जिसके लिए सरकार की आलोचना भी हुई है ।
कालापानी का विषय भी ऐसा ही है । बहुत पहले से वहाँ भारतीय सैनिक हैं उस समय भी सरकार थी और उसने भी बात उठाई ही है पर अभी यह मसला उठाना जनता का ध्यान डाइभर्ट करने के लिए किया गया है । कालापानी की समस्या कूटनीति और राजनीतिक एजेन्डा के आधार में समाधान करना होगा । सरकार वर्तमान में सिर्फ अपनी असक्षमता छिपाने के लिए राष्ट्रीयता का बात उठा रही है ।

० वर्तमान सरकार की भारत से दूरी और चीन से समीपता पर आप क्या कहेंगे ? 
– यह तो कटु सत्य है । वर्तमान सरकार नेपाल में चीन जैसी व्यवस्था लाना चाह रही है जो नेपाल के परिवेश में सम्भव ही नहीं है । पर देश में जो चीन का प्रभाव बढ रहा है वह भविष्य में कोई अच्छा परिणाम नहीं लाने वाली है । इससे देश का भविष्य अच्छा नहीं होने वाला । नेकपा नेतृत्व देश पर कब्जा करना चाहता है, इसने प्रेस स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने की कोशिश की, मानव अधिकार को नियन्त्रण में लेना चाहा यह सब लोकतंत्र को कमजोर कर रहा है । देश में एकदलीय शासन लाने की कोशिश की जा रही है । पर निरंकुशता की उम्र ज्यादा नहीं होती । अगर जबरदस्ती की गई तो जनता इसका जवाब जरूर देगी ।
–रातोपाटी डटकम से अनुदित

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