Fri. Aug 14th, 2020

केन्द्रीय सत्ता राजपा को करीब लाना चाहती है, मधेशवादी दल एक हैं: मुख्यमंत्री राउत

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प्रदेश नम्बर दो के मुख्यमंत्री श्री लालबाबु राउत गद्दी से वर्तमान परिवेश में प्रदेश नम्बर दो की राजनीतिक हलचल पर हुई हिमालिनी की विशेष बातचीत का संपादित अंश : सम्पादक
प्रदेश नम्बर दो पर फिलहाल आरोपों के बौछार जारी हैं, खासकर केन्द्रीय सरकार और वहाँ की मीडिया प्रदेश नम्बर दो की कमियों को लगातार बढ़ा–चढ़ा कर प्रसारित कर रही है, क्या इसलिए कि केन्द्र में अभी आपकी पार्टी शामिल नहीं है या उनका आरोप सही है इस सन्दर्भ में क्या कहना चाहेंगे आप ?
दरअसल सत्ता में वो हैं जो हमेशा से संघीयता का विरोध करते आए हैं । उनके लिए आदिवासी, मधेशी, जनजाति हमेशा से वो जाति रही है जिनपर वो शासन करते आए हैं ऐसे में उन्हें अधिकार देना सत्ता पक्ष को विचलित कर रहा है । इन्हें वो शासक के रुप में देखना पसन्द नहीं करते । प्रदेश नम्बर दो ही एकमात्र वो क्षेत्र है जो नेकपामुक्त है ऐसे में स्वाभाविक है कि वो इस क्षेत्र में किए गए कार्य या अच्छाई को तो उजागर करेंगे नहीं हाँ दुष्प्रचार जरुर करेंगे और वही कर रहे हैं । केन्द्र में शक्ति उनकी है मीडिया उनकी है इसलिए जो वो चाहते हैं वही मीडिया लिखती है । सभी जानते हैं कि मधेश ही वह जमीन है जहाँ से संघीयता का अस्तित्व सामने आया ऐसे में संघीयता को कमजोर करने का हर सम्भव प्रयास वो अवश्य करेंगे । अगर यहाँ संघीयता को उसने कमजोर कर दिया तो संघीयता ही समाप्त हो जाएगी मैं शायद इस राह का सबसे बड़ा बाधक हूँ इसलिए सोची समझी साजिश के तहत यह सब चल रहा है । पर यकीन मानिए कि मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता । हजारों मधेशी सपूतों के बलिदान का प्रतिफल है संघीयता इसे इतनी आसानी से हम हाथ से जाने नहीं देंगे भले ही ये कितनी भी आजमाइश क्यों ना कर लें ।
—सत्ता से उपेन्द्र यादव जी बाहर हो गए या बाहर किए गए ?
—बाहर किए जाने का तो सवाल ही नहीं है, उन्होंने स्वयं पद और सत्ता छोड़ा है । एक वही हैं जिनकी वजह से प्रदेश नम्बर दो ने संघीयता को महसूस किया है । माननीय उपेन्द्र जी चाहे संसद में हों या सड़क पर हों उन्होंने हमेशा संघीयता की मजबूती चाही है । उनका सत्ता में जाना इसलिए हुआ था ताकि संविधान संशोधन हो सके पर यह हुआ नहीं और उनसे सत्ता पक्ष को यह उम्मीद थी कि वो उनकी हाँ में हाँ मिलाए जो ये कर नहीं सकते थे । सत्ता पक्ष संविधान संशोधन नहीं चाहता वह उसे पूर्ववत रखना चाहता है इसलिए यहाँ मतभेद होना स्वाभाविक है । अगर माननीय उपेन्द्र जी से सत्ता यह उम्मीद करती है कि वो उनके हर सही गलत निर्णय को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ सत्ता का गुणगान करे तो यह माननीय उपेन्द्र जी नहीं कर सकते थे । क्योंकि वो हमेशा से पहचान, अधिकार और सभी के हक वाला संविधान के हिमायती रहे हैं । संविधान में संघीयता है, धर्मनिरपेक्षता है, प्रेस स्वतंत्रता है, मौलिक अधिकार की बातें हैं,समानुपातिकता आदि कई अच्छी बातें हैं जो हमें संघर्ष से मिला है किन्तु कई ऐसे मुद्दे हैं जैसे जनसंख्या के आधार पर राज्य प्रतिनिधित्व का सवाल, नागरिकता का सवाल, लैंगिक विभेद का सवाल आदि जिनमें हम संशोधन चाहते थे वो नहीं मिला है क्योंकि संघीयता तो इन्होंने दे दी पर अपनी शासक और गुलाम बनाए रखने की मानसिकता का परित्याग नहीं कर पाए । उन्हें यह लगता था कि माननीय उपेन्द्र यादव जी को पद दे दिया गया है बस वो चुप रहेंगे और उन्हें समर्थन देते रहेंगे । किन्तु उन्होंने हमेशा सरकार के गलत कदम या निर्णय की आलोचना की ऐसे में उनका विरोध होना तो स्वाभाविक था । पर जब उन्होंने देखा कि सत्ता पक्ष के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं हुआ उन्हें वहाँ रहना सही नही लग रहा था ऐसे में सरकार छोडने के अलावा उनके पास कोई और रास्ता नहीं था क्योंकि वो अपने स्वाभिमान का सौदा नही कर पा रहे थे । बस यही कारण रहा उनके सत्ता को छोड़ने का ।
