देश को आवश्यक पड़े तो निलकण्ठ भी बन सकता हूंः बाबुराम भट्टराई
६ जनवरी, काठमांडू । ललितानिवास प्रकरण में अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग द्वारा विशेष अदालत में मुद्दा दायर होने पर पूर्व प्रधानमन्त्री बाबुराम भट्टराई ने खुद को असहज महसूस होने की प्रतिक्रिया दिया है ।
उन्होंने गुरुवार ट्वीटर में लिखा है कि मैंने भी असहजता महसूस किया है । उन्होंने लिखा है कि सुर–असुर द्वन्द से प्राप्त कालकुट विष पीकर शिवजी निलकण्ठ बने थे, उसी प्रकार देश की आवश्यक्ता के लिये मैं भी निलकण्ठ बनने के लिये तैयार हूं । परन्तु दोषी को छोडकर निर्दोष को न फसाया जाय, दुष्कर्म करने वाले को सत्ता का छत्रछाया न मिले ।
भट्टराई ने बताया कि ऐन कानून और राज्यसंयन्त्र परिणाममुखी से ज्यादा प्रक्रियामुखी हो गया है ।
उन्होंने यह भी लिखा है कि ‘देश में व्याप्त भ्रष्टाचाररूपी क्यान्सर का एक अंश ललितानिवास प्रकरण में अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग का प्रयत्न स्वागतयोग्य है । पर प्रथम दृष्टि या इसमें कतिपय त्रुटि और अपूर्णता देखा जा रहा है । हमारा ऐनकानून तथा राज्यसंयन्त्र परिणाममुखी से ज्यादा प्रक्रियामुखी होने के कारण ऐसा हुआ होगा । मन्त्री दोषी पर प्रम निर्दोष देखने से….।’
ललिता निवास का १ सौ १४ रोपनी से अधिक सरकारी जमीन व्यक्ति के नाम में करने के प्रकरण में पूर्व प्रधानमन्त्री माधवकुमार नेपाल और भट्टराई का नाम भी जोडा गया था । २०६६ चैत और २०६७ वैशाख में नेपाल नेतत्ृव के मन्त्रिपरिषद् बैठक ने प्रधानमन्त्री निवास विस्तार का निर्णय किया था ।