—समाजवादी पार्टी के सत्ता से निकलने के बाद आपकी ही सहयोगी पार्टी राजपा नेपाल सत्ता के करीब देखी जा रही है इस सन्दर्भ में आप क्या कहेंगे ?
—देखिए ऐसा है कि सत्ता पक्ष किसी न किसी मधेशवादी दल को अपने करीब रखना चाहती रही है । जब समाजवादी दल बाहर हुआ तो राजपा को करीब लाने की कोशिश हो रही है । यह सब उनकी नीति है । जब यहाँ सरकार बनाने की बात हुई थी तभी नेकपा चाहती थी कि वो समाजवादी से मिलकर सरकार बनाए किन्तु माननीय उपेन्द्र जी ने इस बात को मानने से इनकार कर दिया उन्होंने स्पष्ट कहा कि नहीं मधेश में मधेशवादी दल ही रहेंगे । नेकपा खेल खेलने में माहिर है पर इस खेल को सभी मधेशवादी दल समझ रहे हैं । आज भी मधेश से जुडे कई मसले है. जो जहाँ की तहाँ बरकरार है । इसके लिए पहल होनी चाहिए । आज भी मधेश के कई लोग झूठे मुकदमें में फँसे हुए हैं । रेशम चौधरी आज तक कैद हैं क्या ऐसा होना चाहिए था ? उन्हें निकालने की कोशिश राजपा को करनी चाहिए । हम दोनों दल एक ही उद्देश्य को लेकर मधेश का नेतृत्व कर रहे हैं इसलिए हमें मिलकर ही आगे आना चाहिए यही मधेश के हित में होता और यही होना चाहिए । और यही सत्ता पक्ष अपना खेल खेल रही है । वो तोड़ना चाहती है जबकि हमें एक होना चाहिए तभी मधेश ही नहीं देश का भी कल्याण होगा । सरकार समृद्ध नेपाल का नारा देती है, विकास का नारा देती है हम भी यही चाहते हैं पर यहाँ भी सरकार मधेश के लिए विभेदपूर्ण नीति ही अपना रही है । वो सारी शक्ति, सारी योजनाएँ सभी अपने पास ही रखना चाहती है और रख रही है ऐसे में समृद्ध नेपाल का सपना साकार नहीं हो सकता है ।
—एक और चर्चा जोर शोर से चल रही है कि राजपा के मंत्री जितेन्द्र सोनल सहित कई मंत्रियों को बर्खास्त करने का दवाब आप पर बन रहा है ।
—ये बिल्कुल बेबुनियाद बातें हैं । ऐसी को चर्चा नहीं है पता नहीं कहाँ से यह अपवाह फैली है । मैं बस यही कहूँगा कि जब तक मैं हूँ वो सभी सुरक्षित हैं हाँ अगर मैं ही नहीं रहा तो उसके आगे तो मैं कुछ नहीं कह सकता । किन्तु हमारे सभी मंत्री अपने दायित्व का निर्वाह ईमानदारी से कर रहे  हैं ऐसे में किसी की भी बर्खास्तगी का तो सवाल ही नहीं उठता ये सब मात्र अपवाह है और कुछ नहीं । यह सरकार मधेश के अभिमत के हिसाब से ही चलेगा यह मैं आश्वस्त करता हूँ ।

—अख्तियार की निगाह प्रदेश नम्बर दो की ओर कुछ अधिक ही है इस सन्दर्भ में क्या कहेंगे ?
—बात बस इतनी सी है कि केन्द्र के पास शक्ति है और वह अपने सभी निकाय को अपने अनुसार ही चलाना चाहती है । पर साँच को आँच नहीं वो चाहे जितनी कोशिश करें पर हम अपने ईमान पर टिके हैं और टिके रहेंगे आगे आगे देखिए होता है क्या ? उनके पास अगर शक्ति है तो हमारे पास हजारों मधेशियों की शहादत की शक्ति है, जिसे हम यूँ ही बेकार नहीं जाने देंगे । मधेश की जनता को हम यही विश्वास दिलाना चाहते हैं कि हम हमेशा मधेश और मधेश के हक के लिए संघर्षरत हैं और रहेंगे ।

—आपका धन्यवाद आपने अपना अमूलय वक्त हिमालिनी को दिया ।
—हिमालिनी को दिल से आभार कि आपने मेरे विचारों को व्यक्त करने का मुझे अवसर दिया । (प्रस्तुती : सम्पादक)

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